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धर्मसंकट में नेता: किसके लिए करें प्रचार, पहले पार्टी या रिश्तेदार?

चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Sat, 20 Apr 2019 03:47 PM IST
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Lok Sabha Chunav 2019:  Politicians in dilemma, family first or party?
शत्रुघ्न सिन्हा-राधाकृष्ण विखे पाटिल

लोकसभा चुनाव 2019 अब अहम मोड़ पर आ गया है। पहले और दूसरे चरण के चुनाव खत्म होते ही कई नेताओं के ऊपर धर्मसंकट मंडराने लगा है कि वे पार्टी के लिए प्रचार करें या अपने परिवार के लिए। चुनाव मैदान में एक ही परिवार के लोग अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पार्टियों के अंदर उनका विरोध भी शुरू हो चुका है। अपनी ही पार्टी के नेता इसे मुद्दा बनाने लगे हैं।  


 

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Lok Sabha Chunav 2019:  Politicians in dilemma, family first or party?
पूनम सिन्हा-शत्रुघ्न सिन्हा। - फोटो : amar ujala

पटना साहिब से सांसद शत्रुध्न सिन्हा और उनकी पत्नी पूनम सिन्हा अलग-अलग पार्टियों से चुनावी मैदान में हैं। शत्रुघ्न हाल ही में भाजपा छोड़ कांग्रेस के टिकट पर पटना साहिब से चुनाव लड़ रहे हैं, तो वहीं पूनम सिन्हा सपा के टिकट पर लखनऊ से ताल ठोक रही हैं। अब शत्रुघ्न सिन्हा के ऊपर संकट की स्थिति बनी हुई है कि वह कांग्रेस के लिए प्रचार करें या महागठबंन का विरोध करें। लखनऊ से कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद कृष्णम ने सिन्हा पर इसे लेकर तंज भी कसा और कहा कि उम्मीद है कि वह पति धर्म के बाद पार्टी का धर्म भी निभाएंगे। इधर बसपा अध्यक्ष मायावती को छोड़ दें तो महागठबंधन का कोई भी नेता कांग्रेस के खिलाफ खुलकर नहीं बोल रहा है।  

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Lok Sabha Chunav 2019:  Politicians in dilemma, family first or party?
राधाकृष्ण विखे पाटिल - फोटो : PTI

महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल भाजपा के टिकट पर अहमदनगर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। सुजय के लिए वोट मांगना राधाकृष्ण के लिए काफी मुश्किल हो रहा है और पार्टी के अंदर राधाकृष्ण के खिलाफ विरोध भी शुरू हो गया है। सुजय पेशे से न्यूरोसर्जन हैं और पिछले माह ही भाजपा में शामिल हुए हैं। अब पिता के लिए धर्मसंकट की स्थिति पैदा हो गई है। 
 

Lok Sabha Chunav 2019:  Politicians in dilemma, family first or party?
ठाकुर जयवीर सिंह - फोटो : Social media

यही हाल गौतमबुद्ध नगर का है यहां पहले चरण में ही मतदान खत्म हो चुका है। इस सीट पर ठाकुर जयवीर सिंह भाजपा से एमएलसी और उनके बेटे अरविंद कुमार सिंह को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया था। आंध्र प्रदेश की अराकू लोकसभा सीट पर भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। यहां पिता और पुत्री के बीच कड़ा मुकाबला है। इस सीट पर विरीचेरला किशोर चंद्र देव, तेलुगू देशम पार्टी की तरफ से खड़े हैं तो उनकी बेटी श्रुति देवी को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है।

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अनिल शर्मा - फोटो : Social media

हिमाचल प्रदेश मेें कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम के पौत्र आश्रय शर्मा को मंडी से अपना उम्मीदवार बनाया है। आश्रय के पिता अनिल शर्मा भाजपा से विधायक हैं। शर्मा हिमाचल प्रदेश में ऊर्जा मंत्री थे, लेकिन कांग्रेस द्वारा बेटे को मंडी से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 
 

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