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Mumbai Rain: बीएमसी ने लेप्टोस्पाइरोसिस रोग को लेकर जारी की चेतावनी, जानिए क्या है ये बीमारी और इसके खतरे

Thu, 09 Jul 2026 05:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 09 Jul 2026 05:06 PM IST
सार

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश और कई इलाकों में जलभराव के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने लोगों को लेप्टोस्पायरोसिस को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। आइए इस बीमारी के बारे में जान लेते हैं।

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BMC issued Urgent Warning of leptospirosis in mumbai amid heavy rain know its risk in hindi
मुंबई में लेप्टोस्पाइरोसिस का अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI

मुंबई में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। जगह-जगह जलजमाव और बाढ़ जैसी स्थितियों ने कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। इस बीच बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने लेप्टोस्पायरोसिस के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों के लिए हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। यह एक खतरनाक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो दूषित पानी से फैलता है। 



बीएमसी का कहना है कि बारिश और बाढ़ के कारण इस संक्रमण का खतरा काफी बढ़ गया है, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। बीमारी के लक्षण दिखने के 24-72 घंटों के भीतर डॉक्टर से सलाह लें। नगर निगम ने उन लोगों को सलाह दी है जो पानी से भरी सड़कों या जमा हुए बारिश के पानी से होकर गुजरे हैं। शरीर पर कट, घाव या मामूली खरोंच भी का भी अगर इस बैक्टीरिया से संपर्क हो जाता है तो इससे गंभीर खतरे हो सकते हैं।

पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार, बाढ़ और जमा हुए बारिश के पानी में लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो त्वचा पर लगी मामूली खरोंच से भी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। अगर खुले घाव दूषित पानी या कीचड़ के संपर्क में आते हैं, तो इन्फेक्शन का खतरा काफी बढ़ जाता है।

BMC issued Urgent Warning of leptospirosis in mumbai amid heavy rain know its risk in hindi
बाढ़-बारिश का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

लेप्टोस्पाइरोसिस होता क्या है?

लेप्टोस्पाइरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, चूहे इस संक्रमण के सबसे सामान्य वाहक माने जाते हैं । लेकिन कुत्ते, गाय, भैंस, सुअर और अन्य संक्रमित जानवरों के मूत्र से भी ये संक्रमण फैल सकता है।
 

  • दूषित पानी, गीली मिट्टी या पेशाब के संपर्क में आने  या फिर त्वचा पर कट-खरोंच हो तो बैक्टीरिया आपको संक्रमित कर सकता है।
  • अधिकांश मामलों में बीमारी हल्की होती है और फ्लू जैसी लगती है, लेकिन कुछ मरीजों में यह गंभीर रूप ले सकती है। 
  • गंभीर मामलों में किडनी फेल होने, फेफड़ों से रक्तस्राव और मेनिन्जाइटिस जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। 
BMC issued Urgent Warning of leptospirosis in mumbai amid heavy rain know its risk in hindi
मतली-उल्टी की समस्या का खतरा - फोटो : Freepik.com

बरसात के दिनों में क्यों बढ़ जाता है खतरा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसून के दौरान लेप्टोस्पाइरोसिस के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। बारिश के दौरान संक्रमित चूहों और अन्य जानवरों का मूत्र सड़कों, नालियों और जमा पानी में मिल जाता है। यही दूषित पानी संक्रमण का मुख्य कारण बनता है।

जो लोग जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजरते हैं, या पैरों-शरीर में कट या खरोंच हो तो बैक्टीरिया त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है। 


लेप्टोस्पाइरोसिस की पहचान कैसे करें?

लेप्टोस्पाइरोसिस में आमतौर पर अचानक तेज बुखार और फ्लू जैसी दिक्कतें होती हैं। यही कारण है कि कई बार इसकी पहचान में देरी हो जाती है।
 

  • बुखार के साथ  सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों के लाल होने, मतली- उल्टी का भी खतरा रहता है।
  • यदि संक्रमण गंभीर हो जाए तो इसके कारण पीलिया, सांस लेने में तकलीफ, खून की उल्टी या भ्रम की स्थिति भी हो सकती है।
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चूहों से लेप्टोस्पाइरोसिस का खतरा सबसे ज्यादा - फोटो : Freepik.com

लेप्टोस्पाइरोसिस से बचाव कैसे करें?

लेप्टोस्पाइरोसिस से बचाव के लिए दूषित पानी और जानवरों के मूत्र के संपर्क से बचना जरूरी माना जाता है। 
 

  • विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मानसून के दौरान जलभराव वाली जगहों पर नंगे पैर बिल्कुल न चलें।
  • यदि शरीर पर कट, खरोंच या घाव हो, तो उसे पूरी तरह ढककर रखें और गंदे पानी में जाने से बचें। 
  • बारिश में भीगने या जलभराव वाले क्षेत्र से लौटने के बाद साबुन और साफ पानी से हाथ-पैर अच्छी तरह धोएं।
  • पीने के लिए हमेशा साफ पानी का उपयोग करें। 


लेप्टोस्पाइरोसिस की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो एंटीबायोटिक दवाओं से इसका सफल इलाज हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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