भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना का कहर जारी है। ओमिक्रॉन जैसे नए वैरिएंट्स को लेकर किए गए अध्ययनों में इसे अति संक्रामकता वाला बताते हुए विशेषज्ञ सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं। भारत में फिलहाल बढ़ते संक्रमण के मामलों के लिए ओमिक्रॉन BA.2 के साथ BA.4 और BA.5 को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है। हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि BA.5 कुछ लोगों में गंभीर रोग और इसके कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी बढ़ा सकता है, ऐसे में कोरोना के इस खतरे को हल्के में लेने की भूल न करें।
Covid-19 Study: इस वैक्सीन का बूस्टर शॉट वायरल लोड और गंभीर रोग का खतरा कम करने में कारगर, कई वैरिएंट्स से मिलेगी सुरक्षा
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कोवाक्सिन बूस्टर शॉट से अतिरिक्त सुरक्षा
नेचर माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि कोवाक्सिन का बूस्टर डोज, सार्स-सीओवी-2 वायरस के कई प्रकारों के खिलाफ मजबूत इम्यून मेमेरी को बढ़ाने में असरदार पाया गया है। टीकाकरण के बाद कम से कम छह महीने तक भी मेमोरी बी सेल्स सक्रिय पाई गई हैं, जो संक्रमण की स्थिति में तेजी से प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करके सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है।
इसके अलावा यह वैक्सीन वायरल लोड को भी नियंत्रित करने में असरदार पाई गई है जो रोग की गंभीरता को कम करने में सहायक है।
बी औऱ टी सेल्स के बारे में क्या पता चला?
टीएचएसटीआई फरीदाबाद, एम्स नई दिल्ली, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद और एलएनजेपी हॉस्पिटल नई दिल्ली ने मिलकर इस अध्ययन को किया। इसके लिए नई दिल्ली में 97 लोगों के डेटा की जांच की गई जिन्हें दूसरी खुराक के छह महीने बाद कोवाक्सिन की टीका लगा था।
अध्ययन में पता चला है कि यह टीका मेमेरी सेल्स को प्रेरित करने में सक्षम है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि ये टीके विशिष्ट टी सेल्स के उत्पादन की क्षमता रखते हैं, जो संक्रमण की स्थिति में सुरक्षात्मक तौर पर कार्य करते हैं। टीकाकरण के छह महीने बाद तक इनकी प्रभाविकता देखी गई है।
क्या कहता है मंत्रालय
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक कोरोना के कई वैरिएंट्स वैक्सीन द्वारा उत्पन्न एंटीबॉडी प्रतिक्रियाओं को बढ़ाने में कारगर पाए गए हैं। टी सेल्स, कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूती से प्रतिक्रिया करने के लिए शरीर में मौजूद पाई गई हैं, यह राहत देने वाली बात है।
कोविड-19 के उपलब्ध सभी टीके संक्रमण की गंभीरता के जोखिम को कम करने में असरदार पाए गए हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए जिनका टीकाकरण अभी तक नहीं हो पाया है उन्हें तुरंत इसे प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
लॉन्ग कोविड को लेकर अलर्ट
वहीं एक अन्य अध्ययन में जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने बताया है कि संक्रमण की स्थिति में कुछ चीजें लॉन्ग कोविड के खतरे को बढ़ा सकती हैं, इसमें मोटापे को शीर्ष पर रखा गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मोटापे के अलावा अस्थमा जैसी अन्य पहले से मौजूद समस्याओं से परेशान लोगों में अगर कोरोना का संक्रमण हो जाता है, तो ऐसे लोगों में लॉन्ग कोविड विकसित होने का खतरा अधिक पाया गया है। इस तरह की समस्याओं से परेशान लोगों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Inactivated whole-virion vaccine BBV152/Covaxin elicits robust cellular immune memory to SARS-CoV-2 and variants of concern
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