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Rockrtry The Nambi Effect: केरल हाई कोर्ट से बरी हो गए थे नांबी नारायणन, फिर भी सुप्रीम कोर्ट गए, जानें क्यों?

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: निधि पाल Updated Wed, 29 Jun 2022 08:07 PM IST
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Rockrtry The Nambi Effect Know Why Nambi Narayanan bring his case to Supreme Court when he was acquitted by Kerala Hight Court itself
नांबी नारायणन - फोटो : सोशल मीडिया

आर माधवन की फिल्म रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। इस फिल्म के दो ट्रेलर रिलीज हो चुके हैं। दोनों ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से खूब सराहना मिली है। बता दें कि ये एक बायोपिक फिल्म है, जिसे इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन पर बनाया गया है। इस फिल्म को खुद आर माधवन ने डायरेक्ट भी किया है। बता दें कि ये फिल्म नांबी नाराणयन को देश के गद्दारी के झूठे आरोप में फंसाने और उनके 24 साल से संघर्ष की कहानी पर बनाई गई है। इस फिल्म में नांबी नारायणन पर हुए अत्याचार को भी दिखाया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल में नांबी नाराणन कौन थे, ये केस क्या था और जब केरल हाईकोर्ट ने उनको बरी कर दिया तो फिर वह इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचे? तो चलिए आज इस रिपोर्ट में हम आपको यही बताने जा रहे हैं। 



 
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नांबी नारायणन - फोटो : Social media

इनकी हुई थी गिरफ्तारी
आज ये करीब 27 साल पहले अक्टूबर 1994 को मालदीव की एक महिला मरियम राशिदा को तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार किया गया। राशिदा को इसरो के स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन की ड्राइंग की खुफिया जानकारी पाकिस्तान को बेचने की आरोप में पकड़ा गया था। इस मामले में ये पहली गिरफ्तारी थी। इसके बाद इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन को नवंबर 1994 में तिरुवनंतपुरम से इसरो के टॉप वैज्ञानिक और क्रायोजनिक प्रॉजेक्ट के डायरेक्टर नांबी नारायणन समेत दो वैज्ञानिकों डी शशिकुमारन और डिप्टी डायरेक्टर के चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा रूसी स्पेस एजेंसी का एक भारतीय प्रतिनिधि एस के शर्मा, एक लेबर कॉन्ट्रैक्टर और राशिदा की मालदीव की दोस्त फौजिया हसन को भी गिरफ्तार किया गया था। इन सभी पर पाकिस्तान को इसरो रॉकेट इंजन की सीक्रेट जानकारी और अन्य जानकारी दूसरे देशों को देने के आरोप थे।

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नांबी नारायणन - फोटो : Social media

नांबी नारायणन को दी गई थी प्रताड़ना
इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने नाराणन से पूछताछ की तो उन्होंने आरोपों का खंडन किया। दिसंबर 1994 में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई को जांच में इंटेलिजेंस ब्यूरो और केरल पुलिस के आरोप सही नहीं मिले। जिसके बाद जनवरी 1995 में इसरो के दो वैज्ञानिक और बिजनसमैन को बेल पर रिहा कर दिया गया। हालांकि मालदीव के दोनों नागरिकों को जमानत नहीं मिली। दरअसल, इसरो के वैज्ञानिक डी शशिकुमारन और नांबी नारायणन को केरल पुलिस ने झूठे आरोप में फंसाया था और पुलिस ने अपनी कस्टडी में नारायणन के बहुत प्रताड़ित भी किया था। इस दौरान केरल में कांग्रेस की सरकार थी।

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नांबी नारायणन - फोटो : Social media

कोर्ट ने कर दिया था रिहा
अप्रैल 1996 में सीबीआई ने चीफ जूडिशल मैजिस्ट्रेट की अदालत में दर्ज एक रिपोर्ट में बताया कि यह मामला फर्जी है और आरोपों के पक्ष में कोई सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और इसरो जासूसी केस में गिरफ्तार सभी आरोपियों को रिहा कर दिया। इसके बाद सीपीएम की नई सरकार ने मामले की फिर से जांच का आदेश दिया। साल 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा इस मामले की फिर से जांच के आदेश को खारिज कर दिया।

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नांबी नारायणन - फोटो : Social media

केरल हाई कोर्ट ने दिया था मुआवजे का आदेश
नांबी नारायणन ने मुआवजे के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की। जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केरल सरकार को क्षतिपूर्ति का आदेश दिया, लेकिन राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी। साल 2012 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नारायणन को 10 लाख रुपये देने के आदेश दिए। केरल हाईकोर्ट के फैसले से नांबी नाराणन संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि जिन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें प्रताड़ना दी थी, उनपर कोई एक्शन नहीं हुआ था। केरल हाईकोर्ट द्वारा बरी हो जाने के बाद भी वह इस केस को सुप्रीम कोर्ट में ले गए।

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