पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) ने शुक्रवार को तब इतिहास रच दिया, जब पासिंग आउट परेड में 17 महिला कैडेट्स ने भी 319 पुरुष कैडेट्स के साथ कदमताल किया। पहली बार है, जब एनडीए से महिला कैडेट्स स्नातक हुई हैं। देश की बहादुर बेटियां पूरे जोश और जज्बे के साथ सेना, नौसेना या वायुसेना का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त, 2021 को पहली बार लड़कियों के लिए एनडीए में शामिल होने के दरवाजे खोले थे। 2022 में एनडीए के 148वें पाठ्यक्रम में पहली बार बेटियों का चयन हुआ। पूर्व सेना प्रमुख और मिजोरम के राज्यपाल वीके सिंह ने इन्हीं बेटियों को प्रशस्ति पत्र देते हुए कहा कि यह नारी शक्ति को सलाम है। अब श्रीति दक्ष, इशिता सांगवान, हरसिमरन कौर और रितुल दुहन जैसी बेटियां न केवल नारी शक्ति का नया चेहरा बनकर उभरेंगी, बल्कि आने वाले दिनों में ये भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना का हिस्सा बनकर अफसर बनेंगी। जानिए इन्होंने क्या कहा
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नारी शक्ति का नया चेहरा: श्रीति-इशिता-हरसिमरन व रितुल जैसी बेटियां बनेंगी अफसर, 17 कैडेट्स देश सेवा को तैयार
Sat, 31 May 2025 11:59 PM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क।
अमर उजाला नेटवर्क।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 31 May 2025 11:59 PM IST
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पुणे स्थित एनडीए में पहली बार स्नातक 17 महिला कैडेट्स के साथ एयर वाइस मार्शल सरताज बेदी व वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह।
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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एनडीए से पहली बार स्नातक हुईं महिला कैडेट्स कड़े मानसिक-शारीरिक परीक्षण से गुजरीं
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
एनडीए ग्रेजुएट श्रीति की उपलब्धि दोहरे मायने में खास हैं, क्योंकि पहले महिला बैच का हिस्सा होने के साथ उन्होंने आर्ट स्ट्रीम में टॉप करके भी सबका ध्यान आकृष्ट किया है। विंग कमांडर (रिटायर्ड) योगेश कुमार दक्ष की बेटी श्रीति कहती हैं, एनडीए तो मेरे खून में है। अब मैं भारतीय नौसेना का हिस्सा बनूंगी। श्रीति चाहती हैं कि पहला बैच होने के नाते वह भावी कैडेट्स के नए मानक स्थापित करें। कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका से वह बेहद प्रभावित हैं। पिता एनडीए के पूर्व छात्र रहे हैं और हंटर स्क्वाड्रन में शामिल थे। श्रीति ने बताया कि सैन्य प्रशिक्षण और अकादमिक पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने मेहनत और अनुशासन से इसे हासिल किया।
एनडीए से पहली बार स्नातक हुईं महिला कैडेट्स कड़े मानसिक-शारीरिक परीक्षण से गुजरीं
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इशिता का परिवार मूलत: हरियाणा से ताल्लुक रखता है, लेकिन राजस्थान में रहता है। 19 वर्ष की इशिता बताती हैं कि उनके परिवार की कोई सैन्य पृष्ठभूमि नहीं है। जब स्कूल प्रिंसिपल ने बताया कि अब लड़कियां भी एनडीए जा सकती हैं, तो जेईई की तैयारी कर रही इशिता ने इस बारे में सोचा। कभी आईएएस बनने का सपना देखने वाली इशिता अब एयरफोर्स अकादमी डुंडिगल जाकर फाइटर पायलट बनने की ट्रेनिंग लेना चाहती हैं।
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एनडीए से पहली बार स्नातक हुईं महिला कैडेट्स कड़े मानसिक-शारीरिक परीक्षण से गुजरीं
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इशिता की तरह हरसिमरन भी जेईई की तैयारी कर रही थीं और अपने दोस्त से यह पता लगने के बाद कि एनडीए ने अब लड़कियों के लिए भी दरवाजे खोल दिए हैं, उन्होंने अकादमी का हिस्सा बनने का फैसला किया। सेना में हवलदार पद से रिटायर पिता की बेटी हरसिमरत का सैन्य बलों के साथ गहरा जुड़ाव रहा है। उनके दादा भी सेना में रहे थे। वह एनडीए की ट्रेनिंग को वरदान की तरह मानती हैं। हरसिमरन का कहना है, किसी भी चीज से डरो मत। तुम जो चाहो कर सकते हो, बस खुद पर विश्वास रखो और आगे बढ़ो। हरसिमरन नौसेना में जाना चाहती हैं।
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एनडीए से पहली बार स्नातक हुईं महिला कैडेट्स कड़े मानसिक-शारीरिक परीक्षण से गुजरीं
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हरियाणा की रहने वाली रितुल दुहन बटालियन कैडेट कैप्टन बनने वाली पहली महिला हैं। उनके पिता एक ठेकेदार हैं और मां गृहिणी हैं। रितुल ने एयरफोर्स कैडेट के तौर पर बीटेक किया है और कहती है कि एनडीए ने उनके पूरे व्यक्तित्व को बदलकर रख दिया है। वह खुद को ज्यादा मजबूत और नेतृत्व करने में सक्षम मानती हैं।