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मददगार बनी सेना: आईडी ब्लास्ट और अन्य हादसों में अंग गंवाने वालों को सेना ने दी सहायता, देखिए तस्वीरें

Tue, 13 Jul 2021 11:52 AM IST
करिश्मा चिब अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर
अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर Published by: करिश्मा चिब Updated Tue, 13 Jul 2021 11:52 AM IST
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Army became helpful: Army gave aid to those who lost their organs in ID blasts and other accidents, see photos
जम्मू-कश्मीर में सेना बनी मददगार - फोटो : अमर उजाला

एलओसी के पास जवानों का सहारा बनने वाले केरन सेक्टर के लोगों के लिए भारतीय सेना भी मददगार बनकर सामने आई है। सेना ने करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर श्रीनगर से करीब 125 किलोमीटर दूर कुपवाड़ा के फरकियां गली में कृत्रिम अंग फिटमेंट शिविर लगाकर कई लोगों को नई जिंदगी दी। उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा के स्थानीय लोग अकसर भारतीय सेना के संग रहकर हर कार्य में उनकी मदद करते हैं। कई पोर्टर का काम करते हैं। लेकिन इस दौरान एलओसी से सटे इन इलाकों के लोग अकसर दुश्मन का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर निशाना बनते हैं। कभी पाकिस्तानी गोलाबारी में उनके मकान तबाह हो जाते हैं तो कभी उन्हें जान भी गंवानी पड़ती है। कभी उन्हें दुश्मन के लिए बिछाए गए बारूद का भी निशाना बनना पड़ता है। ऐसे ही कई स्थानीय लोगों के लिए भारतीय सेना ने फरकियां गली में एक शिविर लगाया। इसमें 76 पीड़ितों की मदद की गई। इनमें केरन पाईन, केरन बाला, मंडियां, नागां, त्रिंगनियां, कलस, बनी, कुंडियां, पात्रो, दड़दर, क्रालपोरा, रेडी, चौकीबल, मानचित्रा, वारसनू आदि गांवों के लोग पहुंचे।

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जम्मू-कश्मीर में सेना बनी मददगार - फोटो : अमर उजाला
सेना की छह राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल दीपक देसवाल ने बताया कि सेना ने जयपुर की स्वयंसेवी संस्था भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (बीएमवीएसएस) के साथ मिलकर फरकियां गली में कृत्रिम अंग फिटमेंट शिविर लगाया। इसमें सेना के साथ मिलकर देश सेवा करते-करते माइन ब्लास्ट में अपने अंग गंवाने वाले लोगों को मदद दी गई। वहीं शिविरि में कई लाभार्थी ऐसे भी आए जो दूरदराज के इलाकों में रहने के कारण उन्हें यह सुविधा आजतक नहीं मिल पाई। देसवाल ने कहा कि उनकी मदद के पीछे का मुख्य उद्देश्य यह है कि जो दिव्यांग है, जिनमें काबिलियत है, लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण वो लोग पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे, उनकी इस कमी को दूर करना था।
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जम्मू-कश्मीर में सेना बनी मददगार - फोटो : अमर उजाला
19 साल बाद अपने पैरों पर खड़े हुए गुलजार मीर
वारसनू के 60 वर्ष के मोहम्मद गुलजार मीर ने बताया कि वर्ष 2002 में एक दिन सरहदी इलाके में मवेशी चरा रहे थे। अचानक उनका पैर दुशमन को रोकने के लिए बिछाई गई बारूदी सुरंग पर पड़ गया और जोरदार ब्लास्ट हुआ। दोनों पैर काटने पड़े। गुलजार ने बताया कि आज सेना उनकी मदद के लिए आगे आई है, उन्हें कृत्रिम पैर लगाए गए और आज वह एक बार फिर अपने पैर पर खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद परिवार वाले भी नहीं पूछते थे, लेकिन अब सेना की मदद से उन्हें नई जिंदगी मिल गई है।
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जम्मू-कश्मीर में सेना बनी मददगार - फोटो : अमर उजाला

केरन के रहने वाले एक अन्य लाभार्थी सिराजद्दुीन ने भारतीय सेना का शुक्रिया करते हुए कहा कि सेना कि इस भेंट को वह कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने बताया कि वह सेना के लिए पोर्टर का काम कर रहा था, जब उसका पैर एलओसी के करीब बिछाई गई माइन पर पड़ गया। सब कुछ मुश्किल हो गया था और वह कोई काम नहीं कर पा रहा था। लेकिन अब वह फिर से कृत्रिम पैर के सहारे ही सही जीवन सर उठाकर जी सकता है।

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जम्मू-कश्मीर में सेना बनी मददगार - फोटो : अमर उजाला

निशुल्क दी गई सुविधा : समिति
भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के अध्यक्ष डीआर मेहता के अनुसार शिविर में चिकित्सा सहायता उपकरणों की वास्तविक आवश्यकता वाले लोगों की पहचान करना, कृत्रिम अंग सुविधा की स्थापना, अंगों की मोल्डिंग और कास्टिंग और लाभार्थियों पर उसी की अनुकूलित फिटिंग शामिल थी। सेवा बिलकुल निशुल्क थी। मेहता ने बताया कि उनकी संस्था दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा इदारा है जो दिव्यांगों की सहायता करती है। उन्होंने बताया कि 2019 में समिति ने करीब 31000 कृत्रिम पैर लगाए। सेना ने समिति के साथ मिलकर स्थानीय लोगों के बीच 5 प्रकार की चिकित्सा सहायता कृत्रिम अंग, व्हील चेयर, कैलिपर, बैसाखी और श्रवण यंत्र वितरित किए। फिटमेंट कैंप में 750 विकलांगों की मदद की गई। इनमें अधिकतर लाभार्थी ऐसे थे जो एलओसी पर माइन ब्लास्ट से पीड़ित थे। शिविर में कुल 11 कृत्रिम टांगें, 17 व्हील चेयर, 5 कैलिपर, 8 बैसाखी और 35 श्रवण यंत्र वितरित किए गए।

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