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Covid-19: कोरोना के सिम्टोमेटिक मामले एक लाख के पार, संक्रमित होते हुए भी पहचान न हो पाना बड़ी चिंता

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 05 Sep 2023 01:51 PM IST
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one lakh symptomatic COVID cases detected in the UK, long COVID-19 might be going unidentified
कोरोना के नए वैरिएंट्स का खतरा - फोटो : iStock

कोरोना का वैश्विक जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है। यूनाटइटेड किंगडम में पिछले कुछ महीनों में कोरोना के मामले और इसके कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है। जो कोविड ऐप द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में इस समय लगभग 1.15 मिलियन लोग कोरोनोवायरस से संक्रमित हैं, यह लगभग 58 में एक मरीज के बराबर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैश्विक स्तर पर इन दिनों कोरोना के BA.2.86 वैरिएंट (पिरोला) के मामले फैल रहे हैं। 



एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त-सितंबर के महीने में पूरी दुनिया में कोरोना के नए वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामले बढ़े हैं। एरिस ( EG.5.1) और पिरोला (BA.2.86) वैरिएंट से संक्रमण और मरने वाले दोनों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। अकेले अगस्त से सितंबर के बीच में 50 हजार से अधिक रोगियों के मामले बढ़े हैं, ये निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली समस्या हो सकती है।

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नए वैरिएंट्स के कारण होने वाली समस्या - फोटो : PTI

अगस्त-सितंबर में बढ़े कोरोना के मामले

दो सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक नए वैरिएंट्स के कारण 93,432 संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए हैं, ये सिम्टोमेटिक मामले हैं, जिसका अर्थ है रोगियों में कोई न कोई लक्षण बने हुए थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि बहुत से लोग ऐसे हैं जो संक्रमित तो हैं पर इसमें लक्षण न होने के कारण पहचान नहीं हो पा रही है।

नए वैरिएंट्स में म्यूटेशन के कारण इसकी संक्रामकता और प्रतिरक्षा को चकमा देने की क्षमता अधिक देखी जा रही है, जो चिंताकारक है। 

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कोरोना के कारण लॉन्ग कोविड का जोखिम - फोटो : iStock

अध्ययन में क्या पता चला?

न्यूरोइम्यूनोलॉजी और न्यूरोइन्फ्लेमेशन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के साथ लॉन्ग कोविड एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम है, लेकिन इससे प्रभावित बड़ी संख्या में रोगियों की पहचान नहीं हो पा रही है क्योंकि प्रारंभिक चरणों में ऐसे लोगों में संक्रमण का पता ही नहीं चल पाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 103 मिलियन से अधिक अमेरिकी लोगों को कोविड-19 रह चुका था और उनमें से लगभग एक तिहाई में लॉन्ग कोविड के बारे में पता चला। यह संख्या और अधिक हो सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं जिन्हें पता ही नहीं है कि वह संक्रमण का शिकार रह चुके हैं।

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नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के बढ़ते मामले - फोटो : Pixabay

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर इगोर कोरलनिक कहते हैं, हमारा अनुमान है कि अमेरिका में महामारी के पहले वर्ष में लगभग 10 मिलियन लोग संक्रमण की चपेट में आए थे,  जिन्हें लॉन्ग कोविड भी हुआ, लेकिन उनका कोविड टेस्ट निगेटिव था।

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में नैदानिक महामारी विशेषज्ञ  ज़ियाद अल-अली कहते हैं, यह अध्ययन इस तरफ संकेत करता है कि जिन लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या रही है, उनको विशेष इलाज की आवश्यकता है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि वह एक समय में कोरोना से संक्रमित रहे ही हों। 



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स्रोत और संदर्भ
SARS-CoV-2–Specific Immune Responses in Patients With Postviral Syndrome After Suspected COVID-19

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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