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Health Alert: बच्चों की ये एक आदत बढ़ा रही कई जानलेवा बीमारियों का खतरा, आपका बच्चा भी तो नहीं है खतरे में?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 10 Apr 2026 08:28 PM IST
सार

बच्चों में जंक फूड्स की आदत बढ़ती जा रही है। इसमें मौजूद ज्यादा नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट न सिर्फ उनकी शारीरिक सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उनके मानसिक विकास पर भी असर डालते हैं। 

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Health Impact of Junk Food on Kids risk of obesity and chronic disease increasing
कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं है खतरा में - फोटो : Amarujala.com

लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। केवल बुजुर्ग या फिर युवा ही नहीं बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पिछले एक दशक में बच्चों का खानपान काफी तेजी से बदला है। बच्चों की प्लेट से दाल-चावल और सब्जियों की जगह पिज्जा, बर्गर और जंक फूड्स की मात्रा काफी बढ़ गई है।



स्कूल का टिफिन हो या लंच-डिनर बच्चे जंक फूड्स को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। माता-पिता की व्यस्त जिंदगी ने फास्ट फूड को और आसान विकल्प बना दिया है। पर ये आदत असल में सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीवन के जिस समय में सबसे ज्यादा पोषक की जरूरत होती है, उसमें जंक फूड्स का डाइट में शामिल होना काफी चिंताजनक है। यही कारण है कि कम उम्र में ही मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी जानलेवा समस्याएं काफी बढ़ती जा रही हैं। बच्चों को क्रॉनिक बीमारियों के चंगुल से बचाने के लिए जंक फूड्स से बचाना सबसे जरूरी है। कहीं आपका बच्चा भी तो ज्यादा जंक फूड्स नहीं खा रहा है?

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Health Impact of Junk Food on Kids risk of obesity and chronic disease increasing
बच्चों में जंक फूड्स की आदत - फोटो : Adobe stock photos

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चे जंक फूड्स का आदी होते जा रहे हैं। जंक फूड में मौजूद ज्यादा नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट न सिर्फ उनकी शारीरिक सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उनके मानसिक विकास पर भी असर डालते हैं। 

बच्चों में क्यों बढ़ रही है जंक फूड्स की आदत

बच्चों में ये आदत क्यों तेजी से बढ़ती जा रही है? इसको लेकर एक हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों और किशोर जंक फूड के विज्ञापन दिखकर दिनभर में औसतन 130 कैलोरी ज्यादा खा रहे हैं। 

यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल में हुए इस अध्ययन में पाया गया कि  हाई फैट, सॉल्ट और शुगर (एचएफएसएस) वाले फूड के विज्ञापन सिर्फ 5 मिनट तक देखने के बाद 7 से 15 साल के बच्चे दिनभर में दो ब्रेड स्लाइस के बराबर कैलोरी ज्यादा खा लेते हैं। यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी में ये अध्ययन प्रकाशित है। 

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गड़बड़ खानपान की दिक्कत औऱ बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com

अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन 240 बच्चों को शामिल किया गया, जिन्हें चार तरह के मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पांच-पांच मिनट के विज्ञापन दिखाए गए। इनमें टीवी जैसे वीडियो, सोशल मीडिया की इमेज पोस्ट, रेडियो जैसे ऑडियो और बिलबोर्ड जैसे स्टैटिक फॉर्मेट शामिल थे।
 

  • रिपोर्ट में सामने आया कि जिन बच्चों ने जंक फूड के विज्ञापन देखे, उन्होंने स्नैक्स में औसतन 58 और लंच में 72 कैलोरी ज्यादा खाईं। 
  • कुल मिलाकर उन्होंने 130 कैलोरी ज्यादा लीं, जबकि नॉन-फूड विज्ञापन देखने वाले बच्चों में यह नहीं देखा गया।


प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर एमा बॉयलैंड कहती हैं, इस अध्ययन से पता चलता है कि फूड मार्केटिंग बच्चों की खाने की आदतों को कैसे प्रभावित करती है। सिर्फ कुछ मिनटों की एक्सपोजर से ही बच्चे ज्यादा खाने लगते हैं, जो लंबे समय में वजन बढ़ने का कारण बन सकता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) ज्यादा था, उन्होंने और भी ज्यादा कैलोरी खपत की। हर एक यूनिट बीएमआई बढ़ने पर बच्चे ने औसतन 17 कैलोरी ज्यादा खाईं।

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भारतीय बच्चों में मोटापे का खतरा - फोटो : Amarujala.com

बच्चों में तेजी से बढ़ता जा रहा है मोटापा

बच्चों में मोटापे की समस्या वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती जा रही है, जो कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों की जड़ मानी जाती है। भारतीय आबादी में इसका खतरा और भी ज्यादा है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन के हवाले से हमने जानकारी दी थी कि भारत में बचपन के मोटापे के मामले 2040 तक बढ़कर 56 मिलियन तक पहुंचने की आशंका है, जो 2025 की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि है। मोटापे के शिकार बच्चों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से लेकर कैंसर तक का खतरा अधिक हो सकता है। जंक फूड्स और शारीरिक गतिविधियों में कमी मोटापे का प्रमुख कारण है। 



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स्रोत:
Childhood obesity is rising


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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