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Summer Problems: गर्मी में शरीर के संकेतों को न करें इग्नोर, जानिए क्या है हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक में अंतर

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 21 Apr 2026 04:30 PM IST
सार

गर्मियों में बढ़ते तापमान के साथ शरीर पर गर्मी का असर भी तेजी से दिखने लगता है। ऐसे में अक्सर लोग हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक  को एक ही समझ लेते हैं, जबकि ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं और इनकी गंभीरता भी अलग होती है। सही समय पर पहचान और इलाज बहुत जरूरी है, क्योंकि हीट स्ट्रोक जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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हीट स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

देश इन दिनों गर्मी के प्रकोप में है। पारा 40 के आस-पास बना हुआ है। डॉक्टर कहते हैं कि बढ़ती गर्मी में हल्की सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। गर्मी के दिनों में अक्सर दो स्वास्थ्य समस्याओं की सबसे ज्यादा चर्चा होती है वह है- हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक।



अप्रैल में ही बढ़ती गर्मी आने वाले महीनों, मई-जून के लिए अलर्ट कर रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पहले से ही क्रॉनिक बीमारियों के शिकार लोगों के लिए ये कई तरह की मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है। दिन में ज्यादा समय तक धूप में रहने से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किन लोगों में लू लगने का खतरा ज्यादा होता है?

कहीं आप भी तो  हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक को एक ही तो नहीं मानते आ रहे हैं, ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। आइए इसके बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।

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गर्मी के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

शरीर खुद को करता रहता है ठंडा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारे शरीर का मैकेनिज्म ऐसा है कि वह खुद को गर्मी से बचाए रखने के लिए काम करता रहता है। तापमान बढ़ने की स्थिति में शरीर पसीने का उत्पादन बढ़ाकर खुद को ठंडा करता है। हालांकि जब गर्मी और नमी का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है, तो यह सिस्टम फेल होने लगता है। ऐसे में पहले हीट एग्जॉशन होता है।

हीट एग्जॉशन को स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक चेतावनी की तरह मानते हैं। अगर इस स्थिति को नजरअंदाज किया जाए तो यह हीट स्ट्रोक में बदल सकता है, जिसे जानलेवा तक माना जाता है। आइए इन दोनों में अंतर समझ लेते हैं।


पहले हीट एग्जॉशन के बारे में जान लीजिए

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हीट एग्जॉशन तब होता है, जब आपके शरीर से पसीने के रूप में ज्यादा मात्रा में पानी और नमक निकल जाता है।
 

  • इससे शरीर कमजोर होने लगता है और तापमान नियंत्रित करने की क्षमता में दिक्कत आ जाती है।
  • ये गर्मी से जुड़ी एक शुरुआती स्थिति होती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। 
  • अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, मतली जैसी स्थितियां हीट  एग्जॉशन का संकेत हो सकती हैं। 
  • कई बार व्यक्ति को बेहोशी जैसा महसूस भी हो सकता है। यह स्थिति आमतौर पर लंबे समय तक धूप में रहने या पर्याप्त पानी न पीने से होती है।
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लू लगने का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

अब हीट स्ट्रोक के बारे में जान लीजिए

हीट एग्जॉशन की ही तरह हीट स्ट्रोक भी गर्मी से जुड़ी समस्या है, लेकिन यह गंभीर और जानलेवा हो सकती है। 
 

  • हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर के तापमान नियंत्रण करने की क्षमता पूरी तरह फेल हो जाती है और शरीर का तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा पहुंच जाता है।
  • हीट स्ट्रोक के कारण पसीना आना बंद हो जाता है और त्वचा ड्राई और गर्म हो जाती है। 
  • तेज बुखार, भ्रम, दिल की धड़कन तेज होने, सांस लेने में दिक्कत होने और बेहोशी जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। 
  • यह एक मेडिकल इमरजेंसी है इसमें अगर तुरंत इलाज न मिले तो स्थिति गंभीर तक हो सकती है।
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हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन - फोटो : Adobe Stock

हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक में क्या अंतर है?

हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के बीच सबसे बड़ा अंतर इसकी गंभीरता और शरीर के तापमान में है। 

हीट एग्जॉशन को आमतौर पर चेतावनी माना जाता है, जबकि हीट स्ट्रोक एक आपातकालीन स्थिति है। हीट एग्जॉशन में शरीर पसीना निकालता रहता है, जबकि हीट स्ट्रोक में पसीना बंद हो सकता है। इन दोनों स्थितियों से बचने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना, दिनभर में पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स वाली चीजों का सेवन सबसे जरूरी है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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