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ऐसे बनी कश्मीर की पहचान 

Thu, 07 Nov 2019 07:38 PM IST
Rama Solanki Published by: रमा सोलंकी Updated Thu, 07 Nov 2019 07:38 PM IST
सार

  • धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं
  • कश्मीर: कब, किसने दस्तक दी
  • क्या हैं जो कश्मीर को कश्मीर बनाता हैं 
  • जाहंगीर ने कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा तो अशोक ने बनाया श्रीनगर को राजधानी
  • कश्मीर की केसर और पश्मीना शॉल की कहानी 

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This is how Kashmir got it's identity
धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं - फोटो : Amar Ujala

धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं

कश्मीर मुख्य रूप से अपनी खूबसूरत वादियों, घाटियों और प्राकृतिक नजारों के लिए मशहूर है। हालांकि इनके अलावा भी यहां ऐसी कई चीजें हैं, जिनसे प्यार या फिर उनका दीदार हर कोई करना चाहता है। इनमें पश्मीना शॉल, कश्मीरी संगीत, कला और शिल्प, शिकारा और व्यंजनों से लेकर तमाम ऐसी चीजें हैं, जिनका सामना होते ही लोग कह उठते हैं- वाह कश्मीर! वाकई खुदा ने जितनी फुर्सत में कश्मीर को बनाया है, उतनी ही फुर्सत और कलात्मकता से यहां के लोग यहां उपलब्ध चीजों को संवारते हैं। हम आज आपको यहां की ऐसी ही बेइंतहा खूबसूरत चीजों के बारे में बता रहे हैं

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कश्मीर - फोटो : amar ujala

कुछ खास बातें जो कश्मीर को कश्मीर बनाती हैं 

मशहूर सूफी कवि अमीर खुसरो ने खूबसूरत शब्दों के साथ कश्मीर के बारे में कहा कि "गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त/ हमी अस्तो हमी अस्तो हमी अस्त" (धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं)
  • कश्मीर जिसको जमीन की जन्नत कहा जाता है, उस का नाम कश्यप ऋषि के नाम पर रखा गया था। 
  • जम्मू का नाम वहां के राजा जम्बू लोचन के नाम पर रखा गया था और कश्मीर का नाम सतीसर अर्थात् कछुओं की झील से पड़ा था। 

कश्मीर: कब, किसने दस्तक दी

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कश्मीर - फोटो : amar ujala

कश्मीर: कब, किसने दस्तक दी

  • 12वीं शताब्दी में कश्मीर पूर्ण हिन्दू राज्य रहा था, उसके बाद अलग अलग धर्मों के शासक वहां पर आते गए। 
  • कश्मीर में तीसरी शताब्दी में अशोक का शासन रहा था, और वहां बोध धर्म ने भी अपनी जड़ें फैलाई। 
  • कश्मीर के 48वें सम्राठ अशोक थे, इनको धर्माशोक के नाम से भी परिचय प्राप्त था, कल्हण की 'राजतरंगिणी' के अंतर्गत इसका वर्णन मिलता है।  
  • अशोक के आगमन के साथ ही तीसरी शताब्दी में ही बौद्ध धर्म का आगमन भी कश्मीर में हुआ।  
  • छठी शताब्दी में उज्जैन के महाराज विक्रमादित्य के अधीन फिर से हिन्दू धर्म की वापसी हुई। 
  • यहां मुस्लिम शासन का आरंभ चौदहवीं शताब्दी में हुआ और उसी काल में फारस से सूफी इस्लाम का भी आगमन हुआ था।  
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जब राजा हरिसिंह ने भारत से मदद मांगी

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कश्मीर के राजा हरि सिंह - फोटो : amar ujala
  • 26 अक्टूबर को कश्मीर को भारतीय गणराज्य का हिस्सा बनाया गया था। कश्मीर के राजा हरि सिंह ने इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947 पर हस्ताक्षर किए और इसको कानूनी अनुमति मिली।  
  • राजा हरिसिंह की डोगरा रियासत पर हथियारबंद कबायलियों ने हमला कर दिया, उस वक्त राजा हरिसिंह ने भारत से मदद मांगी, मगर भारत ने कश्मीर के विलय की शर्त रखते हुए कहा कि पहले विलय के कागजों पर हस्ताक्षर होंगे उसके बाद मदद की जाएगी, 26 अक्टूबर को राजा ने विलय पत्र पर दस्तखत कर दिए और कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया।इस बात का वर्णन वीपी मेनन ने अपनी किताब "पॉलिटिकल इंटीग्रेशन आफ इंडिया" मे भी किया है।  


वीपी मेनन ने लिखा कि, "24 अक्टूबर को कश्मीर के राजा ने भारत से मदद मांगी थी ।  इस विषय पर दिल्ली में भारत की सुरक्षा समिति की बैठक हुई और वीपी मेनन को श्रीनगर भेजा गया। उन्होंने सारी रिपोर्ट नेहरू को दी और नेहरू भी पाकिस्तान के कबायलियों से निपटने के लिए भारतीय सेना को कश्मीर भेजना चाहते थे ,मगर माउंटबेटन ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया"। 

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जाहंगीर ने कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा तो अशोक ने बनाया श्रीनगर को राजधानी

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जाहंगीर और अशोक की तस्वीरें - फोटो : amar ujala
जाहंगीर ने कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा
मुगल शासक जाहंगीर ने कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा था, जाहंगीर कश्मीर की खूबसूरती से बहुत प्रभावित थे और यही वजह थी कि वो कश्मीर एक दो बार नहीं बल्कि 13 बार कश्मीर भ्रमण पर आए थे।   

अशोक ने बनाया श्रीनगर को राजधानी 
चक्रवती राजा अशोक ने सबसे पहले श्रीनगर को जम्मू कश्मीर की राजधानी के तौर पर स्थापित किया था।  

शमसुद्दीन शाह मीर ने कश्मीर में इस्लामिक शासन की नींव रखी
मंगोल के राजा शमसुद्दीन शाह मीर ने कश्मीर में सबसे पहले इस्लामिक शासन की नींव रखी थी। 14वीं शताब्दी में शमसुद्दीन शाह मीर ने राजा अशोक को पराजित करके कश्मीर में अपना शासन स्थापित किया। 
 
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