वैश्विक स्तर पर बढ़ती क्रॉनिक बीमारियां स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर हो या दिल की बीमारियां और कैंसर सभी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापा ज्यादातर क्रॉनिक बीमारियां की जड़ हो सकती है।
GLP-1 Drug: डायबिटीज-मोटापे की 'चमत्कारी दवा' को लेकर सरकार सख्त, डॉक्टर ने बताई जरूरी बातें
जीएलपी-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं का एक ऐसा समूह है जो ब्लड शुगर और भूख को नियंत्रित करने को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक हार्मोन की तरह काम करता है। इससे लोग कम खाते हैं और वजन में कमी आती है। इसके इस्तेमाल को लेकर अब सरकार ने सख्ती दिखाई है।
जीएलपी-1 की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर सरकार सख्त
जीएलपी-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं का एक ऐसा समूह है जो ब्लड शुगर और भूख को नियंत्रित करने को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक हार्मोन की तरह काम करता है। इससे लोग कम खाते हैं और वजन में कमी आती है। हृदय स्वास्थ्य में सुधार में भी इसके प्रभाव देखे गए हैं।
अब इसके इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार (24 मार्च) को बताया कि भारत का ड्रग्स कंट्रोलर, GLP-1 की अवैध बिक्री और प्रचार के खिलाफ अपनी रेगुलेटरी निगरानी को और तेज कर रहा है। इसका उद्देश्य ड्रग सप्लाई चेन में नैतिक फार्मास्युटिकल प्रथाओं को सुनिश्चित करना है।
बिना परमिशन के इस दवा को बेचने से रोकने के लिए नियम सख्त किए जा रहे हैं, साथ ही गलत तरीके से विज्ञापन करने को रोका जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की सेहत का ख्याल रखने के लिए भी ये निगरानी जरूरी है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
#WATCH | Delhi: Dr Saptarshi Bhattacharya, Senior Consultant Endocrinology, Indraprastha Apollo Hospitals, says, "Recently, the Govt of India and DCGI (Drugs Controller General of India) have issued a warning over the use of GLP-1. E-medicines are available in India for the past… pic.twitter.com/ikDTRDDu9R
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आजकल देखा जा रहा है कि जीएलपी-1 को कई समस्याओं को तेजी से ठीक करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा है। सरकार ने इसपर स्पष्ट किया है कि इन दवाओं को डायबिटीज और वेट लॉस के लिए क्विव फिक्स दवा के रूप में प्रयोग में नहीं लाया जाना चाहिए।
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजी, डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य कहते हैं, GLP-1 और GIP पर आधारित इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉलिक्यूल वैसे तो अच्छे हैं, इनकी वैज्ञानिक सुरक्षा और असरदार होने की बात भी साबित हो चुकी है। लेकिन इनका इस्तेमाल डॉक्टरों की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञ की सलाह पर ही लेनी चाहिए दवा
डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य कहते हैं, इस दवा के इस्तेमाल को लेकर सावधानी जरूरी है।
- किसी भी लाइफस्टाइल सेंटर या मेडिकल स्टोर से लेकर इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
- इसे या तो किसी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (जो हार्मोन्स के विशेषज्ञ होते हैं) या फिर इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर द्वारा ही लिखा जाना चाहिए।
- अगर कोई डॉक्टर GLP-1 लिख रहा है, तो उसके पास कम से कम एम मेडिसिन की डिग्री होनी चाहिए, वरना, वह व्यक्ति GLP-1 लिखने के लिए योग्य नहीं माना जाएगा।
यह बात बहुत जरूरी है, क्योंकि इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जिनकी निगरानी सिर्फ विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकते हैं। इसके मॉलिक्यूल फायदेमंद तो हैं लेकिन इनका इस्तेमाल किसी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या फिर एमडी इंटरनल मेडिसिन की डिग्री रखने वाले किसी डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। खुद से या बिना विशेषज्ञ की सलाह के ये दवा लेना आपके लिए फायदे की जगह दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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