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उड़ी में 2016 दोहराना चाहते थे आतंकी: भनक लगते ही जवानों ने संभाला मोर्चा, पढ़ें दहशतगर्दों के खात्मे की कहानी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 23 Sep 2021 07:06 PM IST
उड़ी में मारे गए आतंकियों के पास से बरामद हथियार और गोला-बारूद
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भारतीय सेना ने गुरुवार को उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में उड़ी के हाथलंगा वन क्षेत्र में तीन आतंकियों को मार गिराने में सफलता पाई। मारे गए आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ है। आतंकियों के खात्मे के साथ ही घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश नाकाम कर दी गई है। सेना के श्रीनगर स्थित 15 कोर मुख्यालय में 15 कोर के लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने कहा कि 18 सितंबर के बाद गुरुवार को आतंकी घुसपैठ की दूसरी कोशिश की गई थी।

बताया कि गुरुवार सुबह सतर्क सैनिकों ने उड़ी सेक्टर में घुसपैठियों के एक समूह को देखा। मोर्चा संभालते हुए सेना ने तीन आतंकवादी मार गिराए। सेना के उड़ी स्थित कमांडिंग ऑफिसर ने कहा कि मारे गए तीन आतंकियों के पास भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और पैसा था। जिसमें पांच एके-47 राइफल, सात पिस्टल, 5-एके राइफल की मैगजीन, 24 यूबीजीएल ग्रेनेड, 38 चीनी ग्रेनेड, सात पाकिस्तान निर्मित ग्रेनेड, 35,000 रुपये (भारतीय मुद्रा), 10,300 रुपये (पाकिस्तानी मुद्रा) और कुछ खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
उड़ी में मारे गए आतंकियों के पास से बरामद हथियार और गोला-बारूद
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जीओसी ने कहा कि अब तक केवल एक मारे गए की पहचान की गई है जो एक पाकिस्तानी निवासी है। उन्होंने कहा कि इलाके को सैनेटाइज करने के बाद ऑपरेशन को बंद कर दिया गया है। 
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उधर, आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा कि मौजूदा शांतिपूर्ण माहौल, पर्यटकों की बढ़ती संख्या, केंद्रीय मंत्रियों और सैयद अली गिलानी की मृत्यु के बाद की शांतिपूर्ण स्थिति से निराश महसूस करते हुए एलओसी के पार से रणनीति में बदलाव आया है। अब हाइब्रिड और पार्ट टाइम आतंकवादियों का एक नया चलन है। जिन्हें शाम के समय हत्याओं को अंजाम देने के लिए पिस्टल दी जा रही है।
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 उन्होंने कहा कि इस साल अब तक आतंकवादियों से 97 पिस्टल बरामद किए गए हैं। जोकि दर्शाता है कि निहत्थे पुलिसकर्मियों, नागरिकों और नेताओं को निशाना बनाने के लिए हाइब्रिड आतंकवादियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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उड़ी हमला दोहराने की आतंकी साजिश नाकाम
गौरतलब है कि गोहलान इलाके के पास 18 सितंबर की दरमियानी रात उड़ी सेक्टर की अंगूर पोस्ट के पास सुरक्षाबलों ने संदिग्ध गतिविधि देखी थी। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद हुई गोलाबारी में एक जवान जख्मी हो गया था। सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि इलाके में आतंकियों का एक बड़ा समूह घुसपैठ करने में कामयाब हुआ है। मालूम हो कि पांच साल पूर्व 18 सितंबर 2016 को जैश-ए-मोहम्मद के हथियारों से लैस चार आतंकियों ने उड़ी सेक्टर में सेना की 12 ब्रिगेड के कैंप पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें सेना के 18 जवान शहीद हुए थे।
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