हम सब कई बार कुदरत के कहर के शिकार हुए हैं। कभी हवा तो कभी पानी ने हम पर जुल्म ढाया है। कभी हम तेज तूफान में फंसे, तो कभी धूप की तुर्शी ने हमें जलाया है।
धरती पर वो जगहें, जहाँ सामने दिखती है मौत
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धरती पर वो जगहें, जहाँ सामने दिखती है मौत
इनमें से पहला है पानी
पानी के बिना जिंदगी का तसव्वुर भी मुमकिन नहीं। क्योंकि जल ही जीवन है। लेकिन अगर इसे गुस्सा आ जाए तो ये जानलेवा भी हो सकता है।
समुद्र किनारे बसने वाले तो अक्सर ही समुद्र के गुस्से को बर्दाश्त करते हैं। हिंद महासागर के पास बसा देश मालदीव इससे अछूता नहीं है। इसीलिए उसे अल्पकालिक देश कहा जाता है। मतलब आने वाले वक्त में मालदीव, दुनिया के नक्शे से मिट जाने का डर है।
धरती पर वो जगहें, जहाँ सामने दिखती है मौत
सुनामी का पता पहले चलेगा
असल में मालदीव समुद्र के स्तर से थोड़ा नीचा है, लिहाजा जब भी समुद्र की लहरें उफान भरती हैं तो इसे अपनी चपेट में ले लेती हैं। हर साल बदलती धरती की आबो-हवा भी इसमें बड़ा रोल निभाती है। सबसे बुरा हाल तो तब होता है, जब अचानक समुद्र में तूफान आता है और सुनामी जैसे हालात पैदा हो जाते हैं।
दरअसल जब समुद्र में एक के बाद एक ऊंची लहरें उठती हैं तो इससे समुद्र की गति में भी बदलाव आता है। और सुनामी आ जाती है जो अपने साथ जान-माल का भारी नुकसान लाती है। अमरीकी नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक प्रशांत महासागर में 71 फीसद मौकों पर सुनामी आने के हालात बने रहते हैं। इसके अलावा भूकंप के चलते भी सुनामी आ सकती है।
हालांकि अब ऐसी तकनीक खोज ली गई हैं, जिससे घातक सुनामी के आने से पहले ही एहतियाती कदम उठाए जा सकते हैं। इसके लिए पहले से ही लोगों को खबर कर दी जाती है।
लेकिन, कई मर्तबा समुद्र में इतनी जल्दी हलचल होती है और सुनामी आ जाती है कि लोगों को हटाने के लिए बीस मिनट तक का समय नहीं मिल पाता। और हजारों जाने पल भर में चली जाती हैं। हाल की वर्षों में सबसे खतरनाक सुनामी हिंद महासागर में साल 2004 में आई थी जिसने करीब 15 देशों में दो लाख अस्सी हजार जानें निगल ली थी।
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सैलाब का कितना डर?
1931 में चीन की यांग्त्सी नदी में आया सैलाब भी कोई भुला नहीं सकता। हालांकि रिकॉर्ड मौत के आंकड़े को कम ही आंकते है। फिर भी कहा जाता है कि इस सैलाब में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इस सैलाब की वजह थी भारी बर्फबारी और बारिश। जिसकी वजह से नदी का जल स्तर बढ़ गया था और उसके आस पास रहने वालों को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी।
चीन में आज पानी के किनारे लाखों जिंदगियां आबाद हैं। ये पानी इनके जीवन की बुनियादी जरूरत को तो पूरा करता है लेकिन कभी भी ये इस पानी के गुस्से का शिकार हो सकते हैं।
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कुदरत की दूसरी नेमत है हवा
अफ्रीका में बहुत सी कातिल झीलें हैं। लेकिन इन झीलों का पानी मुसीबत नहीं लाता है। दरअसल ये झीलें ऐसे इलाके में हैं, जहां आस-पास ज्वालामुखी हैं और उनमें लगातार हलचल होती रहती हैं।
कैमरून की 'न्योस' और कांगो-रंवाडा की सीमा पर स्थिन 'कीवू' ऐसी ही दो झीलें हैं, जिनमें खतरा बसता है। जिनके इलाके में ज्वालामुखी लगातार सक्रिय रहते हैं।
जिसके नतीजे में यहां की जमीन से कार्बनडाई ऑक्साइड गैस रिसती रहती है।
जब जमीन के अंदर इस गैस का गुबार फटता है तो एक बादल सा बन जाता है। चूंकि गैस हवा के मुकाबले ज्यादा भारी होती है लिहाजा वो जितनी जगह घेरती है, उतनी जगह की ऑक्सीजन को खत्म कर देती है। 1980 में कैमरून की न्योस झील में ऐसे ही दो विस्फोट हुए थे जिसके नतीजे में 1700 लोगों की जान गई थी और करीब 3500 जानवर दम घुटने से मौत की नींद सो गए थे।