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Parkinson's Risk: हरदम कांपते रहते हैं हाथ-पैर, आपको पार्किंसंस रोग तो नहीं? जानिए इस रोग के बारे में सबकुछ

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 11 Apr 2026 04:19 PM IST
सार

World Parkinson's Day 2026: पार्किंसंस रोग दिमाग से जुड़ी ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क धीरे-धीरे डोपामिन नामक केमिकल बनाना कम कर देता है। यही डोपामिन शरीर की मूवमेंट को नियंत्रित करने में मदद करता है।

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पार्किंसन रोग का बढ़ता जा रहा है खतरा - फोटो : Amarujala.com

क्या आपके भी आसपास कोई ऐसा है जिसके हाथ-पैर अक्सर कांपते रहते हैं? आमतौर पर इसे बढ़ती उम्र का असर मानकर अनदेखा कर दिया जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि कुछ स्थितियों में ये पार्किंसंस रोग जैसे न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत तक हो सकता है। 



हाथ-पैर कांपने पर कंट्रोल न होने, शरीर के धीरे-धीरे सुस्त पड़ने और सामान्य काम-काज में दिक्कत होते रहने को केवल कमजोरी मानकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। ये पार्किंसंस जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

पहले ये समस्याएं केवल बुजुर्गों की मानी जाती थीं हालांकि कई रिपोर्ट्स में इसे युवाओं में भी बढ़ता बताया जा रहा है। कहीं आप भी तो पार्किंसंस रोग का शिकार नहीं हैं?

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हाथ-पैर कांपते रहना पार्किंसंस रोग का संकेत - फोटो : Adobe Stock

पार्किंसंस रोग के बारे में जान लीजिए

पार्किंसंस रोग तंत्रिका तंत्र से जुड़ा ऐसा विकार है जो समय के साथ और बढ़ता जाता है। तंत्रिका तंत्र ही शरीर में होने वाली हर हलचल को कंट्रोल करती हैं, इसलिए तंत्रिकाओं में होने वाली किसी भी समस्या का असर शरीर के सामान्य कामकाज पर पड़ सकता है।
 

  • पार्किंसंस रोग में कंपन होना आम है, लेकिन इस विकार के कारण कुछ लोगों को शरीर में अकड़न, गतिविधियों में  धीमापन और संतुलन से संबंधित दिक्कतें भी हो सकती हैं।
  • पार्किंसंस रोग वालों के गिरने का खतरा भी ज्यादा होता है, जिससे ज्यादा उम्र के लोगों में फ्रैक्चर होने की समस्या बढ़ जाती है।
  • चिंताजनक बात ये है कि अब तक इस रोग का कोई इलाज भी नहीं है, सिर्फ इसके लक्षणों को ठीक करने के लिए दवाएं और थेरेपी दी जाती हैं।
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ब्रेन और तंत्रिकाओं से संबंधित दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock

क्यों होती है ये दिक्कत?

मस्तिष्क में न्यूरॉन्स नामक तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति इस रोग का कारण बनती है। इसके अलावा मस्तिष्क में डोपामाइन नामक न्यूरोट्रांसमीटर की कमी भी इस रोग को बढ़ाने वाली हो सकती है। 
 

  • डोपामाइन की कमी से मस्तिष्क के काम करने का तरीका अनियमित हो जाता है।
  • इससे चलने-फिरने में समस्या होने के साथ कई अन्य तरीके की दिक्कतें भी होती रहती हैं।
  • पार्किंसंस रोग से पीड़ित लोगों में नॉरएपिनेफ्रिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर की भी कमी देखी जाती है, जो रक्तचाप जैसे कई शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है। 


हालांकि पार्किंसंस रोग असल में होता क्यों है इसे अभी तक अच्छे से समझा नहीं जा सका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीन और कुछ तरह के पर्यावरणीय कारक जैसे विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से इसका खतरा हो सकता है।

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पार्किंसंस हो जाए तो क्या करें? - फोटो : Adobe Stock Photo

कैसे जानें किसी को पार्किंसंस रोग तो नहीं?

पार्किंसंस मुख्यरूप से नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर है जिसमें मोटर और नॉन-मोटर लक्षण दिखते हैं। इसके मुख्य लक्षणों में कंपकंपी, यहां तक कि आराम करते समय भी हाथ-पैर कांपते रहने की दिकक्त हो सकती है।
 

  • कई लोगों की मांसपेशियों में अकड़न और पोस्चर में गड़बड़ी भी हो सकती है।
  • सूंघने की क्षमता में कमी, नींद में गड़बड़ी और पोस्चर की दिक्कत भी ऐसे लोगों में ज्यादा देखी जाती रही है। 



क्या इस रोग से बचा जा सकता है?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पार्किंसंस रोग से बचाव का कोई तरीका नहीं है। हालांकि आप नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखने के लिए लाइफस्टाइल और खान-पान को ठीक करके जरूर लाभ पा सकते हैं। 

पार्किंसंस रोग का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन समय पर पहचान और सही उपचार से इसके कारण होने वाली दिक्कतों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अगर शरीर में लगातार कंपन, मूवमेंट स्लो होने या संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें महसूस हों तो इसे सामान्य समझने की गलती न करें।

कई बार हाथों का मामूली कांपना बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। समय पर डॉक्टरी सलाह की मदद से आप इसके जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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