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VS Achuthanandan Funeral Photo: 101 साल की विभूति अच्युतानंदन, अंतिम संस्कार में समर्थकों ने दी भावपूर्ण विदाई

Wed, 23 Jul 2025 05:28 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझीकोड।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझीकोड। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 23 Jul 2025 05:28 PM IST
सार

VS Achuthanandan Funeral Photo: 101 साल की विभूति वीएस अच्युतानंदन का अंतिम संस्कार आज गृह राज्य केरल के अल्लपुझा में किया गया। पार्थिव शरीर जब गृहनगर में पहुंचा तो समर्थकों ने अपने प्रिय नेता को भावपूर्ण विदाई दी। देखिए तस्वीरें...

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Kerala Former CM VS Achuthanandan Funeral Alappuzha Supporters Tribute Mortal Remains
वीएस अच्युतानंदन का अंतिम संस्कार - फोटो : एएनआई / अमर उजाला ग्राफिक्स

माकपा के संस्थापक सदस्य वीएस अच्युतानंदन जीवनभर श्रमिकों के अधिकारों, भूमि सुधारों और सामाजिक न्याय के पक्षधर रहे। लगभग आठ दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे और जननायक बनकर उभरे। उन्होंने 2006 से 2011 तक केरल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वह सात बार प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए, जिनमें से तीन बार वह नेता प्रतिपक्ष रहे। इन सबके बावजूद वह अपनी सादगी के लिए भी विख्तात थे। उन्होंने एक स्पष्टवादी, बेबाक नेता के रूप में भी अपनी प्रतिष्ठा बनाई।



गृहनगर अलप्पुझा में अंतिम संस्कार
सोमवार को अच्युतानंदन का निधन 101 साल की आयु में हुआ था। अच्युतानंदन का पार्थिव शरीर देर शाम उनके घर ले जाया गया। मंगलवार सुबह दरबार हॉल में जनता के दर्शनार्थ रखा गया पार्थिव शरीर उनके गृहनगर अलप्पुझा ले जाया गया। आज अच्युतानंदन का अंतिम संस्कार वालिया चुडुकाडु स्थित श्मशान घाट में किया गया।

Kerala Former CM VS Achuthanandan Funeral Alappuzha Supporters Tribute Mortal Remains
वीएस अच्युतानंदन के अंतिम संस्कार से पहले केरल में उनके समर्थकों में उमड़ा भावनाओं का ज्वार - फोटो : पीटीआई
सातवीं में ही छोड़नी पड़ी पढ़ाई
अलप्पुझा जिले के गांव पुन्नपरा में जन्मे अच्युतानंदन का प्रारंभिक जीवन कठिनाइयों भरा रहा। चार साल की उम्र में मां का देहांत हो गया और सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान पिता का देहांत हो गया, जिसके कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उन्होंने कुछ समय के लिए एक कपड़ा दुकान और कारखाने में मजदूर के रूप में काम किया। उनकी राजनीतिक यात्रा 1940 के दशक में शुरू हुई, जो उन्हें प्रसिद्ध कम्युनिस्ट नेता पी कृष्ण पिल्लई से प्रेरित थी। 1943 में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में अलप्पुझा का प्रतिनिधित्व किया।
Kerala Former CM VS Achuthanandan Funeral Alappuzha Supporters Tribute Mortal Remains
वीएस अच्युतानंदन के अंतिम संस्कार से पहले केरल में उनके समर्थकों में उमड़ा भावनाओं का ज्वार - फोटो : पीटीआई
जब मान लिया मृत
1946 के पुन्नपरा-वायलार विद्रोह के दौरान वे भूमिगत हो गए और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बुरी तरह पीटा गया। पुलिस ने उन्हें मृत मान लिया था और जब उन्हें जंगल में दफनाया जाने वाला था तभी पता चला कि वे अभी भी जीवित हैं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। विद्रोह के दौरान प्रताड़ित होने के बावजूद, वे राजनीतिक सक्रियता में लौट आए।
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Kerala Former CM VS Achuthanandan Funeral Alappuzha Supporters Tribute Mortal Remains
वीएस अच्युतानंदन के अंतिम संस्कार से पहले केरल में उनके समर्थकों में उमड़ा भावनाओं का ज्वार - फोटो : पीटीआई
1964 में किया माकपा का गठन
1956 में वे पार्टी की राज्य समिति में शामिल हुए और लगातार आगे बढ़ते हुए प्रमुख राष्ट्रीय पदों पर पहुंचे। 1964 में वे उन 32 राष्ट्रीय परिषद सदस्यों में शामिल थे, जिन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी से अलग होकर सीपीआई(एम) यानी माकपा का गठन किया। यह भारतीय वामपंथी राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उसी वर्ष वे पार्टी की केंद्रीय समिति में शामिल हुए और 1985 में पोलित ब्यूरो में शामिल किए गए।
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वीएस अच्युतानंदन के अंतिम संस्कार से पहले केरल में उनके समर्थकों में उमड़ा भावनाओं का ज्वार - फोटो : पीटीआई
कैसा रहा है अच्युतानंदन का व्यक्तित्व?
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदन एक सादगीपूर्ण, मेहनती और ईमानदार नेता थे। वे हमेशा आम लोगों के करीब रहे और उनके लिए काम करते रहे। राजनीति में उनका योगदान केरल के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है।वीएस अच्युतानंदन के निधन से पूरे केरल और देश में शोक की लहर है।
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