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खतरा: रूस की लाइब्रेरी से लीक हुआ कोरोना से भी खतरनाक वायरस? एक की मौत, सैकड़ों क्वारंटीन; जानिए विस्तार से

Mon, 05 Oct 2026 02:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 05 Oct 2026 02:32 PM IST
सार

रूस के साइबेरिया में प्लेग पर रिसर्च करने वाले संस्थान की 28 वर्षीय महिला कर्मचारी की अज्ञात संक्रमण से मौत के बाद हड़कंप मच गया है। अस्पताल में क्वारंटीन और मरीजों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। 

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Mysterious Death in Siberia Sparks Plague Concerns hundreds of people in quarantine
रूस की लैब में लीक हुआ वायरस? - फोटो : Amarujala.com/AI

कोरोना का संक्रमण कैसे फैला था, क्या यह वायरस मानव निर्मित था और चीन के किसी लैब से लीक हुआ था? ये अब तक रहस्य बना हुआ है। इस बीच रूप रूस  से सामने आ रही खबर फिर से दुनियाभर के विशेषज्ञों लिए चिंता बढ़ाती जा रही है।



साइबेरिया की एक लैब में काम करने वाली 28 वर्षीय लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा की अचानक मौत ने गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक महिला जिस संस्थान में काम करती थी, वहां प्लेग जैसी बेहद गंभीर संक्रामक बीमारियों पर रिसर्च होता है।

बीते दिनों महिला को अज्ञात कारणों से निमोनिया की बीमारी हुई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल के एक हिस्से को क्वारंटीन कर दिया गया और कई विभागों में मरीजों की भर्ती और छुट्टी रोक दी गई। सबसे ज्यादा चिंता इसलिए बढ़ी क्योंकि एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्लेग  को महिला की मौत की संभावित वजह बताई।

इस पूरे मामले का सबसे विवादित हिस्सा एक टूटी हुई टेस्ट ट्यूब से जुड़ा है। स्वतंत्र रूसी समाचार संगठन ल्यूदी बैकाल ल्यूदी ने रिपोर्ट किया कि 25 सितंबर को शिपिलोवा के हाथ से प्लेग पैदा करने वाला बैक्टीरिया रखने वाली टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। इससे संक्रमण फैलने की आशंका जताई गई। तो क्या रूस की लैब से कोरोना से कई गुना खतरनाक वायरस लीक हो गया है?

Mysterious Death in Siberia Sparks Plague Concerns hundreds of people in quarantine
संक्रमण को लेकर सख्य निगरानी - फोटो : Adobe Stock Photos

टेस्ट ट्यूब से लीक हुआ वायरस?
 
फिलहाल टेस्ट ट्यूब वाले एंगल को खारिज करते हुए रूस की केंद्रीय स्वास्थ्य एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर ने कहा है कि संस्थान में रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों से जुड़ी ऐसी कोई लैब दुर्घटना हुई ही नहीं थी। इसलिए टेस्ट ट्यूब टूटने और किसी खतरनाक संक्रमण के संपर्क में आने वाली बात की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

अधिकारियों के मुताबिक महिला को हुई बीमारी का कारण फिलहाल “अज्ञात” है। महिला के शरीर से लिए गए सैंपल में ऐसे किसी सूक्ष्मजीव की पहचान नहीं हुई, जिसका संबंध उसके लैब में किए जाने वाले काम से हो।

फिलहाल इस घटना को 10 दिनों से ज्यादा का समय बीत गया है। पिछले 10 दिनों में संस्थान के कर्मचारियों के बीच किसी संक्रामक बीमारी का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। 
 

  • महिला के हाल के संपर्क में आए सभी लोगों की जांच और मेडिकल निगरानी की जा रही है।
  • कुछ गैर-आधिकारिक रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि करीब 200 लोगों को क्वारंटीन में रखा गया है। 
  • एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट की वेबसाइट के मुताबिक, यहां करीब 95 शोधकर्ता काम करते हैं। यह साइबेरिया और रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों में गंभीर बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों की निगरानी, रोकथाम और बीमारी फैलने की स्थिति में नियंत्रण के लिए काम करने वाला प्रमुख शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान है।
Mysterious Death in Siberia Sparks Plague Concerns hundreds of people in quarantine
न्यूमोनिक प्लेग की आशंका - फोटो : adobe stock images

