अभिनेता राजकुमार राव हाल ही में फिल्म ‘टोस्टर’ में नजर आए हैं। इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के साथ-साथ राजकुमार राव ने बतौर प्रोड्यूसर भी अपनी शुरुआत की है। इस फिल्म को उन्होंने अपनी पत्नी पत्रलेखा के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है, जो एक मिडिल क्लास कहानी को कॉमेडी, मिस्ट्री और थ्रिल के साथ दिखाती है। अब अमर उजाला से खास बातचीत में राजकुमार राव ने प्रोड्यूसर बनने के अनुभव, दोस्ती, शादी की यादों और फिल्म की खासियतों पर खुलकर अपनी बात रखी।
Exclusive: ‘प्रोड्यूसर बनना आसान नहीं’, राजकुमार राव ने साझा किए बतौर निर्माता पहली फिल्म ‘टोस्टर’ के अनुभव
Rajkummar Rao Interview: राजकुमार राव अब अभिनेता के साथ-साथ प्रोड्यूसर भी बन गए हैं। उन्होंने बतौर प्रोड्यूसर अपने अनुभव और फिल्म ‘टोस्टर’ को लेकर जानें क्या कुछ कहा…
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प्रोड्यूसर बनने का अनुभव कैसा रहा और आपने क्या नया सीखा?
मुझे लगता है कि यह मुझे मजबूत बनाने वाला अनुभव है। क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा काम है, बहुत मेहनत है। प्रोड्यूसर होना आसान नहीं है। मैं यही सोचता रहा कि पत्रलेखा ने यह सब कैसे मैनेज किया, उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है। मुझे लगता था कि प्रोड्यूसर का काम बहुत आसान होता होगा। एक बार आपने टीम सेट कर दी, उसके बाद सब हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है।
चौबीसों घंटे हर दिन आपको बहुत सारे फैसले लेने होते हैं। छोटे भी और बड़े भी। लगातार बातें करनी होती हैं, मीटिंग करनी होती है, बहुत सारा पेपरवर्क होता है। हर चीज के लिए हजारों लोगों से संपर्क रखना पड़ता है, तो काम बहुत ज्यादा होता है। चूंकि, हम दोनों अभिनेता हैं, इसलिए हमें क्रिएटिव चीजों पर भी ध्यान देना पड़ता है। एडिट कैसा जा रहा है, डीआई कैसा जा रहा है, साउंड कैसा सुनाई दे रहा है? हर चीज देखनी पड़ती है
पर्दे पर कंजूस किरदार और असल जिंदगी में प्रोड्यूसर, कहीं पैसों का खास ख्याल रखने की प्रैक्टिस तो नहीं चल रही?
यह बिल्कुल एक संयोग है। इसका असल जिंदगी से कोई लेना देना नहीं है। (हंसते हुए) हम लोग असल जिंदगी में बिल्कुल अलग हैं, कंजूस तो बिल्कुल नहीं है। बल्कि हम तो ऐसे प्रोड्यूसर हैं जो चाहते हैं कि सेट पर लोगों को बहुत अच्छा खाना मिले, सबको समय पर खाना दिया जाए।
हम खुद इतने साल से अभिनेता हैं, इसलिए हमें ठीक से पता है कि सेट पर किन चीजों से लोगों को दिक्कत होती है, क्या परेशानियां होती हैं। अगर लोग शिकायत करते हैं तो हम चाहते हैं कि ऐसा न हो। अगर कोई बात हम तक पहुंचे तो हम उसे तुरंत ठीक करें, क्योंकि हमें खुद पता है कि क्या सही है और क्या गलत।
आपकी फिल्म में शादी में दिए गए गिफ्ट के इर्द-गिर्द कहानी घूमती है। असल जिंदगी में शादी और गिफ्ट्स को लेकर आपकी क्या यादें रही हैं?
बहुत सारी शादियों में गए हैं हम। यहां तक की बिन बुलाए भी गए हैं। गुड़गांव में जहां बुलाया जाता था, वहां चले जाते थे। जो भी कन्यादान होता था, उसमें पैसे देते थे। हम बच्चे थे, तो सोचते थे कि पापा ने कितना पैसा दिया।
हमें तो बस यही लगता था कि पापा ने 51 रूपए दिए हैं, अब तो बहुत गुलाब जामुन खाएंगे। पूरा पैसा वसूलते थे। पूरा परिवार जाता था। घर में केवल दाल रोटी मिलती थी, लेकिन शादी का खाना, उसकी वैरायटी, बचपन में तो शादी अटेंड करने में बहुत मजा आता था।
जहां तक मेरी शादी में मिले गिफ्ट की बात है, ऐसा कुछ याद नहीं है जो इस्तेमाल नहीं कर पाए हों। लेकिन हमारी शादी की जो यादें हैं, वही सबसे खास हैं। अभिषेक बनर्जी भी थे, वो जो तीन-चार दिन हमने दोस्तों और परिवार के साथ बिताए, वही जिंदगी भर रहने वाली यादें हैं।
बतौर प्रोड्यूसर आपने अपनी पहली फिल्म के लिए डार्क कॉमेडी ही क्यों चुनी?
ऐसा कुछ नहीं था। यह पहली चीज थी जो हमारे पास आई थी। इससे पहले भी हमने कुछ और चीजें पढ़ी थीं, लेकिन यह हमें क्लिक हुई। इसे पढ़कर बहुत मजा आया। इसके किरदार और कहानी बहुत दिलचस्प हैं। हम हमेशा से यही चाहते थे कि यह फिल्म स्ट्रीमिंग के लिए बने। हमें लगा कि इस ओटीटी प्लेटफार्म पर वहां कॉमेडी कम है, तो यह वैसी फिल्म हो सकती है जिसे ऑडियंस खूब पसंद करें।
इसमें एक मिडिल क्लास सोसायटी की कहानी है, जिसे बहुत ही मजेदार तरीके से दिखाया गया है। कहानी बहुत रियल है, जो इंडियन फॅमिली से जुड़ी हुई है। सब कुछ बहुत फन तरीके से दिखाया गया है। यह एक अलग तरह की फिल्म है, जिसमें मिस्ट्री भी है, थ्रिल भी है और कॉमेडी भी है।

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