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Movie Review: मलाल में मीजान ने छोड़ी छाप, हिंदी सिनेमा में टपोरी हीरो की वापसी

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: भावना शर्मा Updated Fri, 05 Jul 2019 12:39 PM IST
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meezaan jaaferi and sharmin segal film malaal review
malal - फोटो : Twitter
कलाकार: शर्मिन सहगल, मीजान जाफरी, समीर धर्माधिकारी, अंकुश बिष्ट आदि।

निर्देशक: मंगेश हडावले
निर्माता: टी सीरीज और भंसाली प्रोडक्शंस

संजय लीला भंसाली जैसे निर्माता निर्देशक ने मान लिया है कि प्रेम कहानियों का सबसे अच्छा दौर 90 का दशक रहा। यही नहीं वह अपनी नई फिल्म मलाल के जरिए ये भी बताना चाहते हैं कि उनकी अपनी फिल्म हम दिल दे चुके सनम और उसके दो साल पहले रिलीज हुई जेम्स कैमरॉन की फिल्म टाइटैनिक ही प्रेम कहानियों का सबसे बड़ा पैमाना हैं। इन दोनों फिल्मों की पटरियों के बीच चलती है उनकी नई फिल्म मलाल की प्रेम कहानी जो दरअसल 15 साल पहले रिलीज हुई एक तमिल फिल्म की रीमेक है। 
 
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Meezaan Jaffrey - फोटो : Social Media
भंसाली ने इस फिल्म के जरिए हिंदी सिनेमा को जावेद जाफरी के बेटे मीजान और अपनी भांजी शर्मिन के रूप में दो नए सितारे दिए हैं। दोनों सितारों से आगे की उम्मीदें बंधती हैं। 90 के दशक के मुंबई की कहानी कहती फिल्म मलाल का हीरो मुंबइया है। कुछ कुछ एन चंद्रा की तेजाब का मुन्ना जैसा। वैसी ही दाढ़ी। वैसा ही चलने का रौबीला स्टाइल। आमची मुंबई के इस मुलगे की मुलाकात होती है त्रिपाठी जी की बिटिया आस्था से। मुफलिसी का मारा ये उत्तर भारतीय परिवार शिवा का पड़ोसी बनता है। और, शुरू होती है तकरार, इजहार, इंकार और इसरार के मसालों में पगी एक प्रेम कहानी।
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Meezaan Jaffrey - फोटो : Social Media
कॉलेज में पढ़ाई करती लड़कियां उस दौर में शिवा जैसे लड़कों पर ही फिदा होती थीं। आवारगी उस दौर की हीरोगिरी मानी जाती थी। मलाल के निर्देशक मंगेश हडावले ने 11 साल पहले अपनी पहली फिल्म टिंग्या से दुनिया भर में वाहवाही बटोरी थी। लेकिन, फिल्म मलाल मंगेश की कम और संजय लीला भंसाली की ज्यादा दिखती है। भंसाली की फिल्मों जैसे बड़े बड़े सेट्स भले यहां न हो, लेकिन बातें फिल्म के दोनों मुख्य किरदार यहां भी बड़ी बड़ी करते हैं। मंगेश को भंसाली ने उनके कम्फर्ट जोन में ही रखा है। हीरो मराठी है तो मंगेश सहज हैं अपने हीरो को बड़ा करके दिखाने में। 
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Meezaan and Sharmin Segal - फोटो : social media
बाजीराव का वह लघु संस्करण है, मिनिएचर कहें तो शायद ज्यादा सही तरीके उसकी शख्सीयत समझाई जा सकती है। मंगेश ने फिल्म को खालिस मुंबइया बनाने में कामयाबी पाई है लेकिन फिल्म की यही खासियत इसके लिए हिंदी पट्टी में मुख्य बाधा भी है। अदाकारी के मामले में मीजान को अभी कैमरे के सामने सहज होने के मामले में काफी मेहनत की जरूरत दिखती है हालांकि फिल्म में प्रभावित वही सबसे ज्यादा करते हैं। शर्मिन का हिंदी सिनेमा की बड़ी हीरोइन बन पाना मुश्किल दिखता है। वह प्रनूतन बहल के आसपास ही दिखती हैं। अनन्या पांडे, दिशा पटानी, कियारा आडवाणी और तारा सुतारिया की लीग में शामिल होने से पहले उन्हें कई घाटों का पानी पीना बाकी है। 
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Meezaan Jaaferi - फोटो : instagram
तकनीकी रूप से भी फिल्म औसत ही कही जा सकती है। कहानी चूंकि मुंबई में ही चलती रहती है लिहाजा सिनेमैटोग्राफर रागुल के पास ज्यादा कुछ करने को है नहीं। राजेश पांडे ने इसके बावजूद एडिटिंग के जरिए फिल्म को चुस्त रखने की कोशिश की है। फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है इसका संगीत। संजय लीला भंसाली को ये समझना जरूरी है कि बाजीराव मस्तानी के मराठी लोकसंगीत पर आधारित गाने भी कालजयी नहीं बन पाए। वे बस फिल्म के सिनेमाघरों में लगे रहने तक ही एफएम पर बजते रहे। उनके प्रशंसक उनकी फिल्मों में हम दिल दे चुके सनम, देवदास या गुजारिश जैसा संगीत सुनना चाहते हैं। अमर उजाला के मूवी रिव्यू में फिल्म मलाल को मिलते हैं ढाई स्टार।
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