आज अभिनेता संजीव कुमार की पुण्यतिथि है। वर्ष 1985 को दिग्गज अभिनेता आज ही के दिन यह दुनिया छोड़ गए थे, लेकिन अपनी फिल्मों के जरिए वह आज भी अपने प्रशंसकों की यादों में जिंदा हैं। संजीव कुमार अपने दौर के शानदार एक्टर्स में शुमार रहे हैं। इंडस्ट्री में सचिन पिलगांवकर के साथ उनकी काफी अच्छी दोस्ती थी। यूं तो दोनों की उम्र में एक अंतर था और सचिन उनसे काफी छोटे थे। लेकिन, दोनों अक्सर एक-दूसरे के साथ दिल के राज साझा कर लिया करते थे। एक बार एक बातचीत के दौरान सचिन पिलगांवकर ने वह मार्मिक किस्सा साझा किया था, जब वह संजीव कुमार से मिलने जा रहे थे और वह उनकी आखिरी मुलाकात बन गई।
Sanjeev Kumar: अधूरी रह गई थी सजीव कुमार-सचिन पिलगांवकर की आखिरी मुलाकात, जमीन पर बेसुध पड़े मिले थे एक्टर
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बातचीत के दौरान सचिन ने कहा था कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह अपने दोस्त से आखिरी बार मिलने जा रहे हैं। अफसोस की बात तो यह है कि सचिन आखिरी बार भी संजीव कुमार से मिल नहीं पाए! दरअसल हुआ यह कि संजीव कुमार ने सचिन को सुबह मिलने के लिए बुलाया था। लेकिन, सचिन काम के सिलसिले में इतने ज्यादा व्यस्त थे कि जाने की फुरसत ही नहीं निकाल सके। खुद सचिन ने एक बातचीत में इस बात का जिक्र किया था। सचिन ने बताया था, 'मैं उनसे मिलने उनके घर ही गया था। दरअसल, एक दिन पहले मैं उनसे मिला था, तब वह डबिंग कर रहे थे। तो मैंने कहा कि मैं कल मिलना चाहता हूं, तो उन्होंने कहा सुबह आजा। तो मैंने कहा नहीं मैं दो-ढाई बजे के बीच में आता हूं। उन्होंने कहा कि थोड़ा जल्दी नहीं आ सकता! तो मैंने कहा- भैया थोड़ा सा काम है तो मैं वो करके आ जाता हूं। तो उन्होंने कहा ठीक है।'
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उस दिन की बात बताते हुए सचिन ने कहा था, 'मैं उनके घर पर वादे के मुताबिक दो-ढाई बजे के बीच पहुंच गया। मैंने पूछा कहां तो बताया गया कि वह कमरे में हैं। बाथरुम में नहा रहे हैं। मैंने करीब आधा घंटे उनका इंतजार किया। फिर पूछा क्या हुआ, तबीयत ठीक नहीं क्या? तो मुझे बताया गया, 'ठीक नहीं है, उनके सेक्रेटरी डॉक्टर को बुलाने गए हैं। फिर कुछ देर बाद जमनादास जी डॉ गांधी को लेकर आए। मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ? इस पर वह बोले कि उन्हें उल्टी हुई और रात काफी लेट हो गए थे। शायद तीन या चार बजे सुबह आए हैं।' सचिन पिलगांवकर आगे बोले, 'मैंने कहा कि जब तबीयत ठीक नहीं तो भी लेट नाइट काम कर रहे हैं क्या? अभी मिलूंगा तो डांटूंगा उनको। वह मेरे दोस्त, फिलॉसफर और गाइड थे। हमारी बीच अच्छी बॉन्डिंग थी। हम एक-दूसरे से कुछ न छिपाते थे। मैंने आधे घंटा और इंतजार किया। डॉक्टर भी बाहर थे।'
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सचिन ने आगे कहा, 'मुझे थोड़ा सा शक हुआ कि इतनी देर तो नहीं लगाते कभी। सब अंदर जाने से डर रहे थे। कोई जाने को तैयार नहीं था। मैंने सोचा कि मैं जाता हूं। ऐसा क्या होगा ज्यादा से ज्यादा चेंज ही कर रहे होंगे। तो सॉरी कह दूंगा, दरवाजा बंद कर दूंगा। मैं उनके बेडरूम की तरफ बढ़ा। उनके कमरे का स्लाइडिंग डोर था, जो मैंने खोला।' सचिन के मुताबिक, 'सामने तो कोई नहीं दिखा पर नीचे कार्पेट पर दो पैर नजर आए। मैंने आगे आकर देखा तो वह दरवाजे की तरफ हाथ कर के उल्टे कार्पेट पर पड़े हुए थे। यह देख मैं जोर से चिल्लाया। जल्दी से डॉक्टर आए। उनके पास बैठे। छाती पर पंप दिया। डॉक्टर ने बताया कि काफी देर पहले ही ये प्राण त्याग चुके हैं। मेरे पैरों तले जमीन निकल गई थी। वह सिर्फ 46 के थे।'
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