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DIWALI 2019: जानिए आखिर क्यों मनाई जाती है दिवाली? ये हैं 5 मान्यताएं

Sun, 27 Oct 2019 01:33 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: नवनीत राठौर Updated Sun, 27 Oct 2019 01:33 PM IST
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DIWALI 2019 Five Reasons to Why Celebrate in Deepawali
Diwali - फोटो : सोशल मीडिया

रोशनी का त्योहार दीपावली भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। भारतवर्ष में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है।इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। यह त्योहार 5 दिनों तक चलने वाला एक महापर्व है। दिवाली का त्योहार देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है। दिवाली मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं। आज हम आपको दिवाली मनाने के कारण के बारे में बताएंगे। तो आइए जानते हैं दिवाली से संबंधित 5 मान्यताओं के बारे में...

DIWALI 2019 Five Reasons to Why Celebrate in Deepawali

श्री राम जी के वनवास से अयोध्या लौटने पर
सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार दिवाली के दिन ही श्री राम जी वनवास से अयोध्या लौटे थे। मान्यता है अयोध्या वापस लौटने की खुशी में दीपावली मनाई गई थी। मंथरा की गलत विचारों से भ्रमित होकर भरत की माता कैकई ने श्री राम को उनके पिता दशरथ से वनवास भेजने के लिए वचनबद्ध कर देती है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम अपने पिता के आदेश को मानते हुए अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के लिए वनवास पर निकल गए। अपनी 14 वर्ष की वनवास पूरा करने के बाद श्री राम जी दिवाली के दिन अयोध्या वापस लौटे थे। राम जी के वापस आने की खुशी में पूरे राज्य के लोग रात में दीप जलाए थे और खुशियां मनाए थे। उसी समय से दिवाली मनाई जाती है।

DIWALI 2019 Five Reasons to Why Celebrate in Deepawali
Pandav Mahabharat - फोटो : सोशल मीडिया

पांडवों के वापस राज्य लौटने पर
हिन्दू महाग्रंथ महाभारत के अनुसार कौरवों ने शतरंज के खेल में शकुनी मामा के चाल की मदद से पांडवों का सब कुछ जीत लिया था। इसके साथ ही पांडवों को राज्य छोड़कर 13 वर्ष के वनवास पर भई जाना पड़ा। इसी कार्तिक अमवस्या को पांडव 13 वर्ष के वनवास से वापस लौटे थे। पांडवों के वापस लौटने की खुशी में राज्य के लोगों ने दिये जलाकर खुशियां मनाई थी।

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DIWALI 2019 Five Reasons to Why Celebrate in Deepawali

भगवान श्री कृष्ण के द्वारा नरकासुर राक्षस का वध करने पर
नरकासुर प्रागज्योतिषपुर नगर (जो इस समय नेपाल में है) का राजा था। उसने अपनी शक्ति से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताओं को परेशान कर दिया था। नरकासुर ने संतों आदि की 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था। जब नरकासुर का अत्याचार बढ़ गया तो देवता व ऋषिमुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए और उससे मुक्ति की गुहार लुगाई। भगवान ने उन्हें मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। इसी खुशी में लोगों ने दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को अपने घरों में दिपक जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाता है।

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DIWALI 2019 Five Reasons to Why Celebrate in Deepawali

माता लक्ष्मी का सृष्टि में अवतार
समुंद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी जी ने अवतार लिया था। लक्ष्मी जी को धन और समृद्धी की देवी माना जाता है। इसलिए इस दिन लक्ष्मी जी की विशेष पूजा होती है। दीपावली मनाने का ये भी एक मुख्य कारण है।

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