कोरोना महामारी के बीच मंगलवार को पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकली। सुप्रीम कोर्ट की सोशल डिस्टेंसिंग समेत तमाम निर्देशों के बीच रथयात्रा की मंजूरी मिली थी। इसलिए बिना श्रद्धालुओं की मौजूदगी में रथ यात्रा निकाली गई। रथयात्रा से पहले आज सुबह मंदिर परिसर को सैनिटाइज किया गया। कोर्ट ने कहा था कि एक रथ को 500 से ज्यादा लोग न खींचें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वहीं, सरकार ने सोमवार को हुई सुनवाई में कहा था कि यदि परंपरा टूटती है तो फिर अगले 12 साल तक रथयात्रा नहीं निकलेगी।
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
- फोटो : पीटीआई
गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। यहां भगवान सात दिनों तक आराम करते हैं। इसके बाद वापसी की यात्रा शुरू होती है। एक जुलाई को भगवान जगन्नाथ फिर इन्हीं रथों में बैठकर मुख्य मंदिर पहुंचेंगे। इसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है।
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
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भगवान जगन्नाथ का रथ अन्य रथों कि तुलना में बड़ा होता है और रंग लाल पीला होता है। भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे पीछे चलता है। पहले बलभद्र फिर सुभद्रा का रथ होता है। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष कहते हैं जिसकी ऊंचाई 45.6 फुट होती है। प्रत्येक वर्ष भगवान जगन्नाथ सहित बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं नीम की लकड़ी से ही बनाई जाती हैं।
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
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पुरी के जगन्नाथ मंदिर में सभी पुजारियों की कोरोना जांच की गई। एक पुजारी ने पॉजिटिव परीक्षण किया, उन्हें रथ यात्रा में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली। जगन्नाथ पुरी में दोपहर 1.50 बजे भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष खींचा गया। इसके पहले 12.10 बजे पहला रथ तालध्वज खींचा गया।
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
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2500 साल से ज्यादा पुराने रथयात्रा के इतिहास में पहली बार ऐसा मौका आया, जब भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकली रही है लेकिन भक्त घरों में कैद हैं। उनसे अपील की गई है कि वो यात्रा के वक्त अपने घरों में ही रहें।