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Pahalgam Attack Anniversary: बहुत कुछ कह रही खामोशी, चश्मदीदों का दर्द; आज भी घटना को याद कर सिहर जाते हैं

अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, जम्मू Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 21 Apr 2026 12:27 PM IST
सार

देखते-देखते एक साल गुजर गया, लेकिन 22 अप्रैल की वो तारीख अब भी पहलगाम और बायसरन की वादियों में एक टीस की तरह मौजूद है। वादियां आज भी उतनी ही खूबसूरत हैं, लिद्दर नदी अब भी उसी रौ में बह रही है, लेकिन हवा में एक खामोशी है।
 

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Pahalgham Terror Attack Anniversary Silence Speaks as Eyewitnesses Relive Trauma
Pahalgham Terror Attack - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
एक साल बाद बायसरन अभी भी खामोश है। यहां जाने पर पाबंदियां हैं। रास्ते बंद हैं और वो मैदान जो कभी सैलानियों की चहल-पहल से गुलजार रहता था, आज भी सन्नाटे की चादर ओढ़े हुए है। दूसरी तरफ पहलगाम ने खुद को संभाल लिया है। डर और दहशत की परछाइयों को पीछे छोड़ते हुए यह पर्यटन स्थल फिर से जिंदगी की ओर लौटता दिख रहा है।


 
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Pahalgham Terror Attack Anniversary Silence Speaks as Eyewitnesses Relive Trauma
पहलगाम में सेल्फी पॉइंट - फोटो : अमृतपाल सिंह बाली
शहीद स्मारक : सैर से पहले संवेदना
पहलगाम में प्रवेश करते ही 'आई लव पहलगाम' सेल्फी पॉइंट के पास बने शहीद स्मारक पर कदम खुद-ब-खुद ठहर जाते हैं। यहां उन 26 लोगों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने उस दर्दनाक घटना में अपनी जान गंवाई। दिलचस्प यह है कि अब यहां आने वाले पर्यटकों की प्राथमिकता बदल चुकी है। पहले जहां कैमरे सीधे सेल्फी पॉइंट की ओर उठते थे, अब लोग पहले स्मारक की ओर जाते हैं। पीछे से आती एक आवाज 'रुको, पहले शहीदों को श्रद्धांजलि दे दें। यह वाक्य बदलाव की गवाही देता है। जयपुर से आए एक परिवार ने स्मारक पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि यह यात्रा अब सिर्फ घूमने की नहीं, बल्कि याद और सम्मान की भी है।
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पहलगाम में सेल्फी पॉइंट - फोटो : अमृतपाल सिंह बाली
मेहमान हमारी जान, भरोसे की वापसी
सेल्फी पॉइंट के पास एक लकड़ी का बोर्ड लगा है। इस पर लिखा है- मेहमान जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है। यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की भावना बन चुका है।

 
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सेल्फी पॉइंट के पास लगा लकड़ी का बोर्ड - फोटो : अमृतपाल सिंह बाली
गुजरात से आए पर्यटक मकसूद बॉबी कहते हैं कि यहां आकर उन्हें शहीदों को श्रद्धांजलि देने का मौका मिला और साथ ही यह महसूस हुआ कि कश्मीर अब भी मेहमाननवाजी के अपने मूल स्वभाव में कायम है। वहीं, नरेश चौधरी मानते हैं कि घटना दुखद जरूर थी लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और लोगों को बिना डर के यहां आना चाहिए।

 
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पहलगाम में लौटने लगी रौनक। पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। घोड़े की सवारी का आनंद उठाते पर्यटक हैं - फोटो : अमृतपाल सिंह बाली
स्थानीय कारीगर, घोड़े वाले और छोटे दुकानदार पर्यटकों की वापसी को उम्मीद की नजर से देख रहे हैं। बच्चों का घोड़ों के साथ फोटो खिंचवाना, छोटी-छोटी दुकानों पर रौनक-ये सब संकेत है कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है।

 
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