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एक ऐसा स्कूल, जहां बच्चे कब्र पर बैठकर करते हैं पढ़ाई

अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Wed, 29 Mar 2017 05:04 PM IST
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children in Primary school are reading in these circumstances
दरगाह में स्कूल - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश की राजधानी में सरकारी शिक्षा और स्कूलों के हालात का एक नजारा एक ऐसा स्कूल पेश करता है, जहां बच्चे मजार में बनी कब्रों के बीच में जगह तलाशते नजर आते हैं। मामला राजधानी के पुराने शहर से जुड़ा है। राजकीय बालिका प्राथमिक विद्यालय, दरगाह इमली वाले बाबा, हाजी कालोनी में सौ से ज्यादा बच्चे इन हालातों में पढने को मजबूर हैं।
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पक्की कब्रों के बीच हैं बैठ रहे

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दरगाह में स्कूल - फोटो : अमर उजाला
यह स्कूल जिस परिसर में है, वहां बाबा इमली वाले की दरगाह है। यहीं जिस कमरे में बच्चे बैठकर अपने भविष्य को उज्जवल बनाने के सपने देख रहे हैं, वहीं दो पक्की कब्रें भी बनी हैं। हालात हैं कि बच्चे इन पक्की कब्रों पर ही दरी बिछाकर पढ़ाई करने को मजबूर होतेहैं। बच्चों को अब तो इस बात से कोई फर्क भी पड़ता कि वे कहां बैठे हैं।

 
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सौ से ज्यादा बच्चे हो रहे परेशान

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दरगाह में स्कूल - फोटो : अमर उजाला
आम तौर पर सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होती है, लेकिन इस स्कूल में बच्चों की संख्या सौ से ऊपर है। इनमें से ज्यादातर समुदाय विशेष से ताल्लुक रखते हैं। हाजी कालोनी के इन बच्चों को लेकर कालोनी वासी भी अपनी शिकायत दर्ज करवा चुके हैं।

 

स्कूल किया मर्ज, नहीं मिटी परेशानी

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दरगाह में स्कूल - फोटो : अमर उजाला
उधर, स्कूल प्रशासन की मानें तो शिक्षा विभाग को इसे लेकर जानकारी दी गई थी और इसी के बाद स्कूल को राजकीय बालिका सी. सै. स्कूल नाहरी का नाका में मर्ज भी कर दिया गया था। चूंकि वह स्कूल करीब एक किमी दूर था, ऐसे में परिजनों ने बच्चों को दूर स्कूल में भेजने से इंकार कर दिया। ऐसे में बच्चे इसी स्कूल में रूके हुए हैं।
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बच्चे फंसे हैं छोटे कमरे में....

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दरगाह में स्कूल - फोटो : अमर उजाला
लंबे समय से चल रही इस परेशानी के बीच बच्चे फंसे हुए हैं, जो कमरा बच्चों को मुहैया करवाया गया है, वो काफी छोटा है। इस कमरे में सौ बच्चों को बैठने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देखने वाली  बात यह है कि कब तक बच्चों को इस समस्या से निजात मिल सकेगा।
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