कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ने को हृदय रोगों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। हार्ट हेल्थ के बारे में जानने के लिए जब आप लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराते हैं तो क्या उसमें ट्राइग्लिसराइड्स लेवल बढ़ा हुआ आता है? अगर हां तो इसे अनदेखा करने की भूल न करें। ट्राइग्लिसराइड्स आगे चलकर दिल की बीमारी, स्ट्रोक, फैटी लिवर और यहां तक कि पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
Triglyceride Risk: कहीं आपके खून में भी तो नहीं बढ़ गया है फैट? जानिए बिना टेस्ट के कैसे करें पता
ट्राइग्लिसराइड्स रक्त में मौजूद वसा (फैट) का एक प्रकार हैं। जब हम जरूरत से अधिक कैलोरी वाली चीजें खाते हैं तो इसका खतरा बढ़ जाता है। कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं?
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पहले जानिए ट्राइग्लिसराइड्स होता क्या है?
ट्राइग्लिसराइड्स खून में मौजूद एक तरह का फैट है। जब हम जरूरत से ज्यादा हाई कैलोरी वाली चीजें तो खून में इसकी मात्रा बढ़ने लगती है।
- शरीर अतिरिक्त ऊर्जा को ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में जमा कर लेता है। बाद में जरूरत पड़ने पर यही फैट ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल होता है।
- ट्राइग्लिसराइड्स शरीर के लिए जरूरी हैं, लेकिन इनकी अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है।
- लंबे समय तक इसका स्तर बढ़ा रहने पर धमनियों में फैट जमा होने लगता है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने के लक्षणों को न करें इग्नोर
हाई ट्राइग्लिसराइड्स अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ते हैं, फिर भी कुछ संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। मोटापा के शिकार लोगों, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान करने वाले और शारीरिक रूप से कम मेहनत करने वालों में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है।
आइए जानते हैं कि किन लक्षणों पर हमें अलर्ट हो जाना चाहिए?
- यदि ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बहुत ज्यादा (500 mg/dL या उससे अधिक) हो जाए, तो इससे पैंक्रियाटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण पेट के ऊपरी हिस्से में अचानक और तेज दर्द होता है, जो पीठ तक फैल सकता है। दर्द के साथ मतली, उल्टी, बुखार और भूख कम लगने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
सीने में दर्द की समस्या
- हाई ट्राइग्लिसराइड्स रक्त वाहिकाओं में फैट जमा होने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकते हैं। समय के साथ यह धमनियों को संकरा कर देता है, जिससे हृदय तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। इससे सीने में दर्द, सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना, जल्दी थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
त्वचा असर असर
- जब खून में ट्राइग्लिसराइड्स बहुत बढ़ जाते हैं, तो शरीर त्वचा के नीचे अतिरिक्त फैट जमा करने लगता है। इसके कारण कोहनी, घुटनों, हाथों, पैरों या पीठ पर छोटे-छोटे पीले या नारंगी रंग के उभरे हुए दाने या गांठें दिखाई दे सकती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।