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Vitiligo: चेहरे-हाथों पर हो गए हैं सफेद दाग? क्या छूने से फैलती है ये समस्या, आसान भाषा में समझिए

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 22 Jun 2026 07:01 PM IST
सार

विटिलिगो एक  त्वचा संबंधी स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मेलानोसाइट्स पर अटैक कर देती है। मेलानोसाइट्स वही कोशिकाएं हैं जो मेलेनिन बनाकर त्वचा, बालों और कुछ हद तक आंखों को रंग देती हैं। 

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सफेद दाग की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

आपने भी अपने आस-पास त्वचा पर सफेद दाग वाले लोगों को देखा होगा। इसे लेकर हमारे समाज में कई तरह का भ्रम और अंधविश्वास देखा जाता रहा है। अक्सर लोग इसे फंगल इंफेक्शन या छूने से फैलने वाली बीमारी समझ लेते हैं। पर मेडिकल साइंस इस तरह की किसी भी सोच से बचने की सलाह देता है। 



त्वचा पर सफेद दाग की समस्या को विटिलिगो कहा जाता है। यह ऐसी समस्या है जिसमें त्वचा को रंग देने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। नतीजतन त्वचा के कुछ हिस्सों में सफेद रंग के पैच दिखाई देने लगते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, विटिलिगो न तो संक्रामक है और न ही साथ बैठने, साथ में खाना खाने या हाथ मिलाने से फैलता है। इसके बावजूद समाज में इससे जुड़े कई भ्रम और मिथक आज भी मौजूद हैं, जो मरीजों पर मानसिक और सामाजिक दबाव बढ़ा सकते हैं। आइए जान लेते हैं कि ये समस्या होती क्यों है?

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सफेद दाग की समस्या - फोटो : Freepik.com

सफेद दाग क्या है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, विटिलिगो एक त्वचा संबंधी स्थिति है। इसे ऑटोइम्यून विकार माना जाता है। ऑटोइम्यून रोगों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है।
 

  • जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मेलानोसाइट्स पर अटैक कर देती है, तब इससे सफेद दाग की समस्या होती है। 
  • मेलानोसाइट्स वही कोशिकाएं हैं जो मेलेनिन बनाकर त्वचा, बालों और कुछ हद तक आंखों को रंग देती हैं। 
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सफेद दाग क्यों होते हैं? - फोटो : Freepik.com

क्यों होती है ये समस्या?

विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या किसी भी उम्र में शुरू हो सकती है। विटिलिगो के लिए आनुवंशिक कारणों, प्रतिरक्षा तंत्र में गड़बड़ी और कुछ पर्यावरणीय कारकों को जिम्मेदार माना जाता है।
 

  • ये दिक्कत होती क्यों है इसे समझा नहीं जा सका है। हालांकि कई रिपोर्ट्स में इसे ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया के कारण होने वाली समस्या माना जाता है। 
  • इसके अलावा आनुवंशिक प्रवृत्ति, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, त्वचा पर गंभीर चोट, कुछ रसायनों के संपर्क और दुर्लभ मामलों में अन्य जैविक कारक भी भूमिका निभा सकते हैं। 
  • सफेद दाग वाले लगभग 20% से 30% लोगों के किसी करीबी रिश्तेदार को पहले से यह बीमारी होती है। 



 किन लोगों को अधिक खतरा हो सकता है?

कुछ ऑटोइम्यून रोगों जैसे थायरॉयड विकार, टाइप-1 डायबिटीज या एलोपेसिया एरियाटा वाले लोगों में भी इसका जोखिम अधिक देखा गया है। हालांकि अधिकांश लोगों में कोई स्पष्ट जोखिम कारक नहीं मिलता। 

शुरुआत में हाथ, चेहरा, होंठों के आसपास, आंखों के पास, पैरों, उंगलियों, कोहनी या घुटनों पर छोटे सफेद धब्बे दिखाई दे सकते हैं।  समय के साथ ये बड़े हो सकते हैं या आपस में मिल सकते हैं। कुछ लोगों के बाल, दाढ़ी या भौंह के हिस्से भी सफेद होने लगते हैं। 

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विटिलिगो से कैसे बचें? - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या यह छूने से फैलती है?

विटिलिगो पूरी तरह गैर-संक्रामक स्थिति है। यह हाथ मिलाने, साथ खाने, कपड़े साझा करने, खून, हवा या सामान्य संपर्क से नहीं फैलती। इसके बावजूद कई लोग सामाजिक मिथकों के कारण मरीजों से दूरी बना लेते हैं।
 

  • सफेद दाग की समस्या को उपचार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। इनमें दवाइयां, टॉपिकल क्रीम, फोटोथेरेपी जैसे उपायों का इस्तेमाल किया जाता है। 
  • यदि त्वचा पर बिना दर्द वाले सफेद धब्बे तेजी से बढ़ रहे हों, चेहरे या हाथों पर नए पैच बनने लगें, बाल सफेद होने लगें तो तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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