फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Politics: एकनाथ शिंदे के गढ़ में भाजपा के मंत्री नाईक का जनता दरबार, क्या तनाव की अटकलों के बीच दबदबे की होड़?

Sun, 23 Feb 2025 06:12 PM IST
Jyoti Bhaskar ज्योति भास्कर
Updated Sun, 23 Feb 2025 06:12 PM IST
सार

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के तेवरों को देखते हुए ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रदेश की राजनीति में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ताजा घटनाक्रम में शिंदे के गढ़ ठाने में भाजपा के मंत्री गणनेश नाईक ने जनता दरबार लगाने का फैसला लिया है।

विज्ञापन
Maharashtra Politics Eknath Shinde discontent buzz BJP minister Ganesh Naik janata darbar in Thane hindi news
महाराष्ट्र में राजनीतिक टकराव की अटकलें - फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में महायुति (भाजपा-शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) की सरकार है। हालांकि, बीते कुछ समय से महायुति में दरार की अटकलें लगाई जा रही हैं। बीते दिनों सीएम देवेंद्र फडणवीस से उद्धव ठाकरे के विश्वासपात्र नेता मिलने पहुंचे थे। अब ताजा घटनाक्रम में भाजपा कोटे से मंत्री बने गणेश नाईक ने कहा है कि वे ठाणे में जनता दरबार का आयोजन करेंगे। उनका यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ठाणे शिंदे का गढ़ माना जाता है।


क्या भाजपा-शिवसेना के बीच दबदबा साबित करने की होड़
उपमुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष एकनाथ शिंदे के कथित असंतोष की खबरों के बीच इस कार्यक्रम के लिए ठाणे में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इसे राजनीतिक तौर पर शिवसेना के दबदबे को भाजपा की सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। 

शिंदे ने 'मुझे हल्के में न लें' जैसी चेतावनी भरी टिप्पणी की
उल्लेखनीय है कि बीते कुछ हफ्ते से भाजपा और शिवसेना के संबंधों में असहजता की अटकलें लग रही हैं। शुक्रवार को शिंदे ने 'मुझे हल्के में न लें' जैसी चेतावनी भरी टिप्पणी भी की थी। शिंदे से जब पूछा गया कि इस चेतावनी का लक्ष्य कौन है, तो उन्होंने कहा, वे अपना काम करते रहेंगे। जिन्हें समझना है वे संकेतों से ही समझ लें। 

35 साल से लगा रहे जनता दरबार
यह भी रोचक है कि नाईक आम लोगों की समस्या दूर करने के लिए जनता दरबार लगाने का सिलसिला 1990 के दशक में ही शुरू कर चुके थे। फिलहाल महायुति सरकार में नाईक पालघर जिले के संरक्षक मंत्री हैं। उनकी और शिंदे की प्रतिद्वंद्विता बहुत पुरानी है। नाईक कभी शरद पवार के करीबी और एनसीपी के सदस्य थे। नवी मुंबई में उनका काफी दबदबा माना जाता है। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा। 

मकसद केवल जनता का सामाधन
आगामी जनता दरबार से पहले भी नाइक तीन फरवरी को ठाणे जिले के नवी मुंबई में वाशी और 21 फरवरी को पालघर में जनता दरबार लगा चुके हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा था कि उनका एकमात्र मकसद आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना है।

शिंदे के करीबी क्या मानते हैं
कथित टकराव की अटकलों पर शिंदे के करीबी और ठाणे से शिवसेना सांसद नरेश म्हास्के ने कहा, ऐसी बातों को तवज्जो देना ठीक नहीं है। जब शिंदे ठाणे आते हैं तो हजारों लोग अपना काम करवाने के लिए उनसे मिलने आते हैं। सांसद आनंदमठ (एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरू आनंद दिघे के कार्यालय का नाम) में बैठते हैं और 400-500 लोगों के जमघट में अधिकारियों को भी बुलाया जाता है। इसे भी दरबार कहा जाता है। लोगों औऱ राजनेताओं के मिलने का कई और अर्थ निकालना ठीक नहीं। म्हास्के ठाणे के पूर्व मेयर भी रह चुके हैं। म्हास्के के अलावा गोपाल नाईक के बेटे और पूर्व सांसद संजीव नाइक ने भी इस घटनाक्रम पर कहा, विरोधी निराधार फैला रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि महायुति एकजुट है।

बगावती तेवरों के कारण अहम है पूरा घटनाक्रम
यह घटनाक्रम इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि शिंदे के विद्रोह के बाद ही महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे नीत महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी) सरकार गिरी थी। शिंदे की ही बगावत के कारण उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना दो फाड़ हुई। अधिकांश नेताओं / विधायकों / सांसदों का समर्थन होने के कारण शिवसेना एकनाथ शिंदे को मिली, जबकि उद्धव ठाकरे के पास दूसरे हिस्से- शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे / यूबीटी) गई।  इस घटना के कुछ समय बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) भी दो खेमों में बंट गई। एक हिस्सा अजित पवार नीत एनसीपी है, दूसरे के प्रमुख उनके चाचा शरद पवार हैं, जिसे चुनाव आयोग ने अब एनसीपी (शरद चंद्र पवार) नाम दिया है।
Maharashtra Politics Eknath Shinde discontent buzz BJP minister Ganesh Naik janata darbar in Thane hindi news
सीएम देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे - फोटो : ANI
महायुति में दरार की अटकलें फडणवीस से मिलने पहुंचे उद्धव ठाकरे के विश्वासपात्र नेता
बीते 10 फरवरी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सोमवार को अचानक मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। वहीं, दूसरी ओर इस मुलाकात के कुछ ही घंटे बाद उद्धव ठाकरे के विश्वासपात्र मिलिंद नार्वेकर, सुभाष देसाई और विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे फडणवीस से मिलने उनके 'सागर' बंगले पहुंच गए। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं की फडणवीस से मुलाकात दादर स्थित बालासाहेब ठाकरे स्मारक को लेकर चर्चा हुई। लेकिन उद्धव ठाकरे की पार्टी के तीन नेताओं के मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) से हटाया गया है, जबकि उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को इसमें शामिल किया गया है। इसलिए इस मुलाकात के मायने निकाले जा रहे हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति में दरार की अटकलें भी शुरू हो गई हैं।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed