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Lancet Study: सिर्फ बीमारियां ही नहीं, शरीर की ये तीन कमियां भी घटा सकती हैं आपकी उम्र

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 14 May 2026 06:04 PM IST
सार

द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन ने खुलासा किया है कि जो बुजुर्ग मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं, शारीरिक रूप से हल्के-फुल्के काम करते रहते हैं और पोषक तत्वों का सेवन करते हैं, उनके लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना कहीं ज्यादा होती है।
 

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लंबी उम्र का कनेक्शन - फोटो : Amarujala.com/AI

उम्र बढ़ने के साथ शरीर कमजोर होने लग जाता है, इस समय विशेष देखभाल और पोषण की आवश्यकता होती है। लेकिन क्या आप  जानते हैं कि किसी बुजुर्ग की लंबी उम्र सिर्फ दवाइयों पर नहीं, बल्कि उनके तेज दिमाग, अच्छे पोषण और चलने-फिरने की क्षमता पर भी निर्भर करती है?



हाल ही में सामने आए एक बड़े शोध ने इसी सोच को नई दिशा दी है। द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन ने खुलासा किया है कि जो बुजुर्ग मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं, शारीरिक रूप से हल्के-फुल्के काम करते रहते हैं और पोषक तत्वों का सेवन करते हैं, उनके लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना कहीं ज्यादा होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के कई देश जहां बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, वहां सिर्फ बीमारी का इलाज काफी नहीं होगा। उम्रदराज लोगों की संपूर्ण कार्यक्षमता और संतुलित पोषण जरूरी है।

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बुजुर्गों को कैसे स्वस्थ रखें - फोटो : Freepik.com

लंबी आयु पाने के तरीके

द लैंसेट में छपे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत में जिन बुजुर्गों की मानसिक क्षमता बेहतर है, पोषण अच्छा है और चलने-फिरने की ताकत ठीक है, उनके लंबे वक्त तक जीवित रहने की संभावना अधिक होती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ट्रस्ट और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स ससेक्स के शोधकर्ता ने अध्ययन के दौरान ये नतीजे निकाले हैं।
 

  • बुजुर्गों आबादी की स्वास्थ्य योजनाएं बनाते वक्त केवल बीमारियों पर ही नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता पर भी ध्यान देना जरूरी है। 
  • ये अध्ययन भारत में वृद्धावस्था अध्ययन के आंकड़ों पर आधारित था।
  • इसमें 60 साल या उससे अधिक उम्र के 4,096 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इनमें से अध्ययन के अंत तक 951 बुजुर्गों की मौत हो गई।
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बुजुर्गों की सेहत - फोटो : Freepik.com

शारीरिक क्षमता महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों की टीम ने कहा कि अब तक आंतरिक क्षमता पर ज्यादातर शोध अमीर देशों में हुए थे। भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर बहुत कम शोध हुआ है। यदि बुजुर्गों की जांच केवल बीमारियों तक सीमित न रखकर उनकी आंतरिक क्षमता पर भी की जाए, तो कमजोरी और विकलांगता के शुरुआती संकेत समय रहते पहचाने जा सकते हैं।

इससे समय पर देखभाल और उपचार संभव होगा, जो तेजी से बुजुर्ग होती भारतीय आबादी के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

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लंबी उम्र पाने के क्या तरीके हैं? - फोटो : Freepik.com

शारीरिक क्षमता जितनी कमजोर, मौत का खतरा उतना ही अधिक

शोधकर्ताओं ने सोचने की क्षमता, मनोदशा, पोषण, चलने-फिरने की क्षमता, दृष्टि और सुनने की क्षमता का मूल्यांकन किया। 

अध्ययन में देखा गया कि आंतरिक क्षमता के जितने अधिक क्षेत्र कमजोर होते गए मौत का खतरा भी उतना ही बढ़ता गया। एक क्षमता प्रभावित होने पर मृत्यु का खतरा 48 फीसदी, दो पर 110 फीसदी, तीन पर 171 फीसदी और चार क्षमताओं के प्रभावित होने पर यह खतरा 215 फीसदी तक बढ़ गया।

इन सभी कारकों में सोचने की क्षमता, पोषण और शरीर की गतिशीलता सबसे मजबूत जीवन-रक्षक कारक साबित हुए। शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन बुजुर्गों का दिमाग तेज, पोषण अच्छा और शरीर सक्रिय था, उनके लंबे वक्त तक जिंदा रहने की संभावना काफी अधिक थी।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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