{"_id":"5cc58127bdec22073706b520","slug":"lok-sabha-chunav-2019-annapurna-shukla-like-a-mother-who-blesses-modi-for-victory","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अन्नपूर्णा शुक्ला सामाजिक कार्यों में बिताती हैं ज्यादातर वक्त, पीएम ने पैर छूकर लिया था आशीर्वाद","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अन्नपूर्णा शुक्ला सामाजिक कार्यों में बिताती हैं ज्यादातर वक्त, पीएम ने पैर छूकर लिया था आशीर्वाद
चुनाव डेस्क, अमर उजाला
Published by: Trainee Trainee
Updated Sun, 28 Apr 2019 05:16 PM IST
विज्ञापन
1 of 4
अन्नपूर्णा शुक्ला-नरेंद्र मोदी
- फोटो : social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
वह 91 बरस की दुबली- पतली महिला हैं, चेहरे पर शिक्षा और अनुभव का तेज है और पिछले कई दशक से बड़ी खामोशी से शिक्षा के प्रसार और समाज सेवा के कार्यों में लगी हैं। शुक्रवार को देश के सबसे ताकतवर इंसान ने उन्हें श्रद्धा से प्रणाम किया और अखबारों की सुर्खियों में जगह दिला दी। यहां बात हो रही है अन्नपूर्णा शुक्ला की, जो वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उम्मीदवारी के चार प्रस्तावकों में से एक हैं। चालीस साल तक महिला महाविद्यालय में प्रोफेसर रहीं और महामना जी की गोदी में खेलीं अन्नपूर्णा शुक्ला को आज भले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रस्तावक बनने पर प्रसिद्धि मिली हो, लेकिन इस बात में दो राय नहीं कि महिला शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के बारे में जानकर हर भारतवासी इस ‘मां’ के सामने नतमस्तक है।
2 of 4
नरेंद्र मोदी-अन्नपूर्णा शुक्ला
- फोटो : social Media
डा. अन्नपूर्णा शुक्ला को मदन मोहन मालवीय की दत्तक पुत्री माना जाता है और वह बीएचयू महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य हैं। वह मालवीय जी से आशीर्वाद लेकर इस प्रतिष्ठित पद को ग्रहण करने वाले लोगों की पीढ़ी की अंतिम कड़ी हैं। उन्होंने बीएचयू से ही मेडिकल की पढ़ाई की है और उन्हें महिला शिक्षा के क्षेत्र में एक मील के पत्थर की तरह देखा जाता है।
3 of 4
नरेंद्र मोदी-अन्नपूर्णा शुक्ला
- फोटो : social Media
इस उम्र में भी सामाजिक कार्यों में अपना ज्यादातर समय व्यतीत करने वाली अन्नपूर्णा शुक्ला ने 15 साल के संघर्ष के बाद बीएचयू के महिला कॉलेज में गृह विज्ञान विभाग की शुरूआत कराई और इस विभाग की पहली प्रमुख भी उन्हें ही बनाया गया। उन्हें कश्मीर के एक स्नातकोत्तर संस्थान में गृह विज्ञान विभाग की शुरूआत का श्रेय भी जाता है। 1991 में काशी अनाथालय में वनिता पॉलिटेक्निक की स्थापना भी उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है। वह लहुराबीर स्थित इस संस्था की मानद निदेशिका भी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 4
अन्नपूर्णा शुक्ला
- फोटो : social Media
मूलत: बस्ती जनपद के सोनहा थानाक्षेत्र के एकडंगवा गांव की रहने वाली डा. अन्नपूर्णा की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उनके पति बीएन शुक्ला 1980-83 के बीच गोरखपुर विवि के कुलपति रह चुके हैं। वह रूस में भारत के राजनयिक भी रहे। इनके पति के बड़े भाई दिवंगत प्रो. गंगा शरण शुक्ल गोरखपुर विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान के संस्थापक विभागाध्यक्ष रहे। देवर दिवंगत शिवशरन शुक्ल बस्ती में वकालत करते थे। अन्नपूर्णा के चार बेटे हैं। जबकि प्रो. गंगा शरण शुक्ल के एक पुत्र डा.निखिल हैं जो वर्तमान में गोरखपुर विश्विविद्यालय के रसायन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।