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B'day Spl: एक नाई का भाई जो फकीर की नकल कर कहलाया मो. रफी, Google ने ऐसे दिया सम्मान

Sun, 24 Dec 2017 11:25 AM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला
टीम डिजिटल / अमर उजाला Updated Sun, 24 Dec 2017 11:25 AM IST
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google doodle today 93rd birthday of mohammad rafi
mohammad rafi - फोटो : google

मशहूर गीत 'तुम मुझे यूं भूला ना पाओगे' को अपनी आवाज देने वाले सुरों के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी को आप यू नहीं नहीं भूला पाएंगे। आज रफी साहब का 93वां जन्मदिन है। इस मौके को खास बनाने के लिए गूगल ने डूडल बनाकर मोहम्मद रफी को समर्पित किया है। मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। आप को ये जानकर हैरानी होगी कि इतने बडे़ आवाज के जादूगर को संगीत की प्रेरणा एक फकीर से मिली थी। 

google doodle today 93rd birthday of mohammad rafi
rafi

कहते हैं जब मोहम्मद रफी छोटे थे तब इनके बड़े भाई की नाई की दुकान थी, रफी का ज्यादातर वक्त वहीं पर गुजरता था। जब वो सात साल के थे तो वे अपने बड़े भाई की दुकान से होकर गुजरने वाले एक फकीर का पीछा किया करते थे जो उधर से गाते हुए जाया करता था। उसकी आवाज रफी को अच्छी लगती थी और रफी उसकी नकल किया करते थे। धीरे-धीरे लोग नाई की दुकान में उनके गाने की प्रशंसा करने लगे। इसी बीच रफी के बड़े भाई हमीद ने उनके मन में संगीत के प्रति बढ़ते रूझान को पहचान लिया था और उन्हें इस राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

google doodle today 93rd birthday of mohammad rafi
rafi - फोटो : self

आज भी रफी साहब के गाने काफी लोकप्रिय हैं। एक ऐसा फनकार जिसे आज भी लोग उनके गानों के माध्यम से याद करते हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा असमी, कोंकणी, भोजपुरी, ओड़िया, पंजाबी, बंगाली, मराठी, सिंधी, कन्नड़, गुजराती, तेलुगू, माघी, मैथिली, उर्दू, के साथ साथ इंग्लिश, फारसी, अरबी और डच भाषाओं में गीत गाए हैं। 

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rafi

मोहम्मद रफी ने सबसे ज्यादा डुएट गाने 'आशा भोसले' के साथ गाए हैं। रफी साहब ने सिंगर किशोर कुमार के लिए भी उनकी दो फिल्मों 'बड़े सरकार' और 'रागिनी' में आवाज दी थी। मोहम्मद रफी को 'क्या हुआ तेरा वाद' गाने के लिए 'नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था। 1967 में उन्हें भारत सरकार की तरफ से 'पद्मश्री' अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।

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रफी - फोटो : SELF

मोहम्मद रफी को दिल का दौरा पड़ने की वजह से 31 जुलाई 1980 को देहांत हो गया था और खबरों के अनुसार उस दिन जोर की बारिश हो रही थी। रफी साहब के देहांत पर मशहूर गीतकार नौशाद ने लिखा, 'गूंजते हैं तेरी आवाज अमीरों के महल में, झोपड़ों की गरीबों में भी है तेरे साज, यूं तो अपनी मौसिकी पर सबको फक्र होता है मगर ए मेरे साथी मौसिकी को भी आज तुझ पर नाज है।

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