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Health Tips: नींद नहीं आती और शरीर में बना रहता है दर्द? कहीं आपमें इस पोषक तत्व की कमी तो नहीं

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 13 Oct 2025 08:22 PM IST
सार

  • गड़बड़ लाइफस्टाइल और खानपान में पोषक तत्वों की कमी के कारण अधिकांश लोगों में मैग्नीशियम की कमी देखी जा रही है। समय रहते अगर इसके लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए तो आपकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।     

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कमजोरी और नींद न आने की समस्या - फोटो : Freepik.com

शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखना चाहते हैं तो सबसे जरूरी है कि खानपान में कम उम्र से ही सुधार कर लें। जिन लोगों का आहार ठीक नहीं रहता है उनमें पाचन में गड़बड़ी से लेकर कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। 



जब भी बात खानपान में सुधार की होती है तो हम अक्सर विटामिन, प्रोटीन और मिनरल्स की बात तो करते हैं, लेकिन शरीर के सही विकास और सुचारू कार्य के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे मैग्नीशियम के महत्व को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि यही तत्व शरीर के अंदर सैकड़ों बायोकेमिकल प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।

अध्ययनों से पता चलता है कि मैग्नीशियम हमारे शरीर की कई क्रियाओं जैसे हड्डियों को मजबूत रखने, मांसपेशियों के सही कार्य, नसों के सिग्नल, ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने और हार्टबीट को सामान्य बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यदि शरीर में इसकी कमी हो जाए तो थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, अनिद्रा जैसी कई दिक्कतें हो सकती हैं।

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मैग्नीशियम वाली चीजों को आहार में करें शामिल - फोटो : Adobe Stock

मैग्नीशियम की कमी बढ़ा सकती है दिक्कतें

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, गड़बड़ लाइफस्टाइल और खानपान में पोषक तत्वों की कमी के कारण अधिकांश लोगों में मैग्नीशियम की कमी देखी जा रही है। समय रहते अगर इसके लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए तो आपकी दिक्कतें और भी बढ़ सकती हैं।   

आइए जानते हैं कि मैग्नीशियम क्यों इतना जरूरी माना जाता है और इसकी कमी से कौन-कौन सी दिक्कतें हो सकती हैं?

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पी.बी.मिश्रा कहते हैं, मैग्नीशियम हमारे शरीर के लिए एक बेहद जरूरी खनिज है। इसकी कमी से शरीर में अनेक समस्याएं हो सकती हैं। मैग्नीशियम मांसपेशियों को दुरुस्त रखने, हृदय गति को स्थिर रखने, हड्डियों को मजबूत बनाने, रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने और ऊर्जा के उत्पादन में मदद करता है।

शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने पर मांसपेशी में ऐंठन, दिल की अनियमित धड़कन, थकान, उच्च रक्तचाप, अवसाद, चिंता और नींद से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। अगर स्थिति गंभीर हो जाए तो दौरे भी पड़ सकते हैं।

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खान पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com

आहार में सुधार करना जरूरी

डॉ मिश्रा कहते हैं, मैग्नीशियम के लिए फलियां, हरी सब्जियां, बादाम, चिया एवं कद्दू के बीज, ब्राउन राइस, केला और एवोकाडो को आहार में शामिल कर सकते हैं। अधिक कमी होने पर चिकित्सक से सलाह लें।

मैग्नीशियम की कमी कैल्शियम और पोटैशियम के स्तर को भी प्रभावित कर सकती है। शरीर का लगभग 60 प्रतिशत मैग्नीशियम हड्डियों में जमा होता है। मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन-डी के साथ मिलकर हड्डियों को स्वस्थ बनाकर ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करता है। हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम का सेवन करना चाहिए।

मैग्नीशियम मस्तिष्क के कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में मैग्नीशियम का कम स्तर तनाव, चिंता और अवसाद का कारण बन सकता है।

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नींद न आने की समस्याओं का कारण - फोटो : Freepik.com

थकान और नींद की बढ़ती समस्याएं

मैग्नीशियम शरीर में ऊर्जा बनाने वाली प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इसकी कमी होने पर शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती है यही कारण है कि जिन लोगों में इस पोषक तत्व की कमी होती है उनमें थकान, सुस्ती और कमजोरी की समस्या अधिक महसूस होती है। भले ही आप पर्याप्त नींद लें या पौष्टिक भोजन खाएं, लेकिन अगर शरीर में मैग्नीशियम की मात्रा कम है तो एनर्जी लेवल कम ही महसूस होता है।

मैग्नीशियम को नेचुरल रिलैक्सर भी कहा जाता है क्योंकि यह मस्तिष्क में उन न्यूरोट्रांसमीटर को सक्रिय करता है, जो नींद और शांति बनाए रखने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इसकी कमी  होने पर अनिद्रा, चिंता, बेचैनी और तनाव बढ़ने लगती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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