साल 2019-20 से शुरू हुई कोरोना महामारी कब तक जारी रहेगी, ये समस्या कब खत्म होगी, फिलहाल विशेषज्ञों के पास भी इसका कोई जवाब नहीं है। समय-समय पर वायरस में म्यूटेशन के साथ नए वैरिएंट के मामले बढ़ने लगते हैं। पिछले करीब एक महीने से भी यही स्थिति देखी जा रही है। एशिया-अमेरिका के कई हिस्सों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण संक्रमण बढ़ रहा है। भारत में भी जैसी स्थिति बनी हुई है वो चिंता बढ़ा रही है।
Covid-19: कोरोना का कोई भी वैरिएंट हो, इस उपाय से दूर होता है संक्रमण और मौत का खतरा; अध्ययन में दावा
Covid-19: स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। ज्यादातर लोग की या तो वैक्सीनेशन से या फिर प्राकृतिक संक्रमण से वायरस से मुकाबले की क्षमता मजबूत बनी हुई है। टीकाकरण ने बड़ी संख्या में लोगों की मौतों को भी टाला है।
वैक्सीन से टाला बड़ी संख्या मे मौंतों का खतरा
पिछले सप्ताह प्रकाशित एक विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने बताया कि टीकाकरण ने किस प्रकार से बड़ी संख्या में लोगों की मौतों को टाला है। शोधकर्ताओं ने कहा, बेल्जियम में कोविड-19 वैक्सीनेशन ने 2021 से 2023 के बीच 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में 12,806 मौतों को टाला है।
जनवरी 2021 से बेल्जियम के लोगों के लिए टीके उपलब्ध हैं। यह मृत्यु दर में 54% की कमी दर्शाता है।
सभी वैरिएंट्स पर असरदार हैं टीके
वैज्ञानिकों ने कहा, जिस समय डेल्टा जैसे खतरनाक और जानलेवा वैरिएंट का प्रकोप देखा जा रहा था, उसमें वैक्सीनेशन ने 68% मौतें टालीं। टीकों ने अल्फा वैरिएंट की अवधि के दौरान 31% और ओमिक्रॉन के दौरान 54% मौतों के खतरे को कम किया।
इस आधार पर अध्ययन के लेखकों ने निष्कर्ष निकाला है कि डेल्टा और ओमिक्रॉन वैरिएंट्स से संक्रमण के दौरान मृत्युदर को कम करने में टीकाकरण प्रभावी रहा। वैक्सीन, कोरोना के सभी वैरिएंट्स के कारण होने वाले संक्रमण और मौत के मामलों के कम करने में असरदार है। ये भविष्य में भी कोरोना के खतरों को कम करने का भी सबसे प्रभावी तरीका है।
अपडेटेड वैक्सीन से मिल सकती है अतिरिक्त सुरक्षा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं किसी अन्य वायरस की तरह कोरोना से बचाव के लिए भी टीकाकरण ही सबसे प्रभावी तरीका रहा है जो आपके शरीर में प्रभावी एंटीबॉडी बनाकर संक्रमण के गंभीर जोखिमों से बचाने में मदद करता है।
जो लोग तीनों टीके ले चुके हैं, उनमें कोरोना से बचाव के लिए पर्याप्त एंटीबॉडीज हैं, समय के साथ इनका प्रभाव जरूर कम हो सकता है पर एंटीबॉडी की मेमेरी सेल्स कोरोना का पहचान करके आपको गंभीर जोखिमों से बचाए रखने में मददगार हैं।
ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने कई अपडेटेड टीके भी तैयार कर लिए हैं। ये टीके नए वैरिएंट्स को लक्षित करके बनाए गए हैं।
दो नए टीकों को मिली है मंजूरी
चूंकि एक बार फिर से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, इसी बीच यूएस फूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने दो नई अपडेटेड वैक्सीन को मंजरी दे दी है। माना जा रहा है कि ये टीके नए वैरिएंट्स के खिलाफ भी लोगों को सुरक्षा देने में मददगार हो सकते हैं।
- पहला मॉडर्ना की एम.नेक्सस्पाइक वैक्सीन है इसे 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को दिया जा सकेगा। ये टीके 12 से 64 वर्ष की आयु के लोगों को भी दिए जा सकते हैं, अगर उनमें कोई कोमोरबिडिटी जैसे अंतर्निहित जोखिम हैं।
- दूसरा नोवावैक्स के एक नए टीके नुवैक्सोविड को भी मंजूरी मिली है। इसे भी 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों या फिर कोमोरबिडिटी के शिकार अन्य लोगों को दिया जा सकता है। इन टीकों की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
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स्रोत
Averted mortality by COVID-19 vaccination in Belgium between 2021 and 2023
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