फ्रांस से छह राफेल जंगी विमानों की पहली खेप 27 जुलाई तक भारत आने की उम्मीद है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि 17 गोल्डन स्क्वॉड्रन के कमांडिंग ऑफिसर फ्रांसीसी पायलट के साथ पहला राफेल उड़ाकर लेकर आएंगे। फ्रांस से भारत की यात्रा के दौरान इस विमान के मध्य पूर्व पहुंचने पर हवा में ही दोबारा ईंधन भरा जाएगा। ये ईंधन फ्रांसीसी वायुसेना के टैंकर विमान भरेंगे।
राफेल विमान 10 घंटे की उड़ान के बाद भारत पहुंचेंगे, हवा में दो बार भरा जाएगा ईंधन
राफेल उड़ाने के लिए सात पायलट ले चुके हैं ट्रेनिंग
सूत्रों ने बताया कि राफेल उड़ाने के लिए फ्रांसीसी एयरबेस पर भारत के सात पायलटों के पहले बैच ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है। वहीं, दूसरा बैच ट्रेनिंग के लिए फ्रांस जाने वाला है। जैसे ही कोरोना से हालात सुधरेंगे, इन्हें भेज दिया जाएगा। फ्रांस से पहले जंगी उपकरण मालवाहक विमान से भारत आ चुके हैं। भविष्य में और भी उपकरण आने हैं। उल्लेखनीय है भारत ने सितंबर, 2016 में 36 राफेल खरीदने के लिए फ्रांस से करीब 58 हजार करोड़ का करार किया था।
हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने की क्षमता
सूत्रों ने बताया कि हथियारों से लैस राफेल की हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने की दोहरी मारक क्षमता है। इस तरह के साजोसामान से सुसज्जित राफेल न तो चीन के पास है और न ही पाकिस्तान के पास है। यूरोपीय मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए की मीटियोर दुश्मन की नजर से बचकर हमला करने वाली मिसाइल है।
वहीं, स्कैल्प क्रूज मिसाइल के साथ मिलकर इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है। मीटियोर अगली पीढ़ी का बीवीआर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। यह हथियार ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, फ्रांस, स्पेन और स्वीडन के खिलाफ खतरों को देखते हुए विकसित किया गया है।
भारत-चीन के बीच बातचीत नए सिरे से शुरू करने की तैयारी
पूर्वी लद्दाख में बरकरार तनाव को कम करने के मकसद से भारत और चीन के कोर कमांडर मंगलवार को फिर बातचीत करेंगे। यह बातचीत बुधवार को भी जारी रह सकती है। उधर, भारत-चीन के बीच कूटनीतिक-राजनयिक स्तर की बातचीत नए सिरे से शुरू करने की तैयारी भी चल रही है। दो से तीन दिन में इस पर भी पहल होगी।
इससे पहले दोनों कोर कमांडर 22 जून को चुशुल से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के दूसरी तरफ चीन के मोल्डो में मिले थे। करीब 11 घंटे के मैराथन बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच गलवां घाटी, पैंगोंग झील और हॉट स्प्रिंग से पीछे हट कर 2 मई की स्थिति में जाने पर सहमति बनी थी। हालांकि, उसके बाद बीते हफ्ते में स्थिति में सुधार के बजाए हालात और तनावपूर्ण हो गए।
चीन ने भारत को उलझाए रखने की रणनीति अपनाई
राजनयिक स्तर पर भी चीन ने गलवां घाटी में हिंसक वारदात और पूर्वी लद्दाख में तनाव के लिए भारत को दोषी ठहरा दिया। भारत ने भी दो टूक कह दिया कि अगर एलएसी पर चीन की तरफ से यथास्थिति बदलने को कोशिश जारी रही तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।
उधर, चीन ने भारत को उलझाए रहने की रणनीति के तहत उत्तरी लद्दाख के डेपसांग में वाई जंक्शन पर अपना जमावड़ा कर भारतीय सेना के सामने नई चुनौती पेश कर दी। उम्मीद की जा रही है कि दोनों कोर कमांडर की इस तीसरी बातचीत का सकारात्मक परिणाम निकलेगा।