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Supreme Court: 'सीमा शुल्क कानून और जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की शक्ति वैध'; CJI की अध्यक्षता में अदालत का फैसला
Fri, 28 Feb 2025 08:46 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 28 Feb 2025 08:46 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने बड़ा फैसला पारित किया है। 63 पन्नों के आदेश में अदालत ने कई बड़ी बातें कहीं। कोर्ट ने कहा, सीमा शुल्क अधिकारी के पास पुलिस अफसर का दर्जा और अधिकार नहीं है। इसके बावजूद सीमा शुल्क कानून व जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की शक्तियां वैध मानी जाएंगी।
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सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ का फैैसला
- फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व सीमा शुल्क से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं होने पर भी व्यक्ति अग्रिम जमानत की मांग कर सकता है। धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) सहित अन्य कानूनों के तहत गिरफ्तारी पर लागू सुरक्षा उपाय इन मामलों में भी लागू होंगे। हालांकि, पीठ ने संशोधित सीमा शुल्क कानून व जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की शक्ति की सांविधानिक वैधता को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ का फैैसला
- फोटो : अमर उजाला
अहम फैसला : कस्टम अफसरों को पुलिस अधिकारियों का दर्जा नहीं
सरकार ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि सीजीएसटी अधिनियम के तहत गिरफ्तारियां अधिकारी के संदेह से अधिक, लेकिन गंभीर संदेह से कम के आकलन पर आधारित है। हालांकि, अदालत ने मनमाने ढंग से गिरफ्तारी के लिए किसी भी औचित्य को खारिज कर दिया।
पीठ ने जीएसटी ढांचे के तहत तलाशी व जब्ती के दौरान अफसरों की ओर से धमकी और बल प्रयोग को भी अस्वीकार किया। पीठ ने निर्देश दिया कि ऐसे अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए।
यह था मामला
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कर अधिकारियों को कर चोरी व धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार देने वाले प्रावधानों को चुनौती दी थी। तर्क दिया कि ऐसी शक्तियां विधायी मंशा से परे हैं और अनुच्छेद 20(3) व 21 के तहत सांविधानिक सुरक्षा का उल्लंघन करती हैं। सीमा शुल्क अधिनियम के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय के समक्ष चुनौती दी गई कि गिरफ्तारी प्रावधान आपराधिक प्रक्रिया संहिता व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का पालन नहीं करते हैं।
- पीठ ने अहम फैसले में कहा, सीमा शुल्क अफसरों को पुलिस अधिकारियों का दर्जा प्राप्त नहीं है और इसलिए वे असीमित पुलिसिंग शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकते।
- पीठ ने कहा कि अपराध होने पर बलपूर्वक कार्रवाई करने से पहले, उसके कारणों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाना चाहिए।
- पीठ ने माना कि जीएसटी अधिनियम के तहत वसूली के लिए धमकी व बल प्रयोग चिंता की बात है। इस तरह का चलन अस्वीकार्य है।
सरकार ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि सीजीएसटी अधिनियम के तहत गिरफ्तारियां अधिकारी के संदेह से अधिक, लेकिन गंभीर संदेह से कम के आकलन पर आधारित है। हालांकि, अदालत ने मनमाने ढंग से गिरफ्तारी के लिए किसी भी औचित्य को खारिज कर दिया।
- पीठ ने जोर दिया कि गिरफ्तारी के अधिकार को आरोप तय करने के बराबर नहीं माना जा सकता है और इसका इस्तेमाल संयम से किया जाना चाहिए।
पीठ ने जीएसटी ढांचे के तहत तलाशी व जब्ती के दौरान अफसरों की ओर से धमकी और बल प्रयोग को भी अस्वीकार किया। पीठ ने निर्देश दिया कि ऐसे अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए।
यह था मामला
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कर अधिकारियों को कर चोरी व धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार देने वाले प्रावधानों को चुनौती दी थी। तर्क दिया कि ऐसी शक्तियां विधायी मंशा से परे हैं और अनुच्छेद 20(3) व 21 के तहत सांविधानिक सुरक्षा का उल्लंघन करती हैं। सीमा शुल्क अधिनियम के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय के समक्ष चुनौती दी गई कि गिरफ्तारी प्रावधान आपराधिक प्रक्रिया संहिता व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का पालन नहीं करते हैं।