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Mental Health Tips: रात में बढ़ती ओवरथिंकिंग से कैसे पाएं राहत? जानिए एक्सपर्ट की सलाह
Wed, 05 Aug 2026 05:28 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Wed, 05 Aug 2026 05:28 PM IST
सार
Overthinking at Night: अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो बिस्तर पर लेटते ही ओवरथिंकिंग करने लगते हैं, जिस वजह से सोना मुश्किल हो जाता है तो इस लेख को आखिर तक अवश्य पढ़ें।
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रात के समय ही क्यों होती है ओवरथिंकिंग?
- फोटो : AI
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Overthinking at Night: दिनभर की भागदौड़ के बाद जब रात में हम आराम करने के लिए बिस्तर पर जाते हैं, तो कई लोगों का दिमाग अचानक तेजी से चलने लगता है। बीते हुए पल, भविष्य की चिंता, ऑफिस का काम, रिश्तों की उलझन या छोटी-छोटी बातें भी बार-बार दिमाग में घूमने लगती हैं। इस वजह से नींद आने में देरी होती है और कई लोग घंटों करवटें बदलते रहते हैं।
रात के समय ही क्यों होती है ओवरथिंकिंग?
- फोटो : AI
रात में ओवरथिंकिंग क्यों होती है?
दिनभर का तनाव रात में सामने आता है
दिनभर दिमाग काम, पढ़ाई, परिवार और अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्त रहता है। ऐसे में कई विचार और भावनाएं दब जाती हैं। जब रात में शांति होती है और बाहरी गतिविधियां कम हो जाती हैं, तो दिमाग उन अधूरे कामों, चिंताओं और यादों को प्रोसेस करने लगता है। यही कारण है कि कई लोगों को रात में ज्यादा सोचने की आदत हो जाती है।
दिनभर का तनाव रात में सामने आता है
दिनभर दिमाग काम, पढ़ाई, परिवार और अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्त रहता है। ऐसे में कई विचार और भावनाएं दब जाती हैं। जब रात में शांति होती है और बाहरी गतिविधियां कम हो जाती हैं, तो दिमाग उन अधूरे कामों, चिंताओं और यादों को प्रोसेस करने लगता है। यही कारण है कि कई लोगों को रात में ज्यादा सोचने की आदत हो जाती है।
रात के समय ही क्यों होती है ओवरथिंकिंग?
- फोटो : AI
तनाव और चिंता बढ़ जाती है
अगर कोई व्यक्ति पहले से तनाव, चिंता या किसी मानसिक दबाव से गुजर रहा है, तो रात के समय ये भावनाएं अधिक महसूस हो सकती हैं। दिमाग बार-बार एक ही स्थिति के बारे में सोचता रहता है और संभावित नतीजों की कल्पना करने लगता है। इससे ओवरथिंकिंग का चक्र शुरू हो जाता है और नींद प्रभावित होती है।
अगर कोई व्यक्ति पहले से तनाव, चिंता या किसी मानसिक दबाव से गुजर रहा है, तो रात के समय ये भावनाएं अधिक महसूस हो सकती हैं। दिमाग बार-बार एक ही स्थिति के बारे में सोचता रहता है और संभावित नतीजों की कल्पना करने लगता है। इससे ओवरथिंकिंग का चक्र शुरू हो जाता है और नींद प्रभावित होती है।
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रात के समय ही क्यों होती है ओवरथिंकिंग?
- फोटो : AI
मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल
सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का इस्तेमाल करने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी होता है। इससे दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है और विचारों की गति बढ़ सकती है।
सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का इस्तेमाल करने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी होता है। इससे दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है और विचारों की गति बढ़ सकती है।
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रात के समय ही क्यों होती है ओवरथिंकिंग?
- फोटो : AI
अनियमित नींद की आदत
अगर रोजाना सोने और उठने का समय अलग-अलग है या देर रात तक जागने की आदत है, तो शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है। इससे नींद आने में देरी होती है और व्यक्ति लंबे समय तक जागकर अलग-अलग बातों के बारे में सोचता रहता है।
अगर रोजाना सोने और उठने का समय अलग-अलग है या देर रात तक जागने की आदत है, तो शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है। इससे नींद आने में देरी होती है और व्यक्ति लंबे समय तक जागकर अलग-अलग बातों के बारे में सोचता रहता है।