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Health Tips: प्रेग्नेंसी की कर रही हैं प्लानिंग? विशेषज्ञों के बताए डाइट से बढ़ेगी गर्भधारण की संभावना

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 11 Nov 2025 05:16 PM IST
सार

भारतीय आबादी में भी बांझपन बढ़ती हुई समस्या है, जिसके कारण 27 मिलियन (2.7 करोड़) से अधिक कपल्स को प्रभावित देखा जा रहा है। अगर आप भी प्रेग्नेंसी का प्लान कर रही हैं तो विशेषज्ञों की टीम ने लाइफस्टाइल और डाइट प्लान में बदलाव करने की सलाह दी है। 

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गर्भधारण करने में मददगार हो सकता है डाइट चेंज - फोटो : Freepik.com

लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को बढ़ा दिया है। कुछ दशकों पहले की तुलना में कम उम्र में हृदय रोग, डायबिटीज सहित कई प्रकार की बीमारियों का जोखिम बढ़ता देखा जा रहा है, इसके साथ ही अब गर्भधारण में भी काफी कठिनाई आ रही है। यही कारण है कि हाल के वर्षो में कृत्रिम गर्भधारण यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) का चलन तेजी से बढ़ गया है। 



पहले जहां महिलाएं बिना किसी दिक्कत के गर्भधारण कर लेती थीं, वहीं अब कई जोड़ों को वर्षों तक इलाज कराना पड़ता है। शोध बताते हैं कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बदलता लाइफस्टाइल, तनाव, प्रदूषण और गलत खान-पान की आदतें हैं। अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी और जंक फूड का सेवन महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) पर गहरा असर डाल रही है।

भारतीय आबादी में भी बांझपन बढ़ती हुई समस्या है, जिसके कारण 27 मिलियन (2.7 करोड़) से अधिक कपल्स को प्रभावित देखा जा रहा है। अगर आप भी प्रेग्नेंसी का प्लान कर रही हैं तो विशेषज्ञों की टीम ने लाइफस्टाइल और डाइट प्लान में बदलाव करने की सलाह दी है। आइए जानते हैं कि किस डाइट प्लान को इसके लिए फायदेमंद पाया गया है?

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आईवीएफ और गर्भावस्था - फोटो : Freepik.com

डाइट में बदलाव से मिल सकती है प्रेग्नेंसी में मदद

अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि वायु प्रदूषण, कीटनाशक रसायनों और प्लास्टिक के उपयोग से शरीर में हार्मोनल असंतुलन बढ़ रहा है, जिससे ओव्यूलेशन और स्पर्म क्वालिटी दोनों प्रभावित होते हैं। इसके अलावा देर से शादी करना और मातृत्व को टालना भी गर्भावस्था में आ रही दिक्कतों का अहम कारण बन गया है। ऐसे लोगों को डाइट में बदलाव से मदद मिल सकती है।

जब गर्भधारण के कोशिशों की बात आती है, तो इसकी संभावनाओं को बढ़ाने के लिए कई सुझाव और तरकीबों की खूब चर्चा होती है। एक विशेषज्ञ के अनुसार, आईवीएफ प्रक्रिया से गुजर रही महिलाओं को सप्लीमेंट्स का सहारा लेने के बजाय, गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए मेडिटेरेनियन डाइट अपनाने से लाभ मिल सकता है। ये गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद करती है। 

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पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com

मेडिटेरेनियन डाइट से गर्भावस्था में लाभ

वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी में प्रजनन विशेषज्ञ, प्रोफेसर रोजर हार्ट ने आईवीएफ की सफलता में सुधार लाने के लिए मेडिटेरेनियन डाइट से होने वाले फायदों की समीक्षा की। विशेषज्ञों ने पाया कि इस प्रकार के डाइट में भरपूर मात्रा में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, मेवे और ऑलिव ऑयल को शामिल किया जाता है, इससे आईवीएफ से गुजर रही महिलाओं को गर्भधारण में काफी मदद मिल सकती है।

भ्रूण के विकास और गर्भावस्था की संभावना दोनों में इससे लाभ मिल सकते हैं। इन डाइट प्लान में विटामिन बी, एंटीऑक्सीडेंट, ओमेगा-3 पॉली-अनसेचुरेटेड फैटी एसिड और फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं जबकि इनमें संतृप्त वसा, शर्करा और सोडियम कम होते हैं जिससे गर्भावस्था की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ संपूर्ण स्वास्थ्य संबंधित लाभ भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

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मेडिटेरेनियन डाइट से होने वाले लाभ - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

प्रोफसर हार्ट कहते हैं, किसी भी प्रकार के सप्लीमेंट्स लेने की तुलना में ये डाइट प्लान आपके संपर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे हृदय रोग-डायबिटीज के जोखिम भी कम होते हैं जिसके जोखिम आमतौर पर गर्भावस्था के दिनों में बढ़ जाते हैं। 

इससे पहले के कुछ अध्ययनों में डीएचईए (हार्मोनल सप्लीमेंट्स) के भी कुछ लाभ की चर्चा होती रही है पर डाइट में सुधार करने से आपको बेहतर लाभ मिल सकते हैं।

इससे पहले अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से साइंस की मदद से 19 साल से नि:संतान जोड़े की जिंदगी में खुशियां लौटी थीं। वैज्ञानिकों की एक टीम ने एआई की मदद से दुनिया की पहले सफल प्रेग्नेंसी की जानकारी साझा की थी, जिससे कई नि: संतान जोड़ों को नई उम्मीद मिली थी। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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स्रोत
Effect of Adherence to Mediterranean Diet during Pregnancy on Children’s Health: A Systematic Review

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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