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Covid-19 Study: इस वैक्सीन का बूस्टर शॉट वायरल लोड और गंभीर रोग का खतरा कम करने में कारगर, कई वैरिएंट्स से मिलेगी सुरक्षा

Tue, 19 Jul 2022 02:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 19 Jul 2022 02:30 PM IST
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Booster dose of Covaxin increases the concentration of neutralising antibodies, says latest covid-19 study
बूस्टर खुराक से बढ़ती है शरीर की प्रतिरक्षा - फोटो : Istock

भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना का कहर जारी है। ओमिक्रॉन जैसे नए वैरिएंट्स को लेकर किए गए अध्ययनों में इसे अति संक्रामकता वाला बताते हुए विशेषज्ञ सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं। भारत में फिलहाल बढ़ते संक्रमण के मामलों के लिए ओमिक्रॉन BA.2 के साथ BA.4 और BA.5 को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है। हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि BA.5 कुछ लोगों में गंभीर रोग और इसके कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी बढ़ा सकता है, ऐसे में कोरोना के इस खतरे को हल्के में लेने की भूल न करें।



अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि टीकाकरण गंभीर रोग और इसके कारण होने वाले खतरों से बचाने में काफी कारगर है। एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि जिन लोगों को कोवाक्सिन का बूस्टर टीका लगा है उनमें संक्रमण से बचाव की प्रतिरक्षा अधिक पाई गई है। 

कोवाक्सिन स्वदेश टीका है, भारत बायोटेक की इस वैक्सीन को कई प्रकार के वैरिएंट्स के खिलाफ सुरक्षात्मक दृष्टि से काफी असरदार पाया गया है। आइए जानते हैं कि अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने इस टीके को कितना असरदार पाया है।

Booster dose of Covaxin increases the concentration of neutralising antibodies, says latest covid-19 study
कोवाक्सिन का बूस्टर शॉट असरदार - फोटो : Pixabay

कोवाक्सिन बूस्टर शॉट से अतिरिक्त सुरक्षा

नेचर माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि कोवाक्सिन का बूस्टर डोज, सार्स-सीओवी-2 वायरस के कई प्रकारों के खिलाफ मजबूत इम्यून मेमेरी को बढ़ाने में असरदार पाया गया है।  टीकाकरण के बाद कम से कम छह महीने तक भी मेमोरी बी सेल्स सक्रिय पाई गई हैं, जो संक्रमण की स्थिति में तेजी से प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करके सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है।

इसके अलावा यह वैक्सीन वायरल लोड को भी नियंत्रित करने में असरदार पाई गई है जो  रोग की गंभीरता को कम करने में सहायक है।

Booster dose of Covaxin increases the concentration of neutralising antibodies, says latest covid-19 study
कोवाक्सिन की टीका हो सकता है असरदार - फोटो : Pixabay

बी औऱ टी सेल्स के बारे में क्या पता चला?

टीएचएसटीआई फरीदाबाद, एम्स नई दिल्ली, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद और एलएनजेपी हॉस्पिटल नई दिल्ली ने मिलकर इस अध्ययन को किया। इसके लिए नई दिल्ली में 97 लोगों के डेटा की जांच की गई जिन्हें दूसरी खुराक के छह महीने बाद कोवाक्सिन की टीका लगा था।

अध्ययन में पता चला है कि यह टीका मेमेरी सेल्स को प्रेरित करने में सक्षम है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि ये टीके विशिष्ट टी सेल्स के उत्पादन की क्षमता रखते हैं, जो संक्रमण की स्थिति में सुरक्षात्मक तौर पर कार्य करते हैं। टीकाकरण के छह महीने बाद तक इनकी प्रभाविकता देखी गई है। 

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Booster dose of Covaxin increases the concentration of neutralising antibodies, says latest covid-19 study
एंटीबॉडी प्रतिक्रियाओं को बढ़ाती है कोवाक्सिन - फोटो : iStock

क्या कहता है मंत्रालय

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक कोरोना के कई वैरिएंट्स वैक्सीन द्वारा उत्पन्न एंटीबॉडी प्रतिक्रियाओं को बढ़ाने में कारगर पाए गए हैं। टी सेल्स, कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूती से प्रतिक्रिया करने के लिए शरीर में मौजूद पाई गई हैं, यह राहत देने वाली बात है।

कोविड-19 के उपलब्ध सभी टीके संक्रमण की गंभीरता के जोखिम को कम करने में असरदार पाए गए हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए जिनका टीकाकरण अभी तक नहीं हो पाया है उन्हें तुरंत इसे प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

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Booster dose of Covaxin increases the concentration of neutralising antibodies, says latest covid-19 study
लॉन्ग कोविड के जोखिमों को जानिए - फोटो : iStock

लॉन्ग कोविड को लेकर अलर्ट

वहीं एक अन्य अध्ययन में जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने बताया है कि संक्रमण की स्थिति में कुछ चीजें लॉन्ग कोविड के खतरे को बढ़ा सकती हैं, इसमें मोटापे को शीर्ष पर रखा गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मोटापे के अलावा अस्थमा जैसी अन्य पहले से मौजूद समस्याओं से परेशान लोगों में अगर कोरोना का संक्रमण हो जाता है, तो ऐसे लोगों में लॉन्ग कोविड विकसित होने का खतरा अधिक पाया गया है। इस तरह की समस्याओं से परेशान लोगों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। 




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स्रोत और संदर्भ
Inactivated whole-virion vaccine BBV152/Covaxin elicits robust cellular immune memory to SARS-CoV-2 and variants of concern

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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