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भारतीय संविधान बनाने में मदद करने वाली ये हैं वो 15 महिलाएं, जिन्हें भुला दिया गया

Fri, 26 Jan 2018 07:51 PM IST
Updated Fri, 26 Jan 2018 07:51 PM IST
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republic day special These Are The 15 Women Who Helped Draft The Indian Constitution
महिलाएं जिन्होंने संविधान बनाने में मदद की - फोटो : social media

भारत का संविधान 26 जनवरी 1949 में बनाया गया और इसे 26 जनवरी 1950 को देश के गणतंत्र दिवस के रूप में समर्पित किया। भारतीय संविधान के जनक और पिता भले ही बीआर अंबेडकर हैं। लेकिन शायद ही आप जानते हों कि संविधान के निर्माण में महिलाओं का योगदान भी रहा है जिसे आसानी से भुला दिया गया। amarujala.com ने 69 वें गणतंत्र दिवस को देश की बेटियों को समर्पित किया है और #बेटियों-का-गणतंत्र मना रहा है। आइए उन महिलाओं से मिले जिन्होंने देश के संविधान के निर्माण में अहम योगदान दिया है।  

अम्मू स्वामीनाथन

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अम्मू स्वामीनाथन - फोटो : social media

जब भारतीय संविधान का निर्माण किया जा रहा था तो महिलाओं के अधिकारों की बात भी जोर-शोर से उठी थी। संविधान निर्माण के दौरान उस समय में देशभर विभिन्न अभियानों से जुड़ी महिला हस्तियों को भी जोड़ा था। उसमें एक थी अम्मू स्वामीनाथन। अम्मी का जन्म केरल के पालाघाट जिले के अनक्कारा में हुआ था। उन्होंने 1917 में मद्रास  में  एनि बेसेंट सहित कई महिलाओं के साथ मिलकर एक वुमन इंडिया एसोसिएशन का निर्माण किया था। वह 1946 में मद्रास कंस्टीट्यएंसी की हिस्सा भी थीं। जब 24 नवंबर 1949 में  बी आर अंबेडकर संविधान के बारे में अपनी बात रख रहे थे तब आत्मविश्वास से लबरेज अम्मू ने कहा था- भारत के बारे में दुनिया वालों का कहना है कि भारत  में महिलाओं को बराबरी का अधिकार नहीं दिया गया है लेकिन अब हम कह सकते हैं कि भारतीयों ने अपना संविधान खुद बनाया है और दूसरे देशों की तरह अपने देश में भी महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया है। अम्मू 1952 में लोक सभा के लिए चुनी गईं थी जबकि 1954 में राज्यसभा की सांसद बनी थीं। 

दक्क्षायानी वेल्याधन

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दक्क्षायानी वेल्याधन

दक्क्षयानी वेल्याधन दबे कुचले वर्ग की आवाज रही हैं।  वेल्याधन का जन्म 1912 में कोचीन के बोलगट्टी  में हुआ था। वह पुलाया समुदाय से आती थीं वह अपने समुदाय की पहली महिला थीं जो पढ़ी लिखी थीं और आधुनिक कपड़े पहना करती थीं। 1945 में  दक्क्षयानी कोचीन लेजिसलेटिव काउंसिल के लिए नामित की गईं। वह पहली और अकेली दलित महिला थीं जो 1946 में कंस्टीट्यूट एसेंबली का चयन किया गया था। संविधान के निर्माण के दौरान दक्क्षयानी ने दलितों से जुड़ी कई समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया था। जिसके बाद संविधान में दलितों के लिए विशेष स्थान दिया गया था। 

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 बेगम ऐजाज रसूल

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बेगम ऐजाज रसूल
मालेरकोट्ला के अमीर घर में पैदा हुईं थीं और उनकी शादी  नवाब ऐजाज रसूल से हुई थी। वह आजाद भारत के संविधान सभा में शामिल होने वाली पहली भारतीय मुस्लिम महिला थीं। 1935 में ऐजाज दंपत्ति ने मुस्लिम लीग ज्वाइन किया था लेकिन देश के आजाद होने के बाद 1950 में दोनों ने ही कांग्रेस को ज्वाइन कर लिया था।   संविधान निर्माण के दौरान ऐजाज ने कई मुद्दों पर अपनी बात अंबेडकर को बताई जिसे संविधान में शामिल भी किया गया। 1969-71 में वह सोशल वेलफेयर और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री भी रहीं। सन 2000 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। 
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दुर्गा बाई देशमुख

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दुर्गा बाई देशमुख
 दुर्गा बाई का जन्म 1909 में राजामंड्री में हुआ था। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने नॉन को-ऑपरेशन मूवमेंट में भाग लिया साथ ही उन्होंने  1930 में बापू के नमक सत्याग्रह आंदोलन में भी भाग लिया था। 1936 में उन्होंने आंध्र महिला सभा का निर्माण किया था। उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में संविधान में अहम बातें जुड़वाई। वह शिक्षा और महिला से जुड़ी कई संस्थाओं से जुड़ी और उसकी अध्यक्षता भी की। उन्हें 1975 में पद्म विभूषण से भी नवाजा गया। 
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