बरसात का मौसम आया नहीं कि कुछ लोगों की त्वचा पर दाने, मुहांसे, खुजली, कॉम्प्लेक्शन पर असर और चिपचिपेपन जैसी समस्याएं सिर उठाने लगती हैं। यूं समस्या किसी के भी साथ हो सकती है लेकिन तैलीय यानी ऑइली त्वचा वालों के लिए यह मौसम कुछ ज्यादा ही मुश्किलें खड़ी करने लगता है। इसकी वजह से कई बार चिड़चिड़ापन, गुस्सा, फ्रस्ट्रेशन और निराशा भी मन में घर करने लगती है कि मेरी ही त्वचा पर इतनी परेशानियां क्यों? कई बार सार्वजनिक स्थानों पर निकलने के पहले मन में दुविधा होने लगती है कि क्या करें जिससे त्वचा पर अतिरिक्त तेल न दिखे या मेकअप ठीक तरह से काम कर पाए, आदि। ऑइली स्किन कई मुश्किलों का कारण बन सकती है। खासकर बारिश जैसे मौसम में। जब नमी, चिपचिपाहट, पसीना, आदि मिलकर त्वचा के सामने और भी ज्यादा चुनौतियां पैदा कर देते हैं। लेकिन अगर प्राकृतिक रूप से आपको यह त्वचा मिली है तो इसको लेकर निराश होने या परेशान होने की जरूरत नहीं। कुदरत ने आपको जो भी रंग-रूप दिया है उसे लेकर मन में आत्मविश्वास रखें। थोड़ी सी सावधानी और कुछ बातों का ध्यान रखकर आप ऑइली त्वचा को भी स्वस्थ और प्रॉब्लम फ्री रख सकते हैं।
Skin Care Tips: बारिश में ऑइली स्किन का रखें ख्याल, ये 5 तरीके दिलाएंगे त्वचा की समस्या से राहत
मुहांसों से लेकर डलनेस तक
बारिश के मौसम में हवा में मौजूद नमी स्किन के लिए कई मुश्किलें साथ लेकर आती है। केवल नमी ही बारिश के दौरान होने वाली समस्याओं का कारण नहीं है। आसमान से गिरने वाला पानी और बीच बीच में तेज होती सूरज की किरणें भी समस्या पैदा कर सकती हैं। बैक्टीरिया, फंगस और जर्म्स के पनपने के लिए यह सबसे आसान वातावरण होता है। हवा में मौजूद धूल, धुआं और गंदगी भी इस नमी के साथ मिल जाती है और शरीर पर इसका आसान शिकार होती है त्वचा। बारिश में त्वचा संबंधी दिक्कतें आम हैं लेकिन तैलीय त्वचा यानी ऑइली स्किन वालों के लिए मुश्किलें अधिक होती हैं। इस मौसम में मुहांसों, फुंसियों से लेकर रैशेस, एक्ने, ब्लैकहेड्स, पिग्मेंटेशन, धब्बे आदि तक त्वचा पर उभरने लगते हैं और यह केवल चेहरे तक सीमित नहीं रहते, पीठ, सीने, बाँहों में भी ये समस्याएं होने लगती हैं। चिपचिपाहट के साथ पसीने का आना दिक्कतों को और बढ़ा देता है।
ऑइली त्वचा की मुश्किल
मानसून या बारिश के दौरान ऑइली त्वचा वाले इसलिए अधिक परेशान होते हैं क्योंकि उनकी त्वचा से पहले ही ज्यादा मात्रा में सीबम का उत्पादन होता है। सीबम एक तैलीय, मोम की तरह का पदार्थ होता है जो शरीर द्वारा प्राकृतिक तौर पर पैदा किया जाता है। सामान्यतौर पर इसका उत्पादन त्वचा पर हलकी और प्राकृतिक मॉइश्चराइजर की परत लगाने का होता है जो त्वचा में नमी बनाये रखती है और सुरक्षा भी करती है लेकिन ऑइली त्वचा पर इसका उत्पादन सामान्य से अधिक होता है। इसके साथ मिल जाते हैं पसीना, डेड स्किन सेल्स और धूल के बहुत छोटे छोटे कण भी। ये सभी मिलकर त्वचा के रोम छिद्रों को कवर कर देते हैं। यही बनती है वजह समस्याओं की।
चुनिए सही देखभाल
सबसे पहली चीज है चेहरे की सफाई। यदि आप सामान्य फोम फेस वॉश या नीम युक्त फेस वॉश का उपयोग करते हैं तो वह कीजिए वरना मेडिकेटेड फेस वॉश भी डॉक्टर की सलाह से उपयोग किया जा सकता है। दिनभर में कम से कम दो बार और रात को सोने से पहले चेहरे को अच्छी तरह सामान्य तापमान वाले साफ़ पानी से धोना और थपथपा कर पोंछना जरूरी है। यदि एक्सरसाइज कर रहे हैं तो उसके बाद भी चेहरे को धोएं जरूर। याद रखिये आपका नैपकिन, टॉवल या चेहरा पोंछने का कपड़ा भी एकदम साफ़ होना चाहिए। बारिश में टर्किश या रोयेंदार टॉवल की जगह कॉटन का टॉवल या नैपकिन बेहतर विकल्प होगा। यह सूखेगा भी जल्दी और नमी को पकड़कर नहीं रखेगा। अक्सर बारिश के दिनों में कई समस्याएं नमी वाले कपड़ों, टॉवल आदि की वजह से भी होती हैं क्योंकि यहाँ जर्म्स, फंगस और बैक्टीरिया आदि को पनपने का पूरा माहौल मिलता है।
सही प्रोडक्ट्स ही चुनें
मॉइश्चराइजर हो या बॉडी लोशन या फिर क्रीम, ऑइल फ्री और सही इंग्रेडिएंट्स से बने प्रोडक्ट आपकी त्वचा को राहत की सांस लेने का मौका देंगे। कई बार ऐसा होता है कि हम घर में जो भी उपलब्ध हो, वही त्वचा पर लगा लेते हैं। इससे त्वचा और भी बुरी स्थिति में आ जाती है। चूँकि आपकी त्वचा पहले से ही अधिक मात्रा में प्राकृतिक तेल का निर्माण कर रही है। इसलिए आपको जरूरत है ऐसे उत्पादों की जो त्वचा को हायड्रेट रखें, रोमछिद्रों को बंद न होने दें और पोषण भी दें। ऑइल फ्री उत्पादों के अलावा आप ऐसे उत्पाद चुन सकते हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट्स, अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड्स (ग्लाइकॉलिक एसिड या सैलिसिलिक एसिड), बेंज़ोइल पैरॉक्साइड और हायल्यूरॉनिक एसिड हो। ये उत्पाद अतिरिक्त सीबम उत्पादन को नियंत्रित करते हैं और त्वचा में जरूरी नमी भी बनाये रखते हैं। अल्कोहल बेस्ड क्लींजर का उपयोग भी न करें तो ज्यादा अच्छा।