पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई हैं। जनसभाओं का दौर जारी है। 27 मार्च को पहले चरण की वोटिंग होगी। इसके पहले सभी राजनीतिक पार्टियां चुनावी रैलियों को संबोधित करने में व्यस्त हैं। इस बीच राज्य में प्रचार के दौरान जो एक खास चीज नजर आ रही हैं, वो बंगाल विधानसभा चुनाव का चीन कनेक्शन। जी हां, टीएमसी के कार्यकर्ता यहां अनोखे अंदाज में प्रचार करते नजर आ रहे हैं। राज्य के कसबा विधानसभा क्षेत्र के टेंगरा इलाके में यहां के दिवारों पर चीनी भाषा में लिखकर प्रचार किया जा रहा है और यहां की जनता को लुभाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि दीदी की पार्टी को ऐसा करने की क्या जरूरत आन पड़ी और इसके पीछे की वजह क्या है। तफ्सील से समझिए...
बंगाल का चाइना टाउन: यहां बांग्ला नहीं 'चीनी' में हो रहा प्रचार, जानें इस इलाके का इतिहास-भूगोल
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क्या है दीदी की पार्टी का चीन कनेक्शन
राज्य के जिस इलाके (टेंगरा) में चीनी भाषा का इस्तेमाल कर चुनाव प्रचार किया जा रहा, वहां सातवें और आठवें चरण में मतदान होना है। मगर यहां के टीएमसी उम्मीदवार जावेद खान चीनी भाषा में दीवार लेखन कर यहां रहने वाले लोगों से वोट मांग रहे हैं। चीनी भाषा में टीएमसी के नारों और वोट मांगने के नारों से यहां की दीवारें रंगी हुई हैं। आखिर इसके पीछे की वजह क्या है और हिंदी, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं के रहते दीदी की पार्टी चीनी भाषा का इस्तेमाल क्यों कर रही है?
'चाइना टाउन' के नाम से जाना जाता है टेंगरा
दरअसल, पश्चिम बंगाल का टेंगरा इलाका 'चाइना टाउन' के नाम से जाना जाता है। इस इलाके में कभी 20 हजार चीनी मूल के भारतीय नागरिकों का घर था, लेकिन अब इनकी आबादी घटकर लगभग 2000 ही रह गई है। यहां के लोग चमड़े का व्यापार करते हैं। इसके साथ ही रेस्त्रां भी चलाते हैं। यह इलाका अभी भी चीनी रेस्तरां के लिए मशहूर है, जहां लोग पारंपरिक चीनी और भारतीय चीनी व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए आते हैं। यहां के लोगों के लिए हिंदी और बांग्ला केवल कामचलाऊ की भाषा है। इसलिए टीमएमसी यहां की जनता को चीनी भाषा में प्रचार कर उन्हें लुभाने की कोशिश में जुटी हुई है।
सदियों पुराना है रिश्ता
कोलकाता से चीनी नागरिकों का रिश्ता आज का नहीं बल्कि सदियों पुराना है। कहा जाता है कि 18वीं शताब्दी के अंत में चीनी मजदूरों ने भारत आना शुरू कर दिया था। शुरुआत में ये यहां चमड़े का काम करते थे और बाद में धीरे-धीरे कपड़े और रेस्टोरेंट के व्यापार में आ गए। इसके अलावा बंगाल में लंबे समय तक वामपंथ (लेफ्ट) की सरकार रही है और लेफ्ट का चीन से लगाव अभी भी है। बहरहाल, ये तो आने वाला वक्त ही तय करेगा कि दीदी की पार्टी को चीनी भाषा का प्रयोग कर चुनाव प्रचार करना कितना कारगर साबित होता है। बता दें कि राज्य में 294 विधानसभा सीटों के लिए आठ चरणों में चुनाव होने वाले हैं। दो मईको नतीजे आएंगे।