गौरतलब है कि प्लेग एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो यर्सिनिया पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से होती है। इससे न्यूमोनिक प्लेग का खतरा हो सकता है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स के जरिए इसके एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैलने का खतरा हो सकता है। प्लेग को अध्ययनों में कोरोना से भी कई गुना खतरनाक बताया गया है।

अमेरिका भी रख रहा है स्थिति पर नजर

अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने रविवार को बताया कि अमेरिका रूस में न्यूमोनिक प्लेग से संभावित मौत की खबर से चिंतित है। अमेरिका, रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र यानी सीडीसी और दूसरी सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले से जुड़ी कई जानकारियों की अभी पुष्टि नहीं हुई है और रूस के अधिकारियों से सटीक जानकारी जल्द और खुले तौर पर साझा करने की अपील की गई है।

सीडीसी के मुताबिक, न्यूमोनिक प्लेग से संक्रमित व्यक्ति में बुखार, सिरदर्द और शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके बाद फेफड़ों में तेजी से निमोनिया विकसित हो सकता है। इसमें सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और खांसी हो सकती है। कुछ मरीजों में खांसी के साथ खून या पानी जैसा बलगम भी निकल सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, प्लेग गंभीर बीमारी है और इससे मौत का खतरा काफी अधिक हो सकता है। हालांकि, इसका इलाज संभव है। सही समय पर एंटीबायोटिक दवाएं देने और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरूरी सावधानियां बरतने से मरीजों का इलाज किया जा सकता है।

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संक्रमण के पूरे मामले को समझिए - फोटो : Adobe Stock

10 प्वाइंट्स में समझिए पूरा मामला
 

  • पूरा मामला पूर्वी साइबेरिया के इरकुत्स्क के पास स्थित शेलेखोव शहर का है। यहां इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एक कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार पड़ गई और उसकी मौत हो गई। इसके बाद अधिकारियों ने उन लोगों की पहचान शुरू की, जो महिला के संपर्क में आए थे। इन लोगों को क्वारंटीन किया गया है। 
  • रोस्पोट्रेबनादजोर ने महिला की बीमारी को अज्ञात कारण वाला निमोनिया बताया है। मरीज से लिए गए सैंपल की विस्तृत जांच भी की गई। इसमें ऐसे सूक्ष्मजीव नहीं मिले।
  • चिंता खास तौर पर न्यूमोनिक प्लेग को लेकर है, क्योंकि शिपिलोवा की मौत गंभीर निमोनिया के बाद हुई थी। न्यूमोनिक प्लेग यर्सिनिया पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से होता है और सीधे फेफड़ों को प्रभावित करता है।
  • इस बीमारी में संक्रमित व्यक्ति के सांस लेने, खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
  • अधिकारियों का कहना है कि निगरानी में रखे गए लोगों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं मिले हैं। ये सभी एहतियाती कदम हैं।
  • स्वतंत्र रूसी समाचार संगठन ल्यूदी बैकाल की रिपोर्ट के मुताबिक, इरकुत्स्क सिटी क्लिनिकल हॉस्पिटल में लोगों की आवाजाही और मरीजों के आने-जाने पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
  • शेलेखोव स्थित इरकुत्स्क एल्युमिनियम प्लांट ने 3 अक्तूबर से अपने कर्मचारियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है।
  • शुरुआती रिपोर्टों और अधिकारियों के बयानों में भी एकरूपता नहीं थी। कुछ स्थानीय रिपोर्टों और अधिकारियों ने महिला की मौत को प्लेग से जोड़कर बताया। बाद में आधिकारिक स्वास्थ्य जानकारी में बीमारी को अज्ञात कारण वाला निमोनिया कहा गया।



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स्रोत: 
Researcher at Russian plague laboratory dies of ‘unknown’ infection


अस्वीकरण: ये रिपोर्ट पीटीआई की कॉपी के आधार पर तैयार की गई है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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