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साल 2018: धारा 377 से लेकर राफेल तक, जानें क्या थे सुप्रीम कोर्ट के वो ऐतिहासिक फैसले

Sun, 23 Dec 2018 03:17 PM IST
पूजा मेहरोत्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा मेहरोत्रा Updated Sun, 23 Dec 2018 03:17 PM IST
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Best of 2018: 11 historical verdict given by Supreme Court this year
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिल फैसले
साल 2018 को खत्म होने में एक हफ्ते का समय बचा है। हर नया साल किसी के जीवन में खुशियां तो थोड़ा गम भी लेकर आता है। पुरानी बातों को भूलकर हम नए साल का बांहे फैलाकर स्वागत करते हैं। मगर बीते हुए साल की कुछ यादें हमारे जेहन में हमेशा छाई रहती हैं। इस बीतते हुए साल यानी 2018 की बात करें तो इस साल देश की सर्वोच्च न्यायालय ने बहुत से ऐसे फैसले दिए हैं जिसने लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यदि आप इन फैसलों को भूल गए हैं तो हम आपको इनकी याद दिला देते हैं।
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धारा 377
1. धारा 377 को वैध बनाना: उच्चतम न्यायालय ने 6 सितंबर, 2018 को धारा 377 को वैध कर दिया। पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की संविधान पीठ ने दो वयस्कों के बीच परस्पर सहमति से स्थापित समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट
2. सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देना: उच्चतम न्यायालय ने 26 सितंबर को अपने पूर्व के फैसले के खिलाफ दायर की गई पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को सरकारी नौकरी में पदोन्नति के समय आरक्षण देने की मांग पर विचार करने के लिए कहा गया था।
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आधार कार्ड
3. आधार की अनिवार्यता: उच्चतम न्यायालय ने 26 सितंबर, 2018 को आधार की वैधता को बरकरार रखा था लेकिन साथ ही कुछ सीमाएं तय करते हुए आधार अधिनियम की धारा 57 को रद्द कर दिया था। जिसमें अदालत ने कहा था कि निजी कंपनियां आधार नहीं मांग सकते हैं। इसके अलावा बैंक खाता खुलवाने, मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए आधार को अनिवार्यता को खत्म कर दिया था। अदालत ने फैसले में कहा था किसी बच्चे को आधार के बिना सरकारी योजनाओं का लाभ देने से मना नहीं किया जा सकता।
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सांकेतिक तस्वीर
4. दहेज प्रताड़ना मामला: दहेज प्रताड़ना के मामलों में पति और उसके परिवार की तुरंत गिरफ्तारी को लेकर भी पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा ने एक बड़ा फैसला सुनाया था। फैसले के अनुसार, इन मामलों में आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी पर से रोक को हटा लिया गया है। अब अगर कोई महिला अपने पति और उसके परिवार के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए के तहत दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराती है तो उसकी तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है।
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