पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तनाव के बीच सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क और संचार परियोजनाओं में दस हजार श्रमिक लगातार काम में जुटे हैं। खास बात है कि इनमें से कई श्रमिक तो कोरोना महामारी के दौरान भी घर नहीं लौटे। वे बॉर्डर रोड से जुड़े काम में जुटे हुए हैं।
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सामरिक महत्व की ज्यादातर परियोजनाएं उच्च पर्वतीय क्षेत्र में चल रही हैं। यहां ऑक्सीजन की कमी रहती है और मौसम रूखा होने की वजह से किसी को भी जल्दी थका देता है। ऐसे हालात में ये श्रमिक इन दिनों में भी लगातार जुटे हुए हैं। इन्हें बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन(बीआरओ) की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।
बीआरओ के एक अधिकारी ने बताया कि यह श्रमिक अनुबंध के आधार पर काम करते हैं। अग्रिम इलाकों में तनाव की खबरों के बीच यह श्रमिक लगातार काम में जुटे हुए हैं। इनकी भूमिका खास महत्व रखती है।
उल्लेखनीय है कि गलवां घाटी में पेट्रोल प्वाइंट-14 पर 15 जून को हिंसक झड़प में 20 सैनिकों की शहादत के बावजूद सीमावर्ती परियोजनाओं को रफ्तार से आगे बढ़ाया जा रहा है। चीन के विरोध को दरकिनार कर गलवां नदी पर पुल भी तैयार किया गया है।
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