बरसात का मौसम आते ही देशभर में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। हर साल डेंगू-मलेरिया, चिकनगुनिया के हजारों मामले सामने आते हैं, गंभीर स्थितियों में कई लोगों की मौत भी हो जाती है। डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का अब तक कोई पुख्ता इलाज भी नहीं है।
Mosquito Diseases: क्या गो मूत्र से ठीक होगा चिकनगुनिया? आईआईटी रुड़की के दावे ने खींचा लोगों का ध्यान
Chikungunya Treatment: आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि आयुर्वेदिक गो मूत्र अर्क में ऐसे प्राकृतिक तत्व मिले हैं, जिन्होंने प्रयोगशाला में चिकनगुनिया वायरस के खिलाफ कारगर असर दिखाया। अर्क ने वायरल लोड को 90 प्रतिशत से अधिक कम किया।
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गो मूत्र से चिकनगुनिया का इलाज
आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर शैली तोमर और उनकी टीम ने ये अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन आयुर्वेद से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी की मदद से परखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- गो मूत्र अर्क ने लैब परीक्षणों में वायरल लोड यानी शरीर या सैंपल में मौजूद वायरस की संख्या को 90% से अधिक कम किया।
IIT Roorkee researchers have identified key bioactive compounds in Ayurvedic Cow Urine Distillate (Gau Mutra Ark), demonstrating significant antiviral activity against the Chikungunya virus.
— IIT Roorkee (@iitroorkee) June 20, 2026
Led by Prof. Shailly Tomar and her team from the Department of Biosciences and… pic.twitter.com/vdDMYrjLTw
गौरतलब है कि भारत में समय-समय पर मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां, खासकर चिकनगुनिया लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनती हैं। अभी तक चिकनगुनिया के लिए कोई ऐसी दवा उपलब्ध नहीं है जो सीधे इस वायरस को खत्म कर सके। इसी वजह से वैज्ञानिक नए इलाज खोजने के लिए आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भी अध्ययन कर रहे हैं।
चिकनगुनिया और इसका खतरा
चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है जो चिकनगुनिया वायरस से संक्रमित मच्छरों से इंसानों में फैलती है। एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस जैसे मच्छरों को इस बीमारी का प्रमुख कारण माना जाता है।
- चिकनगुनिया का संक्रमण तब होता है जब वायरस से संक्रमित मच्छर किसी इंसान को काटता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में शारीरिक संपर्क या लार से नहीं फैलता।
- इस वायरस से संक्रमित लोगों को बुखार के साथ और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण होते हैं, जो गंभीर हो सकते हैं।
- चिकनगुनिया के इलाज के लिए कोई खास दवा नहीं है। इलाज में रोगी के लक्षणों को मैनेज करने पर ध्यान दिया जाता है।
- ज्यादातर लोग लगभग हफ्तेभर में बीमारी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों को जोड़ों में लंबे समय तक दर्द रह सकता है।
ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक बने रहते हैं लक्षण
चिकनगुनिया बीमारी में मरीजों को तेज बुखार, जोड़ों-मांसपेशियों में असहनीय दर्द, सिरदर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मरीजों को ठीक होने के बाद भी जोड़ों का दर्द कई हफ्तों या महीनों तक बना रह सकता है।
- फिलहाल इस बीमारी के लिए कोई एंटीवायरल दवा नहीं है। चिकनगुनिया होने पर इसके लक्षणों जैसे बुखार, दर्द और अन्य लक्षणों को ठीक करने के लिए दवाएं दी जाती हैं।
- ऐसे में यदि प्राकृतिक स्रोतों से ऐसे तत्व मिलते हैं जो वायरस के खिलाफ प्रभावी हों, तो भविष्य में नई दवाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है।
आईआईटी रुड़की की टीम का कहना है कि यह शोध दिखाता है कि आयुर्वेद में बताए गए पारंपरिक पदार्थों का आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से परीक्षण किया जा सकता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि उनमें मौजूद कौन से रासायनिक तत्व वास्तव में उपयोगी हो सकते हैं। हाालंकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल प्रयोगशाला स्तर पर किया गया है, इंसानों पर नहीं।
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स्रोत:
IIT Roorkee Scientists Identify Antiviral Compounds in Ayurvedic Cow Urine Distillate Against Chikungunya virus: Ancient Ayurvedic Remedy Meets Modern Virology
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