पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बुधवार की तड़के एक भीषण आग में नौ लोगों की जान चली गई। होटल के जिन मेहमानों को बचा लिया गया। उन्होंने दहशत भरी रात का ब्योरा दिया, जब जर्जर इमारत की दूसरी और तीसरी मंजिल पर घना धुआं छा गया।
'जब हम जगे तब आग से घिर चुके थे': कोलकाता अग्निकांड के चश्मदीदों ने बताया- हॉरर फिल्म जैसा था खौफनाक मंजर
कोलकाता में बुधवार तड़के एक होटल में भीषण आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई, जिनमें पांच बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। करीब 80 लोगों को दमकल कर्मियों ने सुरक्षित बचाया। प्रत्यक्षदर्शियों ने घने धुएं और भयावह हालात का जिक्र किया। पढ़ें पूरी खबर
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बांग्लादेश के पांच नागरिक की मौत
इस घटना में मारे गए नौ लोगों में पांच बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं। खबर मिलने के बाद, कोलकाता में बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन के अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे ताकि मृतकों और घायलों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
कोलकाता में बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन ने एक बयान में कहा, 'स्थानीय पुलिस ने मृतकों में से पांच बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की पुष्टि की है।' बयान में आगे कहा गया, 'डिप्टी हाई कमीशन ने पीड़ितों के परिवारों से संपर्क किया है और उनमें से चार की पहचान एक ही परिवार के सदस्यों के तौर पर की गई है।'
आपातकालीन सेवा विभाग के मंत्री ने क्या बताया?
इस इमारत में कई होटल थे। पश्चिम बंगाल के अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के मंत्री कौशिक चौधरी ने बताया कि दमकल कर्मियों की त्वरित कार्रवाई से लगभग 80 लोगों की जान बच गई।
होटल में ठहरे बांग्लादेश के एक निवासी ने दावा किया कि जब रात करीब 2 बजे आग लगी तो वह होटल के कर्मचारियों के पास गया, जो गहरी नींद में सो रहे थे। उस व्यक्ति ने कहा,' जब हम जगे तो इमारत की दूसरी और तीसरी मंजिल पर घना धुआं छा गया था। बाहर निकलना मुश्किल था, क्योंकि आग सीढ़ियों के पास ही भयंकर रूप से फैल रही थी।
चश्मदीदों ने क्या बताया?
बांग्लादेशी नागरिक ने कहा कि जान बचाने के लिए भागते समय वह अपना कोई भी सामान नहीं बचा सका। बीरभूम निवासी एजाज अहमद, जो मंगलवार शाम को होटल में चेक-इन हुए थे। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए अग्निशमन कर्मियों को धन्यवाद दिया।
अहमद ने कहा, 'अंधेरे में बाहर निकलने का रास्ता ढूंढने की कोशिश करते समय अग्निशमन विभाग के दो अधिकारियों ने मुझे ऊपरी मंजिलों से नीचे उतरने और इमारत से सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की।' वहीं, एक स्थानीय निवासी ने बताया कि स्थिति भयावह थी क्योंकि इमारत के अंदर फंसे लोग आग की लपटों के बीच लगातार मदद के लिए गुहार लगा रहे थे। उन्होंने कहा,'यह किसी हॉरर फिल्म के दृश्य जैसा था।'
लोगों ने क्या आरोप लगाया?
उसने दावा किया कि होटल में सीढ़ियों की ओर जाने वाला केवल एक ही प्रवेश द्वार था, जिससे स्थिति और भी खराब हो गई। प्रभावित इमारत की ऊपरी मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में रहने वाली मीना देवी ने आरोप लगाया कि परिसर में अग्नि सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी।
उन्होंने कहा, 'हमें दमकल कर्मियों और इमारत से संचालित होने वाले कई होटलों में से एक के कर्मचारियों द्वारा घने धुएं के बीच बाहर निकाला गया।' बुधवार को होटल में लगी आग, बीरभूम जिले के तारापीठ स्थित एक अन्य होटल में लगी आग के कुछ दिनों बाद हुई है।