ऑपरेशन सिंदूर आधुनिक युद्ध के मौजूदा दौर में भारत की निर्णायक जीत है, लेकिन मेरी नजरों में ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह थमा नहीं है। यह एक सोचा-समझा रणनीतिक विराम है, जिसे कुछ लोग संघर्ष विराम कह सकते हैं, लेकिन भारतीय सेना ने इस शब्द से जानबूझकर दूरी बनाई। मेरे लिए, यह कोई मामूली ठहराव नहीं, बल्कि एक ऐसी सैन्य जीत के बाद का दमदार कदम है, जो इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।
US Think Tank on Operation Sindoor: भारत की जीत ने चौंकाया, उसने दुनिया की परवाह नहीं की, इसका चार तरह से असर
Operation Sindoor: पूरी दुनिया अब भारत की ताकत का लोहा मान चुकी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' की हर तरफ तारीफ हो रही है। एक दिन पहले ऑस्ट्रेलियाई एविएशन एनालिस्ट टॉम कूपर ने भारत के शौर्य की तारीफ की थी। अब अमेरिका के जानेमाने युद्ध विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने भारत के नई नीति को सराहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
22 अप्रैल, 2025 को, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटक एक बर्बर आतंकी हमले का शिकार बने। पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा की शाखा, द रेसिस्टेंस फ्रंट ने इसकी जिम्मेदारी ली। मैंने देखा कि इस बार भारत ने न तो समय गंवाया, न ही दुनिया की परवाह की। 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गूंजता बयान सुना- आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते। पानी और खून एक साथ नहीं वह सकते।
एक के बाद एक चरणबद्ध कार्रवाई
ये चार गहरे सामरिक प्रभाव दिखे
प्रतिशोध नहीं प्रतिरोध की थी लड़ाई...
ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य कहीं कब्जा करना या शासन बदलना नहीं था। यह सीमित युद्ध था जिसे खास उद्देश्यों के लिए अंजाम दिया गया। जो आलोचक तर्क देते हैं कि भारत को और आगे जाना चाहिए था, वे इस मुद्दे को समझने में गलती कर रहे हैं। भारत प्रतिशोध नहीं प्रतिरोध के लिए लड़ रहा था और यह काम कर गया। भारत का संयम कमजोरी नहीं है-यह परिपक्वता है। भारत ने सिर्फ हमले का जवाब नहीं दिया। इसने रणनीतिक समीकरण को बदल दिया। ऐसे युग में जहां कई युद्ध खुलेआम कब्जों या राजनीतिक उलझन में बदल जाते हैं, ऑपरेशन सिंदूर अलग है। यह अनुशासित सैन्य रणनीति का प्रदर्शन था। भारत ने एक झटके को झेला, अपना उद्देश्य परिभाषित किया और उसे पाया। यह सब एक सीमित समय सीमा के भीतर। ऑपरेशन सिंदूर में बल का जबरदस्त मगर नियंत्रित इस्तेमाल हुआ, सटीक, निर्णायक व बिना हिचकिचाहट के। आधुनिक युद्ध में इस तरह की स्पष्टता दुर्लभ है।