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‘दंगल’ से लेकर ‘अस्सी’ तक, डायलॉग्स ने किया प्रेरित; बड़े पर्दे पर संवाद बने स्त्री शक्ति का प्रतीक

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Poonam Kandari Updated Sun, 08 Mar 2026 07:24 AM IST
सार

Women Day Special: आज दुनिया भर में महिला दिवस (8 मार्च) मनाया जा रहा है। फिल्मी पर्दे पर भी महिला केंद्रित कहानियां और संवाद आधी आबादी को प्रेरणा देने का काम करते रहे हैं। जानिए, ऐसे ही कुछ चर्चित डायलॉग्स के बारे में, जिन्होंने स्त्री शक्ति और सशक्तिकरण के मुद्दों को मुखरता से बयां किया है। 

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Women Day Special Empowerment Dialogue Movie Dangal To Assi And Pink Mary Kom
महिला दिवस विशेष - फोटो : अमर उजाला

‘तू खुद की खोज में निकल, तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की, समय को भी तलाश है।’ तापसी पन्नू अभिनीत फिल्म ‘पिंक’ में तनवीर गाजी की लिखी ये पक्तियां महिला सशक्तिकरण की राह आम स्त्रियों को दिखाती है। इसी तरह कई महिला केंद्रित फिल्मों के संवाद भी महिलाओं को प्रेरित करते हैं, उनकी शक्ति और क्षमता का परिचय दुनिया को करवाते हैं। महिला दिवस के खास अवसर पर पढ़िए, ऐसे ही कुछ चर्चित हिंदी फिल्मों के संवाद। 



 
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फिल्म 'पिंक' - फोटो : अमर उजाला

‘पिंक’ ने समझाया ‘ना’ का असल मतलब 
साल 2016 में रिलीज हुई तापसी पन्नू स्टारर फिल्म ‘पिंक’ को अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने निर्देशित किया था। फिल्म का सबसे सशक्त संवाद ‘ना का मतलब ना होता है’ रहा। यह डायलॉग बताता है कि एक महिला की अस्वीकृति का सम्मान किया जाना चाहिए। 

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फिल्म 'गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल' - फोटो : अमर उजाला
‘गुंजन सक्सेना’ ने सपनों को दी उड़ान  
साल 2020 में रिलीज हुई जान्हवी कपूर की फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ में एक लड़की के एयरफोर्स ऑफिसर बनने की कहानी थी। फिल्म में का यह संवाद दुनिया से लड़कर अपने सपनों को पूरा करनी की उम्मीद देता है। एक स्त्री को उसकी क्षमता से वाकिफ करता है। 
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फिल्म 'दंगल' - फोटो : अमर उजाला
‘दंगल’ ने दी लैंगिक समानता की सीख
साल 2016 में रिलीज हुई आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ में एक पिता अपनी बेटियों को रेसलर बनाता है। दुनिया को बताता है कि गोल्ड मेडल लड़का लाए या लड़की, मेडल तो मेडल होता है। यह फिल्म अपने इसी चर्चित संवाद के जरिए सहजता से लैंगिक समानता की सीख दर्शकों को देती है। 
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फिल्म 'गंगू बाई काठियावाड़ी' - फोटो : अमर उजाला
कभी हार ना मनाने का संदेश देती ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’
संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी(2022)’ एक वेश्या की कहानी जरूरी थी। लेकिन इस कहानी में एक स्त्री के कभी ना हार माने की क्षमता को भी बखूबी दिखाया गया। फिल्म पुरुषों को उनका कुरूप चेहरा भी दिखाती है। इस फिल्म के कई डायलॉग मशहूर हुए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चित यही डायलॉग रहा है। 
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