पिछले महीने के आखिरी शुक्रवार को प्राइम वीडियो पर एक फिल्म रिलीज हुई पोनमगल वनदाई। फिल्म में वकील वेनबा बनी ज्योतिका के पिता का किरदार किया है मशहूर अभिनेता, लेखक और निर्देशक के भाग्यराज ने। के भाग्यराज साप्ताहिक पत्रिका भाग्य का संपादन करते हैं, उपन्यास लिखते हैं और तमिल सिनेमा की मशहूर हस्ती हैं। के भाग्यराज का साउथ में बड़ा जलवा रहा है। वह निर्देशक भी कमाल के हैं और अभिनेता उससे बड़े धमाल के। अनिल कपूर की हिट फिल्म मिस्टर इंडिया के तमिल रीमेक में बतौर हीरो भाग्यराज ने ही काम किया है। उनकी लिखी फिल्मों पर भी कोई एक दर्जन हिंदी फिल्में बन चुकी हैं। अनिल कपूर की पहली सोलो हिट फिल्म वो सात दिन से लेकर मास्टरजी, आखिरी रास्ता, बेटा, राजा बाबू, अंदाज, गोपी किशन, मिस्टर बेचारा, घरवाली बाहरवाली इन सबकी ओरीजनल फिल्मों की कहानी के भाग्यराज की लिखी हुई हैं। आज के बाइस्कोप की फिल्म है आखिरी रास्ता, जिसमें अमिताभ बच्चन ने अदालत और देश प्रेमी के बाद बाप बेटे के रूप में डबल रोल किया। इससे पहले उनकी फिल्म महान भी रिलीज हो चुकी थी जिसमें अमिताभ बच्चन ने ट्रिपल रोल किया है।
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फिल्म आखिरी रास्ता की कहानी और पटकथा तो भाग्यराज की थी लेकिन इस फिल्म के ओरीजनल डायरेक्टर पी भारतीराजा की बजाय फिल्म के निर्माता ए पूर्णचंद्रराव ने के भाग्यराज को ही फिल्म के निर्देशन का मौका दिया। फिल्म से मशहूर निर्देशक टी रामाराव प्रस्तुतकर्ता के रूप में जुड़े थे जो अमिताभ बच्चन को लेकर इससे पहले अंधा कानून और इंकलाब जैसी फिल्में निर्देशित कर चुके थे। फिल्म में पैसा मशहूर कम्युनिस्ट नेता ए पूर्णचंद्र राव का लग रहा था जो दक्षिण में तमाम बड़ी फिल्में प्रोड्यूस कर चुके थे। टी रामाराव और पूर्णचंद्र राव के साथ अमिताभ बच्चन ने इससे पहले अंधा कानून में साथ काम किया था और वह जानते थे कि दोनों कितने मिलनसार, बातों के पक्के और तिजोरी के धनी लोग हैं।
फिल्म आखिरी रास्ता के लिए अमिताभ बच्चन को जब पूर्णचंद्र राव ने चेन्नई बुलाया तो उनके आने के पहले ही ये तय हो गया था कि ये फिल्म अमिताभ बच्चन ही करेंगे। अमिताभ को कहानी पसंद भी आई लेकिन मामला निर्देशक के नाम पर आकर अटक गया। पूर्णचंद्र को भाग्यराज पर पूरा भरोसा था। लेकिन अमिताभ बच्चन को उनका नाम इसलिए नहीं जम रहा था क्योंकि भाग्यराज ने इससे पहले कोई हिंदी फिल्म निर्देशित नहीं की थी और उन्हें हिंदी बोलनी तक नहीं आती थी। बहुत तर्क वितर्क हुए फिर अमिताभ बच्चन ने भाग्यराज को फिल्म का एक सीन खुद को समझाने को कहा। भाग्यराज ने पूरा सीन अभिनय करके समझाया। अमिताभ बच्चन को ये सब अच्छा लगा और एक मोटी रकम के एवज में वह ये फिल्म साइन करके मुंबई लौट आए।
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अमिताभ बच्चन के बारे में जो लोग करीब से जानते हैं, वे ये भी जानते है कि अमिताभ बच्चन की ना और हां में ज्यादा दूरी होती नहीं है बशर्ते उनको बात कायदे से समझा दी जाए। यहां भी वही हुआ। लेकिन एक किस्सा यहां ये भी हुआ कि अमिताभ बच्चन की कमल हासन और रजनीकांत के साथ बनी फिल्म गिरफ्तार के रिलीज होन के बाद अमिताभ एक फिल्म खबरदार नाम की करने वाले थे जिसमें उनके साथ कमल हासन को साइन किया गया था। लेकिन किन्हीं वजहों से ये फिल्म लगातार लेट होती जा रही थी और अमिताभ बच्चन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लगातार अपने मित्र राजीव गांधी के साथ व्यस्त होते जा रहे थे। उधर खबरदार का बनना टला और इधर अमिताभ बच्चन ने फटाक से ये सारी तारीखें फिल्म आखिरी रास्ता के लिए दे दीं। इस फिल्म की शूटिंग के बाद अमिताभ बच्चन लंबे समय तक फिल्मों से दूर रहे। बीच में अपने मित्रों के लिए वह जलवा और कौन जीता कौन हारा में एक दो सीन के लिए नजर तो आए लेकिन आखिरी रास्ता के बाद दो साल के लंबे अंतराल के बाद उनकी जो फिल्म रिलीज हुई थी, वह थी शहंशाह। बोफोर्स मामले में अमिताभ बच्चन के दामन पर लगे दागों को धोने में इस फिल्म ने काफी मदद की थी।
फिल्म आखिरी रास्ता की कहानी बदले की कहानी है जिसमें कानून के एक तरफ बुजुर्ग बाप है और दूसरी तरफ जवान बेटा। दोनों किरदार अमिताभ बच्चन ने ही किए। पहले रोल में वह डेविड हैं जिसकी खूबसूरत पत्नी पर एक नेता की नापाक नजर है। वह नेता जिसे डेविड अपना सब कुछ मानता है। धोखे से डेविड को जेल भेजने क बाद उसकी पत्नी से बलात्कार होता है और वह खुदकुशी कर लेती है। जेल से छूटा डेविड प्रण करता है कि वह इसका बदला लेगा और सरेआम लेगा। डेविड का बेटा अब तक बड़ा होकर पुलिस अफसर बन चुका है। वह बार बार डेविड के निशाने पर आए लोगों को बचाने की कोशिश करता है और हर बार मुंह की खाता है। यहां तक कि डेविड अपना आखिरी शिकार मरने से ठीक पहले भी करने में कामयाब रहता है।
फिल्म में मेन विलेन का रोल सदाशिव अमरापुरकर ने किया जो नेता चतुर्वेदी के रोल में फिल्म में नजर आते हैं। वैसे ये रोल पहले अनुपम खेर को ऑफर हुआ था और वो इसलिए क्योंकि फिल्म सारांश के बाद अर्जुन में भी लोगों ने उनके काम की खूब तारीफ की थी। अनुपम तब तक सुभाष घई की फिल्म कर्मा में डॉक्टर डैंग का रोल साइन कर चुके थे और उन्हें लगा कि एक साथ दो फिल्मों में विलेन बनना उनके करियर के लिए ठीक नहीं होगा। तो उन्होंने बहुत ही चतुराई से फिल्म में डेविड के दोस्त का किरदार चुन लिया। अमिताभ बच्चन के साथ अनुपम खेर की ये पहली फिल्म थी और महेश शांडिल्य नाम के इस किरदार में उनकी अमिताभ से खूब जमी भी। अमिताभ से अनुपम खेर उम्र में 13 साल छोटे हैं। लेकिन, इस फिल्म में वह अमिताभ बच्चन के दूसरे रोल के लिए उनके पिता बने हैं। फिल्म में जया प्रदा डेविड की पत्नी के किरदार में हैं और श्रीदेवी बनी हैं विजय की प्रेमिका। श्रीदेवी और अमिताभ की जोड़ी को लोगों ने इससे पहले फिल्म इंकलाब में भी खूब पसंद आई थी और यहां भी दोनों की जोड़ी परदे पर खूब जमी।
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श्रीदेवी और अमिताभ बच्चन पर फिल्माए गए गाने ‘गोरी का साजन साजन की गोरी’में अमिताभ बच्चन के लिए तो मोहम्मद अजीज ने गाना गाया लेकिन यहां महिला स्वर उस वक्त की मशहूर गायिकाओं लता मंगेशकर, आशा भोसले या अनुराधा पौडवाल की बजाय एस जानकी का है। एस जानकी को हिंदी सिनेमा में मशहूर संगीतकार बप्पी लाहिड़ी लेकर आए जिन्होंने उनकी गायिकी एक तमिल फिल्म में सुनी थी, जहां उन्होंने एक हिंदी गाना गाया। सबसे पहले एस जानकी को उन्होंने अनिल कपूर की फिल्म साहेब में मौका दिया, जिसमें उन्होंने ‘यार बिना चैन कहां रे’ जानकी से अपने साथ गाना गवाया। इसी गाने को सुनकर लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने एस जानकी को इस फिल्म में मौका दिया। एस जानकी ने ‘गोरी का साजन साजन की गोरी’ में तो कमाल का गाना गाया ही, उनको सबसे ज्यादा शोहरत जिस गाने के लिए इस फिल्म में मिली, वो फिल्माया गया था जया प्रदा पर। अपने बेटे को नहाती, दुलराती, तेल मालिश करती जया प्रदा पर ये गाना बिल्कुल फिट बैठा और ये उस साल के सबसे हिट गानों में भी शामिल रहा। आनंद बख्शी ने गाना लिखा भी बहुत ममता के भावों से है..
फिल्म आखिरी रास्ता के संवाद मशहूर लेखक राही मासूम रजा ने लिखे हैं। लेकिन, इनके संवादों को लेकर अमिताभ बच्चन और इसके निर्देशक के भाग्यराज के बीच शुरू से लेकर आखिर तक कुछ न कुछ खटपट चलती ही रही। लोग कहते हैं इसकी एक बड़ी वजह उन्हीं दिनों अमिताभ बच्चन का राजनीति में काफी व्यस्त हो जाना रहा। इलाहाबाद से दिल्ली, दिल्ली से मुंबई, मुंबई से ऊटी और चेन्नई आना जाना उन्हें तनाव दे रहा था और इस तनाव की झलक फिल्म आखिरी रास्ता की शूटिंग पर कभी न कभी दिख ही जाती थी। लोग ये भी कहते हैं कि किसी न किसी तरह से अमिताभ बच्चन फिल्म के सेट पर भाग्यराज को छेड़ देते थे और भाग्यराज अपसेट हो जाते थे।
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तब तक अमिताभ का गुस्सा भी शांत हो चुका था और वह समझ भी गए थे कि शिप का कैप्टन कौन है। उन्होंने फिर वैसा ही किया जैसा भाग्यराज चाहते थे। भाग्यराज साउथ के इज्जतदार निर्देशक और अभिनेता रहे हैं। इस सीन को फिल्माने के बाद उनका मन हिंदी सिनेमा से इतना खट्टा हुआ कि उन्होंने तमाम ऑफर आने के बावजूद बरसों तक कोई हिंदी फिल्म निर्देशित नहीं की। बाद में श्रीदेवी के कहने पर कोई 10 साल बाद उन्होंने अनिल कपूर की फिल्म मिस्टर बेचारा निर्देशित की जो उनकी अपनी ही तमिल फिल्म वीतिले विशेषांगा पर बनी थी। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल यानी सात जून को बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
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(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)
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