मुंबई में शुक्रवार को 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों और ढोल-ताशे की थाप से माहौल गूंज उठा। शहर में विसर्जन जुलूस निकले और भक्तों ने त्योहार के आखिरी दिन भगवान गणेश को भावुक विदाई दी।सार्वजनिक गणेश पंडालों में बड़ी संख्या में भक्तों की मौजूदगी में पारंपरिक पूजा और आरती हुई। इसके साथ ही कई प्रमुख मंडलों के विसर्जन जुलूस में जोश भरे जयकारों, पारंपरिक संगीत और गुलाल व फूलों की पंखुड़ियों की बौछार हुए।
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'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों गूंज शहर
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अबतक कितने मूर्तियों का विसर्जन हुआ?
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने बताया कि शहर में गणपति की मूर्तियां विसर्जन स्थलों पर पहुंचने लगी हैं। दोपहर तक कुल 430 मूर्तियों का विसर्जन किया गया। नगर निकाय ने बताया कि इनमें से आठ सार्वजनिक गणपति की मूर्तियां, 416 घरों में स्थापित मूर्तियां और छह देवी गौरी/हरतालिका की मूर्तियां थीं। बीएमसी ने अपनी ताजा जानकारी में कहा, 'दोपहर तक विसर्जन की प्रक्रिया के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।'
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12 दिनों तक चलता है गणपति उत्सव
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कितने दिनों तक चलता है यह उत्सव?
12 दिनों तक चलने वाला गणपति उत्सव अनंत चतुर्दशी को समाप्त होता है। जब भक्त हाथी के सिर वाले देवता की मूर्तियों को प्राकृतिक जलाशयों या कृत्रिम तालाबों में विसर्जित करके उन्हें विदाई देते हैं। इस दिन मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में रंग-बिरंगे और जोश से भरे जुलूस निकाले जाते हैं। यह जश्न अक्सर देर रात से लेकर अगले दिन की सुबह तक चलता रहता है।
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अनंत चर्तुदशी
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लालबाग-परेल इलाके में सड़कों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। रंगीन विसर्जन जुलूस और ‘पुष्पवृष्टि’ (गणपति की मूर्तियों पर फूलों की पंखुड़ियों की बारिश) देखने और त्योहार के माहौल का आनंद लेने के लिए जमा हुए। गणेशोत्सव के दौरान, मुंबई और देश के अन्य हिस्सों से लोग मशहूर ‘लालबागचा राजा’ जैसे पंडालों के दर्शन करने के लिए लालबाग आते हैं।
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मूर्तियों पर हुए फूलों की बारिश
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सुबह 11 बजे से पहले ही इलाके की सड़कों पर कई मशहूर गणपति मूर्तियों की शोभायात्राएं निकल चुकी थीं, जिनमें गणेश गली के 'मुंबाचा राजा', करी रोड के 'कैवारी', परेल के 'राजा', कालाचौकी के 'महागणपति' और तेजुकया मैंशन के गणपति शामिल थे। हालांकि, लालबाग के 'राजा' और चिंचपोकली के 'चिंतामणि' जैसे दूसरे मशहूर मंडलों की मूर्तियां तब तक अपने पंडालों से बाहर नहीं निकाली गई थीं।