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राफेल विमान 10 घंटे की उड़ान के बाद भारत पहुंचेंगे, हवा में दो बार भरा जाएगा ईंधन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Tue, 30 Jun 2020 12:42 PM IST
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India China News: Rafale Aircraft to reach India after 10 hours flight, fuel will be filled twice in the air
राफेल विमान (सांकेतिक चित्र)

फ्रांस से छह राफेल जंगी विमानों की पहली खेप 27 जुलाई तक भारत आने की उम्मीद है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि 17 गोल्डन स्क्वॉड्रन के कमांडिंग ऑफिसर फ्रांसीसी पायलट के साथ पहला राफेल उड़ाकर लेकर आएंगे। फ्रांस से भारत की यात्रा के दौरान इस विमान के मध्य पूर्व पहुंचने पर हवा में ही दोबारा ईंधन भरा जाएगा। ये ईंधन फ्रांसीसी वायुसेना के टैंकर विमान भरेंगे।



इसके बाद मध्य पूर्व से भारत तक की उड़ान के दौरान बीच में भारतीय आईएल-78 के विमान राफेल में फिर ईंधन भरेंगे। सूत्रों ने बताया कि वैसे तो राफेल 10 घंटे लगातार उड़ान भरकर सीधे भारत आ सकते हैं, मगर पायलटों को बेहद तनाव झेलना पड़ सकता है।

इन विमानों की पहली स्क्वॉड्रन को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा, जिसे भारतीय वायुसेना का सबसे अहम रणनीतिक बेस माना जाता है। वहीं, दूसरा रणनीतिक बेस पश्चिम बंगाल के हाशिमारा में होगा। कोरोना महामारी के बावजूद वायुसेना कड़ी मेहनत से जमीनी ढांचे को तैयार कर रही है, ताकि विमानों को यहां से संचालित किया जा सके।

वायुसेना ने राफेल के रखरखाव और तैनाती के लिए दोनों स्टेशनों पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कुल 36 राफेल में से 30 लड़ाकू विमान हैं, जबकि छह ट्रेनर विमान हैं। ट्रेनर विमान दो सीटों वाले हैं। उनमें लड़ाकू विमानों जैसी ही खासियतें होंगी।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : ट्विटर

राफेल उड़ाने के लिए सात पायलट ले चुके हैं ट्रेनिंग
सूत्रों ने बताया कि राफेल उड़ाने के लिए फ्रांसीसी एयरबेस पर भारत के सात पायलटों के पहले बैच ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है। वहीं, दूसरा बैच ट्रेनिंग के लिए फ्रांस जाने वाला है। जैसे ही कोरोना से हालात सुधरेंगे, इन्हें भेज दिया जाएगा। फ्रांस से पहले जंगी उपकरण मालवाहक विमान से भारत आ चुके हैं। भविष्य में और भी उपकरण आने हैं। उल्लेखनीय है भारत ने सितंबर, 2016 में 36 राफेल खरीदने के लिए फ्रांस से करीब 58 हजार करोड़ का करार किया था।

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राफेल विमान - फोटो : पीटीआई

हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने की क्षमता
सूत्रों ने बताया कि हथियारों से लैस राफेल की हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने की दोहरी मारक क्षमता है। इस तरह के साजोसामान से सुसज्जित राफेल न तो चीन के पास है और न ही पाकिस्तान के पास है। यूरोपीय मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए की मीटियोर दुश्मन की नजर से बचकर हमला करने वाली मिसाइल है।

वहीं, स्कैल्प क्रूज मिसाइल के साथ मिलकर इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है। मीटियोर अगली पीढ़ी का बीवीआर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। यह हथियार ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, फ्रांस, स्पेन और स्वीडन के खिलाफ खतरों को देखते हुए विकसित किया गया है।

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Rafale Aircraft

भारत-चीन के बीच बातचीत नए सिरे से शुरू करने की तैयारी
पूर्वी लद्दाख में बरकरार तनाव को कम करने के मकसद से भारत और चीन के कोर कमांडर मंगलवार को फिर बातचीत करेंगे। यह बातचीत बुधवार को भी जारी रह सकती है। उधर, भारत-चीन के बीच कूटनीतिक-राजनयिक स्तर की बातचीत नए सिरे से शुरू करने की तैयारी भी चल रही है। दो से तीन दिन में इस पर भी पहल होगी।

इससे पहले दोनों कोर कमांडर 22 जून को चुशुल से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के दूसरी तरफ चीन के मोल्डो में मिले थे। करीब 11 घंटे के मैराथन बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच गलवां घाटी, पैंगोंग झील और हॉट स्प्रिंग से पीछे हट कर 2 मई की स्थिति में जाने पर सहमति बनी थी। हालांकि, उसके बाद बीते हफ्ते में स्थिति में सुधार के बजाए हालात और तनावपूर्ण हो गए। 

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राफेल विमान - फोटो : ANI

चीन ने भारत को उलझाए रखने की रणनीति अपनाई
राजनयिक स्तर पर भी चीन ने गलवां घाटी में हिंसक वारदात और पूर्वी लद्दाख में तनाव के लिए भारत को दोषी ठहरा दिया। भारत ने भी दो टूक कह दिया कि अगर एलएसी पर चीन की तरफ से यथास्थिति बदलने को कोशिश जारी रही तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।

उधर, चीन ने भारत को उलझाए रहने की रणनीति के तहत उत्तरी लद्दाख के डेपसांग में वाई जंक्शन पर अपना जमावड़ा कर भारतीय सेना के सामने नई चुनौती पेश कर दी। उम्मीद की जा रही है कि दोनों कोर कमांडर की इस तीसरी बातचीत का सकारात्मक परिणाम निकलेगा।

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