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कला महोत्सव: कलाकारों के लिए नई उम्मीद लाया इंडिया आर्ट फेस्टिवल, 450 कलाकार और 3500 से ज्यादा कलाकृतियां

Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Sat, 09 Apr 2022 06:40 AM IST
सार

इंडिया आर्ट फेस्टिवल के जरिए समकालीन भारतीय कला की दुनिया को बाजार में लाने, कला के क्षेत्र में हो रहे नए नए प्रयोगों को एक मंच देने और कलाकारों को एक व्यावसायिक प्लेटफॉर्म पर लाने का काम पिछले 11 सालों से किया जा रहा है। इसकी अवधारणा को साकार करने वाले और फेस्टिवल के निदेशक राजेन्द्र पाटिल कहते हैं कि उन्हें इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा उत्साह दिखाई दे रहा है।

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Art Festival: India Art Festival brings new hope for artists 450 artists and more than 3500 artworks
Art Work - फोटो : Amar Ujala

महामारी के बीते दो सालों ने देश के कलाकारों के भीतर जो निराशा और हताशा भर दी थी, वह अब धीरे धीरे खत्म हो रही है। सरकारी कला केंद्रों और संस्थानों ने कोरोना काल में कुछ कोशिशें जरूर कीं, पर कलाकारों के भीतर वो जोश नहीं पैदा कर सके। लेकिन देश के तमाम नए पुराने कलाकारों के साथ साथ कई आर्ट गैलरी को इंडिया आर्ट फेस्टिवल में आकर एक नई उम्मीद जगी है। दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में शुरु हुए इंडिया आर्ट फेस्टिवल के छठे संस्करण में देश भर से आए कलाकारों में जबरदस्त उत्साह नजर आ रहा है।



चार दिनों के इस कला महोत्सव में देश भर से आए करीब 450 कलाकारों की 3500 से ज्यादा कलाकृतियां और आर्टवर्क आप देख सकते हैं। करीब 80 स्टॉल्स हैं और हर स्टॉल्स को कलाकारों ने अपनी कला से एक नया आयाम देने की कोशिश की है। कुछ तो एकल प्रदर्शनियां हैं तो कुछ स्टॉल्स पर दो-तीन कलाकारों ने मिलकर अपने काम प्रदर्शित किए हैं।

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Art Festival: India Art Festival brings new hope for artists 450 artists and more than 3500 artworks
Art Work - फोटो : Amar Ujala

दिल्ली के कलास्रोतम के इंद्रजीत ग्रोवर कहते हैं कि पिछले दो सालों से तो हालत खराब रही है और वैसे भी कला और कलाकारों के लिए मीडिया के पास जगह नहीं है। बेहतर हो अगर अखबारों और चैनलों में एक कोना कला के लिए भी हो। इंडिया आर्ट फेस्टिवल के दौरान हमें कम से कम एक बड़ा मंच तो मिलता ही है। वहीं पुणे से आए युवा कलाकार अतुल गेंदले के लिए भी ये उत्साह बढ़ाने वाला आयोजन है। गेंदले ने वाराणसी पर खूबसूरत सीरीज बनाई है साथ ही स्वर्ण मंदिर को भी खूबसूरती से उतारा है। उनके वाटर कलर और एक्रेलिक रंगों के साथ उनके कला के कई आयाम हैं। मुंबई से आई दिशा गांधी ने लकड़ी पर एक्रेलिक रंगों के इस्तेमाल से खूबसूरत म्यूरल बनाए हैं तो दिल्ली की वैशाली रस्तोगी साहनी ने पेपर स्कल्पचर के कुछ नमूने पेश किए हैं।

यहां लातूर से श्वेता रुक्मे और ओम थादकार भी हैं तो कोलकाता से सोनाली मैत्रा पॉल भी। सोनाली का मूर्तिशिल्प आप देख सकते हैं। मेरठ के रजत कुमार, इंदौर की हेमांगिनी महाजन तो भोपाल की निमिश जैन की कलाकृतियां भी कुछ नया कहती हैं। पंजाब से आई सुखमनी कौर ने रेजिन आर्ट की बेहतरीन और खूबसूरत कलाकृतियां बनाई हैं।

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Art Festival: India Art Festival brings new hope for artists 450 artists and more than 3500 artworks
Art Work - फोटो : Amar Ujala
मुंबई की गैलरी हाउस ऑफ इमर्ज ने मिक्स मीडिया का इस्तेमाल करते हुए थ्री डीइफेक्ट के साथ लकड़ी पर कुछ नए और बेहद खूबसूरत प्रयोग किए हैं, वहीं स्वराज दास ने एक्रेलिक रंगों का अद्भुत इस्तेमाल करते हुए दुबई से लेकर फूलों की खूबसूरत पेंटिंग प्रदर्शित की है। बबिता सत्पथी ने बुद्ध को एक नए रूप और चिंतन साथ पेश किया है। सुधा आदर्स हों, रितिका अरोड़ा हों, अनीता हीरानंदानी हों, सिंपल मोहंती मानी, नीतू सिंह, विनीता शर्मा हों या फिर मंजू श्रीवास्तव। श्वेता रुक्मे से लेकर संतोष पाटिल तक सबने अपने अपने कामों को एक नया आयाम देने की कोशिश की है। खास बात ये है कि इस आयोजन में देश की जानी मानी आर्ट गैलरी ने अपने स्टॉल में कई कलाकारों के काम प्रदर्शित किए हैं। कई नए कलाकारों को भी अपने स्टॉल लेकर अपने काम को दिखाने का मौका मिला है।

इंडिया आर्ट फेस्टिवल के जरिए समकालीन भारतीय कला की दुनिया को बाजार में लाने, कला के क्षेत्र में हो रहे नए नए प्रयोगों को एक मंच देने और कलाकारों को एक व्यावसायिक प्लेटफॉर्म पर लाने का काम पिछले 11 सालों से किया जा रहा है। इसकी अवधारणा को साकार करने वाले और फेस्टिवल के निदेशक राजेन्द्र पाटिल कहते हैं कि उन्हें इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा उत्साह दिखाई दे रहा है। पिछले दो सालों के हालात को देखते हुए उन्होंने इस फेस्टिवल को त्यागराज स्टेडियम के बड़े परिसर में करने की जगह इस बार कंस्टीट्यूशन क्लब का छोटा परिसर चुना, लेकिन उनके सारे स्टॉल्स महज तीन हफ्तों में बुक हो गए। यहां 30 स्टॉल में पेटिंग्स और स्कल्पचर (मूर्तिशिल्प) हैं जबकि दो स्टॉल पूरी तरह मूर्तिशिल्प के लिए हैं जिसमें तकरीबन डेढ़ सौ मूर्तिशिल्प आप देख सकते हैं।
Art Festival: India Art Festival brings new hope for artists 450 artists and more than 3500 artworks
Art Work - फोटो : Amar Ujala
ज्यादातर कलाकार कहते हैं कि कोरोना काल में वर्चुअल तरीके से अपनी कला का प्रदर्शन करने में उन्हें जरा भी संतुष्टि नहीं मिलती थी। जबतक कलाप्रेमी और दर्शक सामने से उनके काम को न देखे, वो बात या वो एहसास उन्हें नहीं होता। जाहिर है कलाकारों के इस समुद्र में आप सबको पूरी तरह संतुष्ट तो नहीं कर सकते, लेकिन इंडिया आर्ट फेस्टिवल जैसी पहल आज के व्यावसायिक जमाने में कलाकारों के लिए एक उम्मीद जरूर जगाती हैं। यहां हरेक कलाकार किसी न किसी बड़े खरीदार की उम्मीद में नजर आता है। बेशक आपको इन कलाकारों के काम की कीमत महंगी लग सकती है, लेकिन जब आप उन कलाकारों से इस पूरी कृति के बनने की प्रक्रिया और उसकी जटिलताएं सुनेंगे तो शायद ये कीमतें आपको ठीक लगें। बेशक कला के शौकीनों और इसे उद्योग बना देने वाली हस्तियों के लिए इसके अपने मायने होते हैं। पर कला तो कला है और इसे देखने का अपना अपना नजरिया है।
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