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Fever Symptoms: हर बुखार डेंगू नहीं, चिकनगुनिया और डेंगू के बीच का फर्क समझिए आसान भाषा में

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 11 Apr 2026 05:51 PM IST
सार

 चिकनगुनिया और डेंगू दोनों ही मच्छर से फैलने वाली बीमारियां हैं, लेकिन अक्सर लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं। असल में ये दोनों अलग-अलग वायरस से होने वाली बीमारियां हैं और इनके लक्षण भी थोड़े अलग होते हैं। 

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डेंगू बुखार का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

जून-जुलाई से लेकर अक्तूबर तक देशभर में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। ये बरसात और इसके बाद के महीने होते हैं जिसमें मच्छरों का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है, लिहाजा डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। ये बीमारियां अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ा देती हैं। 



बरसात के महीनों में घर के कोनों में जमा पानी, कूलर की टंकी, गमलों और छत पर पड़े खराब सामानों में इकट्ठा होने वाला पानी मच्छरों के बढ़ने लिए सबसे उपयुक्त होता है। हर साल जैसे ही मानसून दस्तक देता है, अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, बदन दर्द और कमजोरी से परेशान मरीजों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं। डेंगू और चिकनगुनिया दो ऐसी बीमारियां हैं जिसके बारे में सबसे ज्यादा चर्चा होती है।

कहीं आप भी तो इन दोनों समस्याओं को एक तो नहीं मानते आ रहे हैं?

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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com

डेंगू और चिकनगुनिया का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डेंगू और चिकनगुनिया ऐसी मच्छर जनित बीमारियां हैं जो शुरुआत में तो बिल्कुल सामान्य वायरल फीवर जैसी लगती हैं, लेकिन समय रहते पहचान न हो तो इसका शरीर पर कई तरह से नकारात्मक असर हो सकता है।
 

  • डेंगू में तेज बुखार के साथ प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं, जिससे हालत गंभीर हो सकती है।
  • वहीं चिकनगुनिया का सबसे ज्यादा असर जोड़ों पर पड़ता है और मरीज हफ्तों तक दर्द से परेशान रह सकता है। 


सबसे चिंता की बात ये है कि लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छरों से होने वाली बीमारियों को हल्के में लेना बड़ी गलती साबित हो सकती है। इसलिए इसके लक्षणों की समय रहते पहचान और इलाज जरूरी है।

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डेंगू-चिकनगुनिया का खतरा - फोटो : Freepik.com

डेंगू के बारे में जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं,  चिकनगुनिया और डेंगू दोनों ही मच्छरों से फैलती तो हैं इनके लक्षण भी थोड़े अलग होते हैं।

डेंगू एक वायरल बीमारी है। इसमें अचानक तेज बुखार आता है, जो 102 से 104 डिग्री तक जा सकता है। 
 

  • इसके साथ सिर में तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में बहुत ज्यादा दर्द और कमजोरी महसूस होती है। 
  • कई लोगों के शरीर पर लाल चकत्ते भी दिखने लगते हैं। 
  • कुछ मामलों में उल्टी, जी मिचलाना और भूख न लगने की दिक्कत भी होती है। 
  • डेंगू की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं, जिससे शरीर कमजोर हो सकता है और गंभीर स्थिति में ब्लीडिंग का खतरा भी रहता है।



चिकनगुनिया का खतरा

डेंगू की ही तरह चिकनगुनिया में भी अचानक तेज बुखार आता है, लेकिन इसमें जोड़ों में तेज दर्द रहता है। यह दर्द इतना ज्यादा हो सकता है कि मरीज को चलने-फिरने में भी परेशानी हो जाती है। 
 

  • हाथ, पैर, घुटने और टखनों में सूजन और अकड़न हो सकती है। 
  • कई लोगों को थकान, सिर दर्द, उल्टी और हल्के दाने भी हो जाते हैं। 
  • चिकनगुनिया में बुखार ठीक होने के बाद भी जोड़ों का दर्द हफ्तों या महीनों तक रह सकता है, जो इसे डेंगू से अलग बनाता है।
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मच्छरों से कैसे करें बचाव - फोटो : Freepik.com

कैसे करें इन बीमारियों से बचाव

डॉक्टर कहते हैं,  दोनों बीमारियों से बचाव का तरीका लगभग एक जैसा है। मच्छरों से बचना सबसे जरूरी है। इसके लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि वहीं मच्छर पैदा होते हैं। 
 

  • कूलर, गमले, टायर और बाल्टी में पानी न रुकने दें। 
  • सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और दिन में भी शरीर को ढककर रखें, क्योंकि ये मच्छर दिन में ज्यादा काटते हैं। 
  • मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल भी मदद करता है।


मच्छर जनित रोगों के कारण होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है। ज्यादा से ज्यादा पानी, नारियल पानी और ओआरएस लें ताकि शरीर में कमजोरी न आए। डेंगू में पपीते के पत्तों का रस और हल्का खाना अक्सर लोग इस्तेमाल करते हैं, जबकि चिकनगुनिया में हल्दी वाला दूध और गर्म सिकाई जोड़ों के दर्द में राहत देती है। 

अगर बुखार लगातार 2-3 दिन से ज्यादा रहे, शरीर में बहुत ज्यादा दर्द हो, उल्टी बार-बार हो या खून निकलने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खुद से, एआई या इंटरनेट से देखकर दवा लेना या बीमारी को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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