ब्रेन में ट्यूमर का नाम सुनते ही दिमाग में अजीब सा डर घर कर जाता है, कहीं ये कैंसर तो नहीं है, क्या ब्रेन ट्यूमर होने के बाद जान बच सकती है?
सेहत: ब्रेन ट्यूमर होने के बाद सामान्य जिंदगी जी सकते हैं? क्यों होती है ये समस्या और कब हो जाएं अलर्ट?
Brain Tumor Complications: ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि होने की स्थिति है। यह गैर-कैंसरकारी या कैंसरकारी दोनों हो सकता है। मरीज सामान्य जिंदगी जी पाएगा या नहीं, यह ट्यूमर के प्रकार, आकार, स्थान और इलाज पर निर्भर करता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार सिरदर्द, दौरे पड़ने या देखने-बोलने में परेशानी जैसी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।
सबा खान को 27 की उम्र में हुआ था ब्रेन ट्यूमर
हाल ही में दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की बेटी और भारतीय ज्वेलरी डिजाइनर सबा अली खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें 27 साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर हो गया था। उन्हें सिरदर्द या देखने में परेशानी जैसे कोई आम शुरुआती लक्षण भी नहीं थे। ट्यूमर का पता चलने के बाद उनके ब्रेन की सर्जरी भी हुई।
सबा बताती हैं, 27 साल की उम्र में अचानक मुझे यह समस्या हो गई। कोई चेतावनी नहीं थी, न ही आंखों से जुड़ी कोई दिक्कत थी और न ही सिरदर्द। ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे मुझे लगे कि ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। एक बार पब्लिक प्लेस में मुझे बेहोशी हो गई थी जिसके बाद हुई जांच में मुझे इस बीमारी का पता चला। एमआरआई स्कैन में उनके दिमाग के थर्ड वेंट्रिकल में एक शैडो दिखाई दी थी, जिसके आधार पर डॉक्टरों ने इस समस्या के बारे में पता लगाय।
पॉडकास्ट में शामिल न्यूरोसर्जन डॉ. मजदा टुरेल ने बताया कि इस बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समय पर पहचान और इलाज से मरीज की स्थिति को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।
क्या ब्रेन ट्यूमर के बाद सामान्य जिंदगी जी सकते हैं?
अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ आसिफ हुसैन बताते हैं, ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में कैंसर का ख्याल आता है, पर हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता।
- समय पर अगर बीमारी का पता चल जाए और इलाज हो जाए तो ज्यादा मरीज सामान्य दिनचर्या में लौट सकते हैं। कुछ मामलों में इलाज के लिए सर्जरी, रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी की जरूरत हो सकती, जबकि कुछ धीमी गति से बढ़ने वाले ट्यूमर में डॉक्टर नियमित जांच के जरिए निगरानी करने की सलाह देते हैं।
- बिना कैंसर वाले ट्यूमर कई मामलों में धीरे बढ़ते हैं, लेकिन मस्तिष्क पर दबाव डालने के कारण गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं।
- वहीं कैंसरकारी ट्यूमर के इलाज और ठीक होने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि ट्यूमर किस प्रकार और ग्रेड का है। इसी के आधार पर उपचार निर्भर करता है।
ज्यादातर मामलों में इलाज के बाद मरीज काम, पढ़ाई और सामान्य गतिविधियां कर सकते हैं। कुछ को याददाश्त, बोलने, चलने या थकान से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं हालांकि इसे भी सहायक उपचार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।
ब्रेन ट्यूमर होता क्यों है?
डॉक्टर बताते हैं, ब्रेन ट्यूमर तब होता है, जब मस्तिष्क या उसके आसपास की कोशिकाओं में बदलाव होने के कारण वे असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। हालांकि, ज्यादातर मरीजों में इसका सटीक कारण पता नहीं चलता।
- कोशिकाओं के डीएनए में होने वाले बदलाव ट्यूमर का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
- जिन लोगों का रेडिएशन से अक्सर संपर्क रहता है,उनमें ब्रेन ट्यूमर का जोखिम बढ़ सकता है।
- जिन लोगों के पारिवार में पहले से किसी को ब्रेन ट्यूमर रहा हो उनमें आनुवंशिक रूप से ट्यूमर होने का खतरा हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपके बहुत तेज सिरदर्द की समस्या होती रहती है, बार-बार उल्टी हो रही है, दौरा पड़ने या बेहोशी की भी दिक्कत है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
देखने, सुनने, बोलने, शरीर का संतुलन बनाने या शरीर के किसी हिस्से कमजोरी जैसी स्थितियों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की जरूरत होती है। इन स्थितियों में तुरंत आपातकालीन मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।