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GLP-1 Drug: डायबिटीज-मोटापे की 'चमत्कारी दवा' को लेकर सरकार सख्त, डॉक्टर ने बताई जरूरी बातें

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 26 Mar 2026 08:13 PM IST
सार

जीएलपी-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं का एक ऐसा समूह है जो ब्लड शुगर और भूख को नियंत्रित करने को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक हार्मोन की तरह काम करता है। इससे लोग कम खाते हैं और वजन में कमी आती है। इसके इस्तेमाल को लेकर अब सरकार ने सख्ती दिखाई है।

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GLP-1 weight loss diabetes medicine regulation Doctor says Should not be used as quick fix drug
वेट लॉस की दवाओं को लेकर सरकार सख्त - फोटो : Freepik.com

वैश्विक स्तर पर बढ़ती क्रॉनिक बीमारियां स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर हो या दिल की बीमारियां और कैंसर सभी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापा ज्यादातर क्रॉनिक बीमारियां की जड़ हो सकती है।



मोटापा और डायबिटीज के इलाज के लिए बीते वर्षों में GLP-1 ड्रग को लेकर खूब चर्चा रही है। वैसे तो मुख्यरूप से ये दवा डायबिटीज के इलाज के लिए बनाई गई थी, हालांकि मोटापा कम करने में इसके फायदों को देखते हुए वेट लॉस के लिए भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। 

GLP-1 दवा को वेट लॉस में जितना फायदेमंद साबित होने का दावा किया जा रहा है, इसके साइड-इफेक्ट्स उससे कहीं अधिक चिंताजनक हैं। अमर उजाला में पिछले साल 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने पहले ही अलर्ट किया था कि ये दवा कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। GLP-1 दवाओं से जुड़े कई मामलों में लोगों में पैंक्रियाटाइटिस की शिकायत देखी गई थी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब इस दवा के सावधानी से इस्तेमाल को लेकर अलर्ट कर रहे हैं। अगर आप भी वेट लॉस के लिए  GLP-1 दवा ले रहे हैं या फिर प्लान कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए।


(मोटापे की टेंशन होगी दूर, वैज्ञानिकों को अजगर के खून में मिला 'वेट लॉस का सीक्रेट')

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जीएलपी-1 दवा के इस्तेमाल को लेकर सरकार सख्त - फोटो : Adobe Stock

जीएलपी-1 की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर सरकार सख्त

जीएलपी-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं का एक ऐसा समूह है जो ब्लड शुगर और भूख को नियंत्रित करने को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक हार्मोन की तरह काम करता है। इससे लोग कम खाते हैं और वजन में कमी आती है। हृदय स्वास्थ्य में सुधार में भी इसके प्रभाव देखे गए हैं।

अब इसके इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार (24 मार्च) को बताया कि भारत का ड्रग्स कंट्रोलर, GLP-1 की अवैध बिक्री और प्रचार के खिलाफ अपनी रेगुलेटरी निगरानी को और तेज कर रहा है। इसका उद्देश्य ड्रग सप्लाई चेन में नैतिक फार्मास्युटिकल प्रथाओं को सुनिश्चित करना है।

बिना परमिशन के इस दवा को बेचने से रोकने के लिए नियम सख्त किए जा रहे हैं, साथ ही गलत तरीके से विज्ञापन करने को रोका जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की सेहत का ख्याल रखने के लिए भी ये निगरानी जरूरी है।

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जीएलपी-1 दवा के इस्तेमाल को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आजकल देखा जा रहा है कि जीएलपी-1 को कई समस्याओं को तेजी से ठीक करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा रहा है। सरकार ने इसपर स्पष्ट किया है कि इन दवाओं को डायबिटीज और वेट लॉस के लिए क्विव फिक्स दवा के रूप में प्रयोग में नहीं लाया जाना चाहिए। 

 



इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजी, डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य कहते हैं, GLP-1 और GIP पर आधारित इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉलिक्यूल वैसे तो अच्छे हैं, इनकी वैज्ञानिक सुरक्षा और असरदार होने की बात भी साबित हो चुकी है। लेकिन इनका इस्तेमाल डॉक्टरों की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। 

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विशेषज्ञ की सलाह पर ही ली जानी चाहिए GLP-1 दवा - फोटो : Freepik

विशेषज्ञ की सलाह पर ही लेनी चाहिए दवा
 
डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य कहते हैं, इस दवा के इस्तेमाल को लेकर सावधानी जरूरी है।
 

  • किसी भी लाइफस्टाइल सेंटर या मेडिकल स्टोर से लेकर इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
  • इसे या तो किसी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (जो हार्मोन्स के विशेषज्ञ होते हैं) या फिर इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर द्वारा ही लिखा जाना चाहिए। 
  • अगर कोई डॉक्टर GLP-1 लिख रहा है, तो उसके पास कम से कम एम मेडिसिन की डिग्री होनी चाहिए, वरना, वह व्यक्ति GLP-1 लिखने के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। 


यह बात बहुत जरूरी है, क्योंकि इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जिनकी निगरानी सिर्फ विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकते हैं। इसके मॉलिक्यूल फायदेमंद तो हैं लेकिन इनका इस्तेमाल किसी एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या फिर एमडी इंटरनल मेडिसिन की डिग्री रखने वाले किसी डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाना चाहिए। खुद से या बिना विशेषज्ञ की सलाह के ये दवा लेना आपके लिए फायदे की जगह दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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