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Javed Akhtar India Pak Political Relation doubtful on situation improvement missed opportunity after partition
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Javed Akhtar: 'भारत-पाकिस्तान सियासी संबंध सुधरने की आशा नहीं'; जावेद अख्तर ने पड़ोसी से रिश्ते पर कही अहम बात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 31 May 2025 02:38 AM IST
सार
80 वर्षीय दिग्गज जावेद अख्तर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। गीतकार, पटकथा लेखन के अलावा राज्यसभा सांसद के तौर पर उल्लेखनीय योगदान देने वाले जावेद अख्तर इस बात भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान के राजनीतिक संबंधों पर दिए गए बयान के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा, भारत-पाकिस्तान के राजनीतिक रिश्ते बेहतर होंगे, उन्हें ऐसी आशा नहीं है।
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भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में बेहतरी को लेकर जावेद अख्तर का बयान
- फोटो : पीटीआई / एएनआई
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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के 80 वर्षीय दिग्गज और पूर्व राज्यसभा सांसद जावेद अख्तर ने कहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक संबंधों में सुधार होगा, उन्हें इसकी संभावना बहुत कम दिखती है। उन्होंने अपनी दलील के समर्थन में दक्षिण अफ्रीका की एक घटना का भी जिक्र किया। जावेद अख्तर ने 'ट्रुथ एंड रीकंसिलिएशन कमीशन' का उदाहरण देते हुए कहा, भारत और पाकिस्तान ने 1947 में हुए विभाजन के बाद ऐसा कोई प्रयास नहीं किया। दोनों पक्षों के पीड़ितों और शोषण करने वाले अपराधियों को एक मंच पर नहीं लाया जा सका।
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जावेद अख्तर
- फोटो : एक्स- @Javedakhtarjadu
दोनों देशों में 1950 के दशक में हो सकता था ये जरूरी काम
जावेद अख्तर ने कहा कि अगर 1950 के दशक में भारत और पाकिस्तान की सरकारें दोनों देशों के शरणार्थियों को मिलकर अनुभव साझा करने का मौका देतीं, तो एक-दूसरे की दर्द-पीड़ा बेहतर तरीके से समझी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि मौका निकल चुका है। अब 75 साल बाद उस दौर के साक्षी रहे अधिकतर लोग अब जीवित ही नहीं हैं।
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जावेद अख्तर (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
आम जनता चाहती है बेहतर रिश्ते
पड़ोसी देश में एक कार्यक्रम के दौरान सवाल किए जाने पर उन्हें बेबाकी से जवाब दे चुके जावेद अख्तर ने आम जनता के रुख पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आज भी करोड़ों लोग भारत से बेहतर संबंध चाहते हैं। इसका कारण केवल आपसी सद्भाव नहीं है।
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जावेद अख्तर (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
पड़ोसी देश की सेना-सियासत और चरमपंथी ताकतें रोड़ा...
भारत की तरक्की, कॉर्पोरेट क्षेत्र, सिनेमा, व्यापार, आईटी और रिसर्च जैसे क्षेत्र पाकिस्तान के लोगों के बीच भी आकर्षण का केंद्र हैं। हालांकि, पाकिस्तान की सेना के साथ-साथ देश की राजनीतिक व्यवस्था और पड़ोसी देश की चरमपंथी ताकतें आम जनता के रिश्तों के रास्ते में रोड़ा बनी हुई हैं।
पड़ोसी देश की राजनीति में सेना का दखल, भारत के प्रयासों को पाकिस्तान से नहीं मिला समर्थन
ऑपरेशन सिंदूर के बाद उपजे हालात और पाकिस्तान के प्रति भारत के राजनीतिक और सैन्य रवैये को लेकर जावेद अख्तर ने कहा, हमने कई बार रिश्तों को सुधारने की कोशिश की है, लेकिन पाकिस्तान ने कभी वैसा ही प्रयास नहीं किया। भारतीय सेना 'पेशेवर' होने के साथ-साथ गैर-राजनीतिक है, जबकि पाकिस्तान की सेना देश की राजनीति में दखल देती है।
